नागौर सीट से भारतीय जनता पार्टी नए चेहरे के साथ लड़ेगी चुनाव !

-कई संगठनों की मांग पर नागौर में भाजपा नए चेहरे को दे सकती मौका, नागौर विधायक के खिलाफ लगातार उठ रहे विरोध के सुर, पार्टी ने दिए कई विधायकों के टिकट काटने के संकेत
-रामकिशोर राव-
नागौर। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष व पार्टी में बड़े स्तर के नेताओं के बयानों के बाद विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से नागौर विधानसभा क्षेत्र के लिए किसी नए चेहरे के मैदान में उतारने की आशंका तेज हो गई है। विशेषकर कई सामाजिक व धार्मिक संगठनों के विरोध के चलते वर्तमान विधायक के टिकट कटने की प्रबल संभावना दिखाई दे रही है। राजस्थान में भाजपा ने मौजूदा कई विधायकों के टिकट काटने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन लाल सैनी ने सपष्ट किया है कि काम के आधार पर ही टिकट का बंटवारा किया जाएगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मौजूदा विधायकों के काम का हिसाब-किताब रख रही हैं।

सैनी ने कहा कि कोई गारंटी नहीं कि मौजूदा विधायकों को वापस टिकटें दी जाए। उन्होंने कहा कि बेहतर काम के हिसाब से ही टिकटें तय की जाएगी और अगले चुनाव में युवा नेताओं का खास ध्यान रखा जाएगा। बताया जा रहा है कि लंबे समय से वर्तमान विधायक के खिलाफ यहां पर कई संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं की नाराजगी साफ तौर पर देखने को मिल रही है। वहीं सूत्रों से संकेत मिले हैं कि भाजपा से जुड़े कई आनुषागिंक संगठनों के पदाधिकारियों ने भी खुलकर विरोध जताते हुए उम्मीदवार बदलने की मांग उच्च स्तर तक पहुंचाई है।

वहीं दूसरी ओर नागौर विधानसभा सीट पर भाजपा के वर्तमान विधायक हबीबुर्रहमान द्वारा एक बार फिर पार्टी बदलने की संभावना की चर्चा भी जोरों पर है। गत बार वो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। गौरतलब है कि अल्पसंख्यक मतों की संख्या अधिक होने के चलते भाजपा अब किस पर दाव खेलती है या फिर वर्तमान विधायक के प्रबल विरोध के बाद भी मौका देती है, यह तो आने वाला वक्त ही बता पाएगा।

चर्चा में इन दावेदारों के नाम
नागौर विधान सभा से भाजपा के नए चेहरे के रुप में कई नाम सामने आ रहे है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी अल्पसंख्यक के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जुड़े चेहरे को मौका दे सकती है। नागौर से भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मोहनराम चौधरी, भाजपा नेता जगवीर छाबा, कृषि मंडी व्यापार मंडल के अध्यक्ष भोजराज सारस्वत प्रबल दावेदार माने जा रहे है। वहीं संघ के कार्यकर्ताओं के अलावा भागीरथ मेहरिया तथा बिंदू चौधरी व भाजपा जिलाध्यक्ष रामचंद्र उत्ता के नाम भी चर्चा में है। दूसरी ओर अल्पसंख्यक मतों पर नजर रखते हुए पार्टी अल्पसंख्यक चेहरे पर भी विचार कर सकती है। हाल ही में कई अल्पसंख्यक नेता पार्टी के बड़े नेताओं से मुलाकात कर दावेदारी जता चुके हैं। इसके लिए नागौर की अल्पसंख्यक आबादी वाले बासनी गांव से नए चेहरे पर भी पार्टी दाव खेल सकती है।

सर्वे में चौंकाने वाले संकेत
हाल ही में हुए एक सर्वे में सामने आया हैं कि 180 प्लस का सपना देख रही भाजपा को कम से कम 125 विधायकों के टिकट काटने होंगे। सर्वे में बताया गया कि चुनाव मैदान में उतरने वाले सत्तापक्ष के मौजूदा विधायकों में से महज 17 फीसदी तक ही वापस जीतते हैं। सत्ता वापसी के लिए इस हिसाब से मुकाबले में आने के लिए ही भाजपा के पास नए चेहरे उतारना ही एकमात्र विकल्प बचता है।

सियासी जानकारों का भी यही कहना है कि सत्ता पक्ष के विधायकों की एंटीइनकमबेंसी का सबसे बड़ा कारण है। कई विधायकों का विरोध उच्च स्तर तक पहुंच चुका है। जिस पर पार्टी को गंभीरता से निर्णय लेना होगा। जानकारों का मानना हैं कि नए चेहरों के बिना सत्तारूढ भाजपा मुकाबले की स्थिति में नहीं आ सकती। भाजपा के बड़े स्तर के नेता भी नए चेहरों को मौका देने के बयान दे चुके है। जिससे नागौर जिले में भी कई सीटों पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

Web Title : From the Nagaur seat, the Bharatiya Janata Party will fight with a new face!