दलित किसान की आत्महत्या पर राजस्थान की राजनीति में आया ‘भूचाल’, पढ़े पूरी खबर…

-विपक्ष का तंज, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, सरकार किसका गौरव मना रही, सवालों के घेरे में आई कर्जमाफी योजना

डॉ.के.आर.गोदारा@ नागौर। प्रदेश में कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या कर रहे हैं और सरकार गौरव यात्रा निकाल रही है। भाजपा सरकार की गौरव यात्रा पर विपक्षी दल तंज कस रहा है कि जब प्रदेश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं तो ऐसे में सरकार किस गौरव की बात कर रही है। नागौर जिले के कुचामन क्षेत्र के चारणावास गांव के दलित और विकलांग किसान मंगलराम मेघवाल ने 4 अगस्त शनिवार को बैंक का कर्ज नहीं चुका पाने के चलते आत्महत्या कर ली थी। बैंक का कर्ज नहीं चुका पाने पर नांवा के एसडीएम ने जमीन की नीलामी के आदेश दिए थे। इस पर मंगलाराम ने आत्महत्या कर ली थी। दलित किसान की आत्महत्या के बाद राजस्थान की राजनीति में भूचाल सा आ गया है और किसानों की आत्महत्या को लेकर सियासत तेज हो गई है। दलित किसान की आत्महत्या के बाद कुचमान क्षेत्र के चारणावास गांव में राजनेताओं के आने का सिलसिला भी तेज हो गया है। साथ ही कांग्रेस सरकार को घेरने में लगी हुई है।राजस्थान में एक माह में आधा दर्जन किसानों ने की आत्महत्याकर्जमाफी पर उठे सवाल
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट बुधवार को मृतक के परिवार से मिले, सांत्वना दी और फिर सियासत शुरू हो गए। मंगलाराम के कर्ज की बकाया राशि कांग्रेस पार्टी की ओर से चुकाने की घोषणा कर दी गई। मंगलाराम की खुदकुशी ने राजस्थान सरकार की किसानों की कर्जमाफी योजना को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। मंगलाराम ने बैंक से 2 लाख 98 हजार का लोन लिया था, उसमें से एक लाख 75 हजार चुका दिए थे। मंगलाराम इस उम्मीद में बैठा था कि कर्जमाफी योजना में बाकी कर्ज माफ हो जाएगा। एक किसान के लिए खेत महज जमीन का टुकड़ा नहीं। उसकी आन बान शान है। परिवार का आरोप है कि मंगलाराम अपनी आन यानी जमीन कुर्की के नोटिस का वज्रपात सहन नहीं कर पाया और फंदे पर लटक गया। सचिन पायलट नागौर दौरे के लिए हुए रवाना, मृतक किसान मंगलाराम के परिवार वालों के करेंगे मुलाकातक्या था मामला
कुचामन पंचायत समिति क्षेत्र के गांव चारणावास ग्राम पंचायत हुडील निवासी तीस वर्षीय दलित किसान मंगलचंद उर्फ मंगलाराम मेघवाल पुत्र गिरधारीराम मेघवाल विकलांग होने के साथ अविवाहित था। उसने पंजाब नेशनल बैंक बाड़लावास शाखा से 2 लाख 98 हजार रुपए का कृषि ऋण लिया था। इसके बाद किसान ने एक लाख 75 हजार रुपए की ऋण राशि बैंक में जमा करवा दी थी। शेष ऋण राशि एक लाख 23 हजार रुपए जमा कराने के लिए बैंक बार-बार किसान को नोटिस भेज रही थी। जबकि किसान मंगलाराम कर्ज माफी की आस लिए बैठा था। इधर बैंक का ऋण जमा नहीं करवा पाने पर एसडीएम नांवा सुखराम ने 2 अगस्त 2018 को दलित किसान मंगलाराम की जमीन को कुर्की करने का फैसला सुनाया। साथ ही 7 अगस्त 2018 तक ऋण राशि जमा नहीं कराने पर जमीन कुर्क करने का आदेश दिया। जमीन के कुर्की आदेश मिलने के बाद 4 अगस्त 2018 को ऋण नहीं चुका पाने से परेशान मंगलाराम ने आत्महत्या कर ली।चार लाख का नोटिस
मामले में मृतक मंगलाराम के भाई पूरणराम का कहना है कि मंगलाराम को धक्का तब लगा जब बैंक ने साढ़े चार लाख का लोन बकाया बताया। नोटिस में कहा कि सात अगस्त तक बकाया चार लाख जमा नहीं कराया तो जमीन कुर्क कर दी जाएगी। वहीं इस पुरे घटनाक्रम को लेकर सुखराम गुर्जर एसडीएम नांवा, नागौर का कहना है कि बैंक कर्ज नहीं चुकाने पर नीलामी के आदेश दिए थे, लेकिन इस मामले को बेवजह राजनीतिक रूप दिया जा रहा है।

Web Title : Due to the suicide of a Dalit farmer, politics came in Rajasthan