देशभर के किसानों का दिल्ली में जमावड़ा, आज संसद तक मार्च की तैयारी

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर अन्नदाता अपनी मांगों को लेकर उतरे हैं। देश भर के करीब एक लाख किसान पूर्ण कर्ज मुक्ति और कृषि उपज लाभकारी मूल्य गारंटी बिलों को पास कराने को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों से हजारों किसान दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंच चुके हैं तथा 30 नवंबर को संसद तक मार्च करेंगे। अपनी मांगें मनवाने के लिए किसान केंद्र सरकार से आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार है।हजारों की संख्या में रामलीला मैदान पहुंचे किसान, आज संसद तक मार्च की तैयारी

स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता और सांसद राजू शेट्टी ने आउटलुक को बताया देशभर से हजारों किसान दिल्ली के रामलीला मैदा पहुंच चुके हैं तथा महाराष्ट्र से करीब 25,000 किसान आने वाले हैं। महाराष्ट्र के सांगली जिले से किसानों की स्पेशल ट्रेन जिसमें 4,000 किसान हैं रात तक दिल्ली पहुंच जायेगी। इसके अलावा अन्य राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर तथा पूर्वोत्तर राज्यों के किसान इस मार्च में भाग लेंगे।

संसद का एक विशेष सत्र बुलाने की मांग

उन्होंने बताया कि प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले लोकसभा चुनाव के समय किसानों से फसलों की लागत का डेढ़ गुना दाम और सबका ऋण माफ करने का वादा किया था, लेकिन चुनाव के बाद सरकार अपना वादा भूल गई, इसलिए देशभर के किसान केंद्र सरकार से नाराज हैं। उन्होंने कहा कि हम अपनी दोनों बिलों के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं, इस देश में किसानों की आबादी 70 फीसदी है तो क्या किसानों को यह हक भी नहीं है कि केंद्र सरकार उनके लिए एक विशेष सत्र बुला सके? देश में किसान कीड़े-मकोड़े की तरह मर रहे हैं, लेकिन ना तो केंद्र सरकार को किसानों की फिक्र है, और ना ही राज्य सरकारों को।

देश का किसान त्रस्त

भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि देश का किसान त्रस्त है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार को चिंता ही नहीं है। किसान को केवल वोट के समय याद किया जाता है लेकिन अब देश का किसान जाग चुका है तथा अपनी मांगें मनवाने के लिए ही दिल्ली आ रहा है। उन्होंने कहा कि किसान अपना हक लेकर रहेगा।

तेलंगाना में पिछले पांच साल में 4,000 किसान कर चुके हैं आत्महत्याएं

आल इंडिया किसान सभा, तेलंगाना के नेता वारेला वेंकट ने बताया कि कर्ज के कारण तेलंगाना में पिछले पांच साल में करीब 4,000 किसान आत्महत्याएं कर चुके हैं। हमारी केंद्र सरकार से संपूर्ण कर्ज माफी और स्वामीनाथन रिपोर्ट के आधार पर फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग है, तथा राज्य सरकार से 60 साल की आयु के बाद 10,000 प्रति महीना पेंशन देने की मांग है।

खेती घाटे का सौदा 

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले की पूरनपुर तहसील के किसान इन्द्रपाल ने बताया कि फसलों के उचित मूल्य मिलते नहीं है, जबकि डीलज, बिजली, खाद, बीज और कीटनाशकों के साथ ही लेबर महंगी होने से खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। इसलिए हमारे बच्चे खेती नहीं करना चाहते हैं।

बैंक नहीं दे रहे हैं कर्ज

महाराष्ट्र के शिर्डी के पुणतांबा गाव के किसान बाला साहेब ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फसलों पूर्ण कर्ज माफी और फसलों का समर्थन मूल्य स्वामीनाथन रिपोर्ट के आधार पर देने की बात लोकसभा चुनाव के समय की थी, लेकिन चार साल बीतने के बाद भी अभी तक इसे लागू नहीं किया है। देश का किसान बैंकों के कर्ज से दबा हुआ है तथा उसे आगे कर्ज भी नहीं मिल रहा है। इसलिए किसानों को मजबूरीवश साहूकारों से मोटे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ रहा है। राज्य में सूखे से किसानों की फसल नष्ट हो रही है इसलिए उन्हें आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ रहा है।

तमिलनाडु के किसान साथियों की खोपड़ियां लेकर आए हैं

तमिलनाडु के किसान समूह के नेता ने कहा है कि अगर उन्हें शुक्रवार को संसद भवन नहीं जाने दिया गया तो वो नग्न होकर मार्च करेंगे। किसानों का यह समूह आत्महत्या कर चुके अपने साथी किसानों की खोपड़ियां लेकर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने दिल्ली पहुंचा है।

Web Title : Farmers from all over the country gather in Delhi,