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जयपुर। पश्चिमी बंगाल में रेजीडेंट डॉक्टर की पिटाई के बाद उपजे बवाल ने पूरे देश में हाहाकार मचा दिया है। राजस्थान में प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों में चिकित्सक सोमवार सुबह 6 बजे से मंगलवार सुबह 6 बजे तक के लिए हड़ताल पर चले गए। प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों में सुबह से ही व्यवस्थाएं चरमराई गई। आउटडोर से लेकर आईसीयू तक हाहाकार मचा रहा और मरीज इलाज को तरसते रहे। राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के निजी अस्पतालों में आउटडोर सेवाएं पूरी तरह से ठप रहीं। केवल आपातकालीन सेवाएं सुचारू रखी गईं।
सबसे ज्यादा असर एसएमएस अस्पताल में
डॉक्टर्स की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर राजधानी जयपुर के एसएमएस अस्पताल में देखने को मिला। सुबह मरीज आउटडोर में पर्ची पर दवाएं लिखाने के लिए इधर से उधर भटकते रहे। दस बजे बाद वरिष्ठ चिकित्सक आउटडोर में पहुंचे लेकिन मरीजों के रैले के आगे वे भी बेबस नजर आए। रेजीडेंट नहीं होने के कारण एसएमएस अस्पताल में सोमवार को सभी तयशुदा आपरेशन टाल दिए गए। टाले गए आॅपरेशन की संख्या 315 बताई जा रही है। वहीं वार्डों और आउटडोर में मरीजों को न तो रूटीन की जांच लिखी गई और न ही उनको दवाएं दी गई। एसएमएस अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं और आईसीयू की व्यवस्थाएं लड़खड़ाती रहीं। मरीज पूरी तरह से कम्पाउंडरों के भरोसे रहे। अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं तो की लेकिन इन व्यवस्थाओं के चरमराने में ज्यादा समय नहीं लगा और मरीजों की परेशानी बढ़ गई। शहर के कावंटिया अस्पताल में सुबह आउटडोर में ताला लगा दिया गया जिससे विवाद हो गया। अस्पताल अधीक्षक ने आउटडोर में ताला लगाने की घटना के जांच के आदेश दिए गए। एसएमएस अस्पताल जैसे ही हालात जेकेलोन, महिला चिकित्सालय, जनाना अस्पताल चांदपोल, जयपुरिया अस्पताल में देखने को मिले।
सभी जिला अस्पतालों पर भी असर
प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तक हडताल का व्यापक असर देखने को मिला। सुबह मरीज इलाज की आस में इन चिकित्सा संस्थानों में पहंंचे जरूर लेकिन मरीजों को इलाज नहीं मिला। न मरीजों को दवाएं लिखी गई और न ही उनको दवाएं मिली।
निजी अस्पतालों में आउटडोर सेवाएं ठप
राजधानी जयपुर में निजी अस्पतालों में आउटडोर सेवाएं पूरी तरह से ठप रही। केवल इमरजेंसी में ही मरीजों को भर्ती किया गया। शाम को ही निजी अस्पतालों में आउटडोर सेवाएं शुरू हुई। निजी अस्पताल संचालकों का कहना था कि उन्हें मरीजों की परेशानी होने पर अफसोस है।
हड़ताल को चिकित्सा मंत्री ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया
उधर चिकित्सकों की हड़ताल को चिकित्सा मंत्री डॉ.रघु शर्मा ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। डॉ.शर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में एक हजार से ज्यादा आयुष चिकित्सकों को तैनात किया गया है। चिकित्सा मंत्री ने मरीज और चिकित्सक दोनों को ही संयम बरतने की अपील की। एक हजार लोग, जो आयुष में काम कर रहे हैं,वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर चिकित्सा केंद्रों पर तैनात किए गए हैं।