ससुराल में नहीं था शौचालय तो महिला ने की शिकायत: कोर्ट ने दिलाया तलाक, पढ़े पूरी खबर

भीलवाडा: फिल्म अभिनेत्री विद्या बालन के द्वारा एक कदम स्वच्छता की ओर वाला विज्ञापन अब टीवी से उतर कर जमीन पर आ गया है. टीवी की हीरोइन को छोड़ आज हम आपको एक ऐसे हीरोइन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके ससुराल में टॉयलेट न होने की वजह से कोर्ट में जाकर पति से तलाक ले लिया है. कोर्ट ने इसे ससुराल में क्रूरता मानते हुए तलाक को मंजूरी भी दे दी है.

मामला राजस्थान के भीलवाड़ा का है जहां जिले के उपनगरपुर की रहने वाली एक महिला ने लगातार अपने पति से शौचालय बनावाने को कहा, लेकिन उसके पति ने उसकी शौचालय बनवाने की मांग पर ध्यान नहीं दिया, जिस पर उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद कोर्ट ने इस पर फैसला सुनाया जिसकी जानकारी न्यायिक हड़ताल के बाद अब बाहर आई. और कोर्ट ने महिला की निजता पर आघात मानते हुए और तलाक की अर्जी मंजूर कर ली.

महिला की शादी आटूण में हुई थी. जब वह शादी के बाद ससुराल पहुंची तो उसे पता चला कि घर में शौचालय ही नहीं है. सोने और बैठने के लिए घर में अलग-अलग कमरा भी नहीं था. जिस वजह से उसे बरामदे में सोना पड़ता था. महिला ने जब इसका विरोध किया तो ससुराल वाले उसे परेशान करने लगे. इसके बाद महिला ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ सदर थाने में जाकर एफआईआर करा दी.

2015 में ये मामला भीलवाड़ा पारिवारिक अदालत पहुंचा था. बीती 17 जुलाई को कोर्ट ने इस पर फैसला सुनाया जिसकी जानकारी न्यायिक हड़ताल के बाद अब बाहर आई है. मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश राजेंद्र शर्मा ने ससुराल में शौचालय न होने को महिला की निजता पर आघात मानते हुए और तलाक की अर्जी मंजूर कर ली.

शर्मा ने कहा कि घर में शौचालय न होने की वजह से महिलाओं को अंधेरा होने का इंतजार करना पड़ता है. ऐसे में उन्हें शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि बहनों की गरिमा के लिए क्या हम एक शौचालय की भी व्यवस्था नहीं कर सकते? 21 वीं सदी में खुले में शौच की प्रथा हमारे समाज पर कलंक है. शराब, तंबाकू और मोबाइल पर बेहिसाब खर्च करने वाले लोगों के घरों में शौचालय न होना बड़ी विडबंना है.

कोर्ट ने कहा कि घर में शौचालय और निजी कमरा न होने की वजह से महिला को मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा है. महिला के आरोपों के बाद उसके ससुराल पक्ष के लोग अपनी सफाई में साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद उन्हें दोषी मान लिया गया. फैमिली कोर्ट ने घर में टायलेट नहीं होने को क्रूरता मानते हुए एक महिला की तलाक की याचिका मंजूर कर ली.

21 वीं सदी में खुले में शौच की प्रथा हमारे समाज पर कलंक है. शराब, तंबाकू और मोबाइल पर बेहिसाब खर्च करने वाले लोगों के घरों में शौचालय न होना बड़ी विडबंना है.

Web Title : In-laws did not have toilets, women complained,