चांद पर खनिज खोजने जा रहा है चंद्रयान-2

नई दिल्ली। भारत अपना दूसरा स्वदेशी मिशन चांद पर भेजने वाला है। यह चांद पर क्या लेकर जाएगा, इसकी जानकारी इसरो ने दी हैं। जुलाई में लॉन्च होने वाला यह चंद्रयान-2 मिशन अपने साथ 13 पेलोड ले जाने वाला है। यह 10 साल पहले भेजे गए चंद्रयान-1 मिशन का एडवांस वर्जन है। इसमें से एक पेलोड अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का भी होगा। इन 13 भारतीय पेलोड में 8 आॅर्बिटर, 3 लैंडर और 2 रोवर होंगे। इसके अलावा इसरो का एक पैसिव एक्सपेरिमेंट होगा। इसरो ने मिशन के बारे में यह जानकारियां जारी की है। हालांकि इन सभी पेलोड के काम को लेकर विस्तार से जानकारियां नहीं दी हैं। यह पूरा स्पेसक्राफ्ट कुल मिलाकर 3.8 टन वजनी होगा।
क्यों भेजा जा रहा है यह मिशन?
इसरो के पूर्व चेयरमैन जी.माधवन नायर ने बताया था कि चंद्रमा पर भेजा जा रहा भारत का दूसरा मिशन चंद्रयान-2, चंद्रमा की सतह पर कुछ खास खनिजों को खोजने के लिए जाएगा। चंद्रयान-2, इसरो के चांद पर भेजे गए पहले मिशन के 10 सालों बाद जा रहा है। इसरो ने अपना चंद्रयान-1 मिशन 2009 में भेजा था। इस मिशन में भी एक चंद्रमा का चक्कर लगाने वाला आॅर्बिटर और एक इम्पैक्टर था लेकिन इस मिशन में चंद्रयान-2 की तरह का रोवर नहीं था, जो चंद्रमा पर घूम-घूमकर खनिजों के नमूने जुटा सके। हालांकि फिर भी इस मिशन को चांद की सतह पर पानी के नमूने खोजने का श्रेय दिया जाता है।
चांद पर कहां जाएगा और कैसे काम करेगा यह मिशन?
इसरो के चेयरमैन के सिवान ने बताया था कि हम चांद पर एक ऐसी जगह जा रहे हैं, जो अभी तक दुनिया से अछूती रही है। यह है चंद्रमा का दक्षिणी ध्रूव। वहीं अंतरिक्ष विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था कि इस मिशन के दौरान आॅर्बिटर और लैंडर आपस में जुड़े हुए होंगे। रोवर को लैंडर के अंदर रखा जाएगा। लॉन्च के बाद पृथ्वी की कक्षा से निकलकर यह रॉकेट चांद की कक्षा में पहुंचेगा। इसके बाद धीरे-धीरे लैंडर, आॅर्बिटर से अलग हो जाएगा। इसके बाद यह चांद के दक्षिणी ध्रूव के आस-पास एक पूर्वनिर्धारित जगह पर उतरेगा। बाद में रोवर वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए चंद्रमा की सतह पर निकल जाएगा।
चंद्रयान-1 में क्या-क्या था?
चंद्रयान-1, 11 पेलोड लेकर गया था। इसमें से 5 पेलोड भारत के थे। तीन पेलोड यूरोप के और 2 अमेरिका के थे। इसके अलावा एक पेलोड बुल्गारिया का भी था। 2008 में, हमने अपना पहला सैटेलाइट सफलतापूर्वक चांद पर भेजा था। इसने चंद्रमा के बारे में बहुत सारी जानकारियां इक_ा की थीं। इसने भी वहां होने वाले खनिजों आदि के बारे में पता किया था। हमने इस दौरान भारतीय झंडा भी चांद की सतह पर फहराया था। चंद्रयान-1 को चंद्रमा की सतह पर पानी खोजने का श्रेय दिया जाता है।

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