अंतरिक्ष में बड़े खिलाड़ियों को टक्कर देगा भारत

चांद के बाद इसरो की नजर अब सूरज पर

नई दिल्ली। भारत का चांद पर जाने वाला मिशन चंद्रयान-2, फिलहाल भेजा जाने वाला भारत का सबसे बड़ा मिशन होगा। इसे भारत के शक्तिशाली रॉकेट जीएसएलवी एमके-3 के जरिए चंद्रमा पर भेजा जाएगा। इस मिशन में आॅर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल होंगे, जो चंद्रमा पर जाकर उसका अध्ययन करेंगे। यह इस साल इसरो का सबसे महत्वाकांक्षी मिशन है। हालांकि इसरो की लिस्ट में चर्चित चंद्रयान-2 या गगनयान मानव मिशन के अलावा भी करने को अभी बहुत कुछ है। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा में ‘युविका- यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम आॅफ स्कूल स्टूडेंट्स’ कार्यक्रम मेंं इसरो के चेयरमैन ने इन मिशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसरो अगले दशक में 7 अलग-अलग ग्रहों पर मिशन भेजने वाला है। इन मिशन में मार्स आॅर्बिटर 2, चंद्रयान 3, शुक्र ग्रह पर एक मिशन, एक्सपोसैट प्लेनेटरी एक्सप्लोरेशन, आदित्य आदि प्रमुख होंगे। इसके साथ ही भारत दुनियाभर में अंतरिक्ष में सबसे मजबूत देशों में से एक हो जाएगा।
चंद्रयान-2 के परीक्षण अंतिम चरण में
चंद्रयान-2 से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि एजेंसी आॅर्बिटर, लैंडर और रोवर के परीक्षण के आखिरी दौर में है। और वे सभी मई के आखिरी तक लॉन्चिंग के लिए तैयार होंगे। हालांकि इसरो प्रमुख ने कहा कि चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग जुलाई के पहले या दूसरे हफ्ते में ही की जाएगी। इसका कारण एक आने वाला ग्रहण और दूसरी अनुकूल परिस्थितियां होंगीं। चंद्रयान-2 भारत के लिए बहुत जरूरी मिशन है क्योंकि इससे हम चंद्रमा के उस हिस्से पर जा रहे हैं, जहां इससे पहले कोई भी नहीं गया है। यह जगह है चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव और कभी भी चंद्रमा पर जाने वाले इस मिशन की नई तारीखों की घोषणा की जा सकती है। चंद्रयान-2 भारत के लिए बहुत जरूरी मिशन है क्योंकि इससे हम चंद्रमा के उस हिस्से पर जा रहे हैं, जहां इससे पहले कोई भी नहीं गया है। यह जगह है चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव और कभी भी चंद्रमा पर जाने वाले इस मिशन की नई तारीखों की घोषणा की जा सकती है। चंद्रयान 2 मिशन के लिए जाने वाले 13 पेलोड के बारे में इसरो चेयरमैन ने विस्तार से बताया. उन्होंने कहा, दरअसल ये पेलोड वातावरण में उपस्थित तत्वों की जांच करेंग। इसके अलावा वे चंद्रमा की सतह की जांच, उसकी माप और ऊपरी सतह का संरचना और चंद्रमा की सतह के तत्वों की जांच करेंगे।
शुक्र के बारे में बहुत सी जिज्ञासा
इसरो चीफ ने कहा, शुक्र के बारे में बहुत सी जिज्ञासा हैं। हमने भारत और दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदायों को शुक्र के अध्ययन के बहुत अवसर देने की घोषणा की है। इस मिशन पर भेजे जाने के लिए 20 पेलोड आ रहे हैं। इसरो चीफ ने मिशन आदित्य का जिक्र भी किया, जिसे 2020 के बीचोबीच लॉन्च किया जा सकता है। इसे सूर्य के कोरोना का अध्ययन करने के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने इस मिशन का जिक्र करते हुए यह भी बताया कि इस मिशन से हमें जलवायु परिवर्तन के बारे में जानने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि आदित्य और एक्सपो सैट मिशन की प्लानिंग पूरी हो चुकी है और इसे पास भी किया जा चुका है। द मार्स आॅर्बिटर-2 और चंद्रयान-3 अभी प्लानिंग की स्टेज में हैं। उन्होंने कहा कि प्लान हो जाने के बाद इसरो इसे प्रोजेक्ट के तौर पर आगे बढ़ाएगा और इस पर काम किया जाएगा।

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