यहां विकास के विज़न को चिमनी दिखाती काली कहानी

बाड़मेर@माधुसिंह गोरा : सीमावर्ती बाड़मेर जिले में आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली नहीं होने पर बच्चे चिमनी की रोशनी से पढाई करने को मजबूर है । राज्य की वसुंधरा राजे सरकार और बायतु विधानसभा क्षेत्र के विधायक कैलाश चौधरी का विकास विजन इन जगहों पर दम तोड़ता नजर आता है।

बाड़मेर जिले के गिड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत खोखसर पूर्व में कड़वासरो की ढाणीयो में और गिड़ा ग्राम पंचायत के खारड़ा मानपुरा में सियागो की ढाणी, बैरड़ो की ढाणी सहित कई ग्राम पंचायतो में आज आजादी के 70 साल बाद भी बिजली की रौशनी को तरस रही है । ग्रामिणो का कहना है कि हमारे ढाणियो में आज तक बिजली नहीं पहुची इसलिए बच्चे चिमनी के जुगाड़ बना कर पढाई करने को मजबूर है ।

ग्रामीण ने बताया की इस बारे में कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों सहित जन प्रतिनिधियों को शिकायत की पर कोई ध्यान नही दे रहे हैं । चुनाव के समय सभी जन प्रतिनिधि वादा कर के गए पर आज दिन तक उस पर कुछ भी ध्यान नहीं दिया। हमे बिजले के एक बल्ब के लिए तरसाना पड़़ रहा है । आज हर घर मे बिजली की जरूरत है। बिना बिजली कुछ भी सम्भव नही है ।

सरकार हर घर बिजली का दावा कर रही हैं कब होगा ये सपना पुरा इसको लेकर हर जुबान खामोश है ग्रामीण प्रहलाद कड़वासरा बताते है कि खोखसर पूर्व में हमारी कड़वासरो की ढाणी में बिजली नहीं होने के कारण बच्चों को चिमनी के उजाले में रात को पढाई करनी पड़ती हैं । वहीं ग्रामीण जोगेन्द्र सियाग बताते है कि हमारे मानपुरा खारड़ा मे सियागो की ढाणी मे बिजली नहीं है । आज दिन तक किसी का ध्यान इस तरफ नही आया। एक तरफ जहां सरकार अभिनव औऱ स्वर्णिम भारत की बात करती है वही इन सब से परे बाड़मेर के गाँवो की यह काली कहानी सभी पर सवाल खड़े करती नजर आती है।

Web Title : Here is the black story showing the fireworks of development