राजे सरकार ने तीन गावों के नाम बदले, एक आदमी की ज़िद से ‘मियों का बाड़ा’ हुआ अब ‘महेश नगर’

-बाड़मेर के मियां का बाड़ा  मुसलिम नाम वाले इस गांव में हिंदुओं की नहीं हो रही थी शादी, इसलिए बदला गया नाम !

-एक आदमी की ज़िद से बदला गाँव का नाम

माधुसिंह@जोधपुर: उत्तरप्रदेश के मुगलसराय स्टेशन का नाम पंडित दीन दयाल स्टेशन किए जाने के बाद राजस्थान के जालोर का नरपाडा व झुंझनू के इस्माईलपुर गांव का नाम बदलकर पिचानवा खुर्द किया गया है. जिसके बाद अब सरहदी जिले बाड़मेर के एक गांव का नाम भी सरकार ने बदल दिया है। कभी मियां का बाड़ा कहलाने वाला गांव अब महेश नगर कहलाएगा। इसके लिए गृह मंत्रालय से मंजूरी भी मिल गई है। जबकि नियमों के अनुसार ‘राज्य सरकार चाहे तो किसी भी गांव का नाम बदल सकती है। राजस्थान के पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट, पोस्ट विभाग और जीएसआई को इस संबंध में एक सूचना भेजी जानी है।

दरअसल वंसुधरा राजे सरकार के शासन से ग्रामीणों में सांस्कृतिक चेतना जागी है। लोगों ने सरकार पर दबाव डलवाकर अपने गांवों के नाम बदलवाने शुरू कर दिए हैं। ग्रामीणों की शिकायत थी कि हिंदू बहुल गांव का नाम मुसलिम होने के कारण गांव के बेटे-बेटियों की शादी होने में दिक्कत होती है। ग्रामीणों की बात सुनने में वसुंधरा सरकार भी कोई कोताही नहीं बरत रही है। ग्रामीणों की मांग पर वसुंधरा सरकार ने वेसे प्रदेश के आठ मुसलिम नाम वाले गांवों का नाम बदल दिया है।

स्वतंत्रता से पहले पहले इस गाँव का नाम “महेश रो बाड़ो” था 

इसी अभियान के तहत वसुंधरा सरकार ने राजस्थान के बाड़मेर जिले के “मियों का बाड़ा” गांव का नाम बदल कर “महेश नगर” किया, मालूम हो कि इस गांव का नाम स्वतंत्रता से पहले पहले “महेश रो बाड़ो” ही था, लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसका नाम “मियों का बाड़ा”कर दिया गया। सही मायने में देखा जाए तो वसुंधरा सरकार ने इस गांव का नाम बदला नहीं है बल्कि उसके पुराने नाम को नया रूप दिया है। जो भाषाई दृष्टि से भी सहज और सरस है।

जानकारी के मुताबित गृह मंत्रालय को राज्य की बीजेपी सरकार ने इस साल की शुरुआत में प्रस्ताव भेजा था, जिसे गृह मंत्रालय ने अपनी मंजूरी दे दी है। यह 250 घरों की आबादी का गांव है जिसमें दो हजार की जनसंख्या है। इस गांव में मात्र चार परिवार अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। वहीं गांव के पूर्व सरपंच हनुवंत सिंह का कहना है कि मियों का बाड़ा का नाम बदलने की मांग 10 साल पुरानी है। उनका कहना है कि इस गांव के लोग भगवान शिव के उपासक होने की वजह से इसका नाम महेश नगर रखा गया है। इसके पहले इसका यही नाम था। लेकिन वक्त के साथ लोगों की बोली में बदलाव और पलायन के चलते इसे मियों का बाड़ा बुलाया जाने लगा। नाम परिवर्तन में विवाद होने को वजह यह भी हो सकती है कि एक समुदाय विशेष को स्थानीय भाषा मे मियां कहा जाता है।

एक आदमी की ज़िद से बदला गाँव का नाम
करीब 1500 से 2000 की आबादी वाला यह गांव हिंदू बाहुल है. यहां केवल चार परिवार मुस्लिमों के हैं. स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर जिला प्रशासन से गांव का नाम बदलने की गुजारिश की थी क्योंकि इस नाम से उन्हें ‘शर्मिंदगी’ होती थी. एक अधिकारी के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि गांव के नाम की वजह से युवाओं के लिए शादी के रिश्ते नहीं आ रहे हैं. दरअसल बाड़मेर ज़िले के सिवाना की रामपुरा पंचायत के पूर्व सरपंच हनवंत सिंह की ज़िद और मेहनत से अपने पैतृक गाँव मियों का बाड़ा का नाम बदलवा ही दिया। हनवंत सिंह जब छोटे थे तब अपने बुज़ुर्गों के मुँह से सुना था की राठौडी राज में गाँव का नाम महेश का बाड़ा था लेकिन आज़ादी के बाद सरकारी ग़लती से नाम देशी भाषा में महियों का बाड़ा से मियों का बाड़ा लिख दिया। यही ग़लती रेल विभाग ने भी जारी रखी। बहुसंख्यक गाँव होने के बावजूद ग़लत नाम गाँव वालों को खटकता रहा। हनवंत सिंह बाद में रामपुरा के सरपंच चुने गए और ठान लिया की गाँव का नाम वापिस बदलवा कर रहेंगे।
उन्होंने अपने ही स्तर पर राज्य सरकार, रेल मंत्रालय और गृह मंत्रालय में अर्ज़ियाँ करी और स्वयं के ख़र्च पर जयपुर और दिल्ली के चक्कर काटे। स्थानीय नेता कान सिंह कोटडी, हमीर सिंह, अमराराम चौधरी, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह नरेंद्र मोदी से भी मिले और नाम बदलने के लिए गुहार लगाते रहे। जोधपुर की पुरानी बहियाँ निकाल कर सही नाम के सबूत पेश किए और ख़ुद के पैसे से हाईकोर्ट के कई वकीलों से सलाह ली। आख़िर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने १४.१२.१७ को माना कि मियों का बाड़ा गाँव का प्राचीन नाम महेश का बाड़ा है।केंद्र ने नाम बदलने की अनुशंसा राज्य सरकार को कर दी।कई समितियों और अधिकारियों की जाँचो के बाद १.६.१८ को राजस्थान सरकार ने गाँव का नाम मियों का बाड़ा से बदल कर प्राचीन महेश का बाड़ा के समान महेश नगर कर दिया।

अब रेल मंत्रालय भी स्टेशन का नाम जल्द ही मियों का बाड़ा होल्ट से महेश नगर कर देगा। गाँव में भी ख़ुशी की लहर है और तमाम दौड़ भाग के बाद अपने काम में सफलता मिलने पर महेश नगर गाँव के लोग अपने नए गाँव का पहला सम्मान समारोह हनवंत सिंह का रखने की योजना बना रहे हैं। 

फाइल फोटो

नाम बदलने की प्रक्रिया लंबी

राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग के सब रजिस्ट्रार सुरेश सिंधी का कहना है कि एक पूरी प्रक्रिया अपना कर नाम बदला जाता है. पहले पंचायत सबूत या फिर नाम बदलने के आधार पर सर्वसम्मति से राजस्व विभाग को सिफारिश भेजता है जिसकी पुष्टि कर राज्य सरकार भारत सरकार को भेजता है जहां से अनुमति मिलने के बाद हम नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू करते हैं. हमने कई नाम बदल दिए हैं और कई प्रक्रिया में है.

इन गांवों के अलावा बहुत सारे ऐसे गांव भी हैं जिनका नाम या तो जातियों के आधार पर बदला जा रहा है या फिर पंचायत की मांग पर सही किया जा रहा है. राजस्थान के जालौर का नरपाड़ा का नाम नरपुरा, मेडा ब्राह्मन का नाम मेडा पुरोहितान, नवलगढ़ के डेवा की ढाणी के नाम गिरधारीपुरा किया गया है. हालांकि बीजेपी सरकार का यह बदलाव कांग्रेस को रास नहीं आया. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि बीजेपी हमेशा लोगों को सियासी फायदा लेने के लिए लोगों को बांटने का काम करती है.

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से कुछ वक्त पहले वसुंधरा राजे सरकार बाड़मेर के गांव मियों का बाड़ा के नाम को महेश नगर में बदलने के बाद विरोधियों के तीखे तेवर देखने वाली भारतीय जनता पार्टी अब इस नए नाम परिवर्तन को लेकर क्या स्टैंड रखती है यह देखने वाली बात होगी।

Web Title : A man's stubborn 'miyan bark' has now become 'Mahesh Nagar'