राजस्थान में बार-बार बंद की जा रही इंटरनेट सेवाएं, COAI ने दूरसंचार विभाग को लिखी चिट्ठी

जयपुर। राजस्थान में विभिन्न परीक्षाओं के कारण बार-बार बंद किए जा रही इंटरनेट सेवाओं से परेशान आकर सेल्युलर ऑपरेटर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने दूरसंचार विभाग को चिट्ठी लिखी है। सीओएआई ने अपनी चिट्ठी में विभाग को कहा है कि प्रदेश में बार-बार इंटरनेट सेवाओं रोकने से काफी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा ये सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।

राजस्थान में परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए बार-बार इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया जाता है। पिछले 6 महीने में विभिन्न कारणों से इंटरनेट को 50 बार बंद किया गया। वहीं अगस्त से लेकर अब तक 140 से ज्यादा बार इंटरनेट सेवाओं को रोका गया है। इस साल राजस्थान में शिक्षकों के लिए राजस्थान योग्यता परीक्षा 2018, राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती और राजस्थान राज्य और अधीनस्थ सेवाएं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा 2018 के समय नकल न हो, इसलिए इंटरनेट को बंद किया गया।

इन सबसे परेशान होकर सीओएआई ने दूरसंचार विभाग को चिट्ठी लिखी है। अपनी चिट्ठी में सीओएआई ने लिखा कि इंटरनेट सेवाओं को बंद करने से सर्विस प्रोवाइडर्स को नुकसान हो सकता है। इसके लिए सीओएआई ने इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशन्स (ICRIER) का हवाला दिया जिसमें लिखा था इंटरनेट सेवाएं बंद होने से 87,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अप्रैल 2018 की आईसीआरआईईआर की रिपोर्ट के अनुसार 2012-2017 के बीच इंटरनेट सुविधाएं 16,315 घंटे (680 दिन) बंद रहीं, जिससे देश को 87,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

सीओएआई ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि इंटरनेट सेवाएं रोकने से केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। चिट्ठी में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस तरह के निलंबन दूरसंचार सेवाओं (सार्वजनिक आपातकालीन या सार्वजनिक सुरक्षा) नियम, 2017 के अस्थायी निलंबन के प्रस्ताव की भावना को भी कम कर रहे हैं।नियमों के मुताबिक, अपरिहार्य परिस्थितियों नें राज्य सचिव इंटरनेट सेवाओं के निलंबन का आदेश जारी कर सकता है। हालांकि, राजस्थान सरकार ने 2 सितंबर, 2017 की अधिसूचना के माध्यम से नियमों के निर्देशों को हलका कर दिया है। इसके बाद अब क्षेत्र के गृह विभाग के अधिकारी यानि कि डिविजनल कमिश्नर्स भी ये आदेश दे सकते हैं।

 

Web Title : COAI writes to the Department of Telecommunications