कोर्ट ने हेरोइन के तीन तस्करों को दी बीस-बीस साल की सजा, 2009 के मामले में कोर्ट ने सुनाया फैसला।

जोधपुर। हेरोइन तस्करी के नौ साल पुराने मामले में बाड़मेर के विशिष्ट न्यायाधीश (एनडीपीएस प्रकरण) ने तीन आरोपियों को 20-20 साल के कारवास की सजा सुनाई है। इसमें दस साल कठोर कारावास होगा। वर्ष-2009 में बाड़मेर के सरुपे का तला में पकड़ी गई प्रदेश की सबसे बड़ी हेरोइन खेप के मामले में तीन तस्करों को विशिष्ठ न्यायाधीश (एनडीपीएस प्रकरण) अनिल आर्य ने कठोर कारावास की सजा सुनाई।

विशिष्ट लोक अभियोजक गणपत गुप्ता ने बताया कि बाखासर थाने में 20 नवंबर 2009 को दर्ज मामले में बलवंतदान पुत्र शक्तिदान चारण निवासी बूठ हाल इन्द्राकालोनी और गोकलराम व सिमरथाराम पुत्र रामराम जाट निवासी दीपला के खिलाफ हेरोइन तस्करी का मामला दर्ज था। इनसे 15 किलो 536 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। इतनी भारी मात्रा में हेरोइन बरामदगी का यह राज्य का बड़ा प्रकरण था। मामले में विशिष्ट न्यायाधीश (एनडीपीएस प्रकरण) अनिल आर्य ने तीनों आरोपियों को 20-20 साल के कारावास के आदेश किए हैं। तीनों आरोपी अभी जेल में हैं।

पाकिस्तान से ला रहा था हेरोइन

सीमावर्ती दीपला गांव पाक सीमा से दो किलोमीटर दूर है। पुलिस को सूचना मिली कि यहां हेरोइन की बड़ी खेप आने वाली है। इस पर पुलिस जाप्ते के साथ पहुंच गई। निगरानी के दौरान पाकिस्तान सीमा से बलवंतदान आता दिखाई दिया। उसके हाथ में प्लास्टिक का कट्टा था जिसमें हेरोइन की 15 थैलियां थी। बाखासर थाना पुलिस ने वर्ष-2009 में तस्करों के कब्जे से प्रदेश की सबसे बड़ी खेप 15.536 किलो हेरोइन बरामद की थी। नौ साल बाद 24 गवाह कर कोर्ट में तीन आरोपियों के खिलाफ फैसला सुनाया। बलवंतदान और उसके अलावा दोनों अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।

Web Title : Court sentences twenty-two-year sentence to three smugglers of heroin