चले गए क्रिकेट को ‘भगवान’ देने वाले गुरु रमाकांत आचरेकर, 87 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले दुनिया के महानतम बल्लेबाजों में गिने जाने वाले सचिन तेंडुलकर के कोच रहे रमाकांत आचरेकर का निधन हो गया है. वो 87 सालों के थे और मुंबई में उन्होंने आखिरी सांस ली. आरचेकर का जन्म साल 1932 में हुआ था और सचिन को क्रिकेट की बुलंदियों तक पहुंचाने का श्रेय इन्हें ही दिया जाता है. रमाकांत आचरेकर को उनके क्रिकेट कोचिंग के लिए भारत सरकार द्रोणाचार्य अवॉर्ड से भी सम्मानित कर चुकी है. आचरेकर ने सचिन के अलावा कांबली जैसे क्रिकेटरों को भी बल्लेबाजी के गुर सिखाए थे.

मुम्बई: नए साल के दूसरे दिन की दूसरी सबसे बड़ी बुरी खबर सामने आई है कि सचिन तेंदुलकर के कोच रमाकांत आचरेकर का मुंबई में निधन हो गया है। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर के बचपन के कोच रमाकांत आचरेकर 87 वर्ष के थे, वह पिछले कई सालों से बीमार चल रहे थे। लंबी बामारी के बाद बुधवार शाम 6 बजकर 30 मिनट पर उनका निधन हुआ। कल 1 जनवरी 2019 यानी नए साल 2019 के दिन ही हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता कादर खान का भी निधन हो गया था।सचिन तेंदुलकर के कोच रमाकांत आचरेकर नहीं रहे

आचरेकर ने सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) के अलावा विनोद कांबली (Vinod Kambli), अजीत आगरकर, चंद्रकांत पंडित, प्रवीण आमरे, समीर दीघे और रमेश पोवार जैसे कई क्रिकेटर को ट्रेंड किया। मुंबई के शिवाजी पार्क मैदान में उन्होंने कई युवाओं को क्रिकेट खेलना सिखाया। आचरेकर मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के चयनकर्ता भी रहे थे।1932 में जन्में आचरेकर का बतौर खिलाड़ी उनका करियर उतना विख्यात नहीं रहा। क्रिकेट में दुनियाभर में उन्होंने प्रसिद्धी कोच के रूप में हासिल की खासकर क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर के कोच के रूप में जिनकी देखरेख में सचिन ने बल्लेबाजी के अधिकांश रिकॉर्ड अपने नाम किए। Sachin Tendulkar’s coach Ramakant Achrekar dies aged 87 in mumbai

रमाकांत आचरेकर को श्रद्धांजलि देते हुए बीसीसीआई ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘उन्होंने भारत को सिर्फ महान क्रिकेटर ही नहीं दिए बल्कि अपनी ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने खिलाड़ियों को अच्छा इंसान भी बनाया। भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान अमिट है।’ सचिन ने बचपन में जब अपने क्रिकेट के हुनर को निखारना शुरू किया था, तब उनके भाई अजीत तेंडुलकर ने ही शिवाजी पार्क में सचिन को आचरेकर से मिलवाया था। इसके बाद यहीं से गुरु-शिष्य तेंडुलकर-आचरेकर की इस जोड़ी को दुनिया भर में ख्याति मिली।

सचिन के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत के दिनों में आचरेकर तेंडुलकर को प्रर्याप्त प्रैक्टिस के लिए मुंबई के अलग-अलग मैदानों पर लेकर जाते थे। जब सचिन बेहरतर परफॉर्म कर अपने गुरु को प्रभावित करते थे, तो उन्हें ईनाम में वड़ा पाव मिलता था। सचिन के करियर को निखारने में उनका अहम योगदान रहा है। वो सचिन को अपने स्कूटर पर बिठाकर मुंबई में कई अलग-अलग जगहों पर मैच खिलाने ले जाते थे। आचरेकर ने सचिन की बल्लेबाजी निखारने के लिए एक प्रैक्टिस मैच का आयोजन किया था जिसमें सचिन को नंबर चार पर बल्लेबाजी करनी थी और इस मैच में सचिन को फील्डिंग नहीं करनी थी। आचरेकर का कहना था कि सचिन नंबर चार पर किस तरह से रन बना सकते इसका अनुभव देने के लिए उन्होंने ऐसा किया था। इस बात का खुलासा खुद आचरेकर ने ही किया था।

Web Title : Guru Ramakant Achrekar, who gave cricket 'God' gone