10% आरक्षण बिल को सुप्रीम कोर्ट में NGO ने दी चुनौती, बिल खारिज करने की मांग

संसद में 10 परसेंट आर्थिक आरक्षण बिल पास होने के 24 घंटे के अंदर एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देते हुए रद्द करने की मांग की है. यूथ फॉर इक्वलिटी नाम के NGO ने बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में दलील दी है कि ये संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसले दोनों का उल्लंघन है.

नई दिल्ली: सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए नौकरियों और शिक्षा में 10% आरक्षण देने के लिए संविधान के 124वे संशोधन विधेयक 2019 को चुनौती देने के लिए एक एनजीओ यूथ फॉर इक्वलिटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। एंटी-रिजर्वेशन ऑर्गनाइजेशन ने गुरुवार को संसद के पास दिए गए संविधान (124वे संशोधन) विधेयक, 2019 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

यह विधेयक आर्थिक और पिछड़ी उच्च जातियों के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10% आरक्षण प्रदान करता है। यह मंगलवार को लोकसभा में 323-3 के बहुतम से पारित किया गया था। बुधवार को इसे बिल को राज्यसभा में रखा गया था। राज्यसभा में घंटों तक हुई बहस के बाद इस बिल पर वोटिंग हुई। सवर्ण आरक्षण बिल राज्यसभा में भी 165-7 के बहुमत से पारित कर दिया गया।

राज्यसभा ने मसौदा कानून को एक चयन समिति को भेजने के खिलाफ मतदान किया। यह बिल अब राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया है।

ये कहा याचिका में 

गैर सरकारी संगठन (NGO) यूथ फॉर इक्वेलिटी (Youth For equality) और कौशल कांत मिश्रा ने याचिका में इस विधेयक को निरस्त करने का अनुरोध करते हुये कहा है कि एकमात्र आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।याचिका में कहा गया है कि इस विधेयक से संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन होता है क्योंकि सिर्फ सामान्य वर्ग तक ही आर्थिक आधार पर आरक्षण सीमित नहीं किया जा सकता है और 50 फीसदी आरक्षण की सीमा लांघी नहीं जा सकती।

राज्य सभा ने बुधवार को 124वें संविधान संशोधन विधेयक को सात के मुकाबले 165 मतों से पारित किया था। सदन ने विपक्षी सदस्यों के पांच संशोधनों को अस्वीकार कर दिया। इससे पहले, मंगलवार को लोक सभा ने इसे पारित किया था।आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिये आरक्षण का यह प्रावधान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गो को मिलने वाले 50 फीसदी आरक्षण से अलग है।

राज्यसभा में आठ घंटे तक बिल पर हुई मैराथन चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि सामान्य वर्ग के गरीबी लोगों को इसके जरिए सरकारी नौकरियों और शिक्षण में संस्थानों आरक्षण का लाभ मिलेगा।बिल को ऐतिहासिक बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की इसको लेकर यह गंभीरता ही रही कि संविधान संशोधन के जरिये आरक्षण का यह प्रावधान किया जा रहा है। इसीलिए उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट भी संविधान संशोधन की इस प्रक्रिया को मान्य करेगा।

आर्थिक रुप से कमजोर तबकों का ख्याल रखने की पंडित जवाहर लाल नेहरू की संविधान सभा में कही गई बात का आनंद शर्मा की ओर से किए गए उल्लेख का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि यह भारत की परंपरा रही है। अगड़ी जाति के हमारे नेताओं ने दलित-आदिवासी और पिछड़ों को आरक्षण दिया। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पिछड़े समुदाय से होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगड़ी जाति के गरीबों के लिए आरक्षण किया है। इस 10 फीसद आरक्षण में बड़ी आबादी के आने को लेकर उठाए गए सदस्यों के सवालों और आंकड़ों को गैरवाजिब बताते हुए गहलोत ने स्पष्ट किया कि केवल सामान्य वर्ग के गरीबों को ही यह आरक्षण मिलेगा।

Web Title : 10% reservation challenge given to NGO by Supreme Court