जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद आसाराम के अच्छे दिनों की हो गई शुरुआत, आईटी एक्ट के मामले में मिली जमानत

जोधपुर। नाबालिग के साथ यौन उत्पीडन के आरोप में आजीवन सजायाप्ता कैदी आसाराम को कोर्ट से मंगलवार को मामूली राहत मिली. आसाराम को आईटी एक्ट मामले में आज जोधपुर महानगर मजिस्ट्रेट संख्या एक से जमानत मिल गई है। आसाराम पर उदयमंदिर थाने के तत्कालीन थानाधिकारी हरजीराम ने 15 नवम्बर 2014 एफआईआर दर्ज करवाकर आसाराम और उसके समर्थकों पर जान से मारने की धमकी देने को आरोप लगाया था।

पुलिस ने इस मामले में आसाराम के खिलाफ 353, 355, 384, 117, 189, 120आईपीसी व 66एआईटी एक्ट में जोधपुर महानगर मजिस्ट्रेट संख्या तीन की अदालत में चालान पेश किया था। कोर्ट ने इसमे से 384 व 66ए में पूर्व में उन्मोचित कर दिया था हाईकोर्ट में अन्य धाराओं को चुनौती दी गई है जिसमें हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया 353 व 355 को नही मानते हुए सुनवाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी। सुनवाई पर रोक होने के चलते जोधपुर महानगर मजिस्ट्रेट संख्या एक के समक्ष आसाराम की जमानत के लिए आवेदन पेश किया गया था। जमानत आवेदन पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने स्वीकार करते हुए आसाराम की जमानत मंजूर कर ली है।

आपको बता दें कि उदयमंदिर थाने के तत्कालीन थानाधिकारी हरजीराम ने 15 नवंबर 2014 को आसाराम और उसके समर्थकों पर जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज कराया था। इस मामले में जोधपुर की अदालत ने आसाराम को जमानत दी है। इसी के साथ आसाराम पर आरोप है कि उन्होंने हरजीराम का कार्टून बनाकर उन्हें रावण की तरह पेश किया और सोशल मीडिया पर इस कार्टून को वायरल भी किया। इस मामले में आसाराम और उसके साधकों को आरोपी बनाया गया था।

फिलहाल आसाराम जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद है और आसाराम के अधिवक्ता नीलकमल बोहरा ने कोर्ट में उसका पक्ष रखा. जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद कैदी नम्बर 130 यानी आसाराम को इस मामले में आसाराम को 25 हजार रुपए का मुचलका भी जमा कराना होगा. हाईकोर्ट ने इस मामले में अंग्रिम कार्रवाई पर रोक भी लगा रखी थी. यह जमानत मिलने के बाद आसाराम के लिए कानूनी लड़ाई की राह थोड़ी सरल हो गई.

Web Title : Asaram's good days started in Jodhpur Central Jail