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जयपुर। अपनी काली कमाई को स्विटजरलैण्ड के स्विस बैंक में ठिकाने लगाने वाले राजस्थान में भी मौजूद है। आयकर विभाग ने अपनी छापेमारी में गत वित्त वर्ष में पहली बार न केवल विदेशों में छिपाई काली कमाई को उजागर किया, बल्कि स्विस बैंक खाता भी पकड़ा। विभाग ने पहली बार गलत बयान व झूठी जानकारी देने वाले करदाताओं को जेल की हवा खिलाने की कवायद भी की। 31 मार्च 2019 को समाप्त वित्तीय वर्ष 2018-19 राज्य के आयकर विभाग के लिए कई खट्टी मीठी यादें भी छोड़ गया।

छापे में पहली बार मिला स्विस बैंक अकाउंट
वित्तीय वर्ष 2018-19 में आयकर विभाग ने पहली बार राज्य के प्रमुख शहरों के साथ छोटे शहरों में रह कर चांदी कूटने के बावजूद पर्याप्त आयकर नहीं देने वाले करदाताओं पर भी फोकस किया। सूत्रों का कहना है कि गत वर्ष कोटपूतली के नरेड़ा गांव, सवाई माधोपुर, बांसवाड़ा और नागौर जैसे शहरों व कस्बों में उम्मीद से अधिक सफल कार्रवाईयां हुई। इसी तरह पहली बार आयकर अधिकारियों के हाथ उदयपुर में एक छापेमारी में दुबई में बैंक खातों के अलावा स्विटजरलैण्ड स्थित एक बैंक खाते के प्रमाण भी मिले। इसमें करीब 5 लाख डॉलर जमा बताए जा रहे हैं। इसी तरह जयपुर में हुई एक छापेमारी में अधिकारियों को दुबई में 6 बैंक खातें, ब्रिटेन के आॅयल आॅफ मेन देश में एक म्युचुअल फण्ड में करीब 20 करोड़ के निवेश का भी पता लगा।

छोटे शहरों में बड़ी कार्रवाईयां
आयकर अधिकारियों ने पिछले वित्त वर्ष में राज्य के बड़े शहरों में कार्रवाई के साथ छोटे शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में भी हाथ आजमाए। इसके अच्छे परिणाम भी सामने आए। बताया जाता है कि सवाई माधोपुर में हुई एक कार्रवाई में तो विभाग के हाथ बेनामी सम्पत्तियों का जखीरा तक मिला। इसी तरह कोटपूतली के नरेड़ा गांव में क्रेशर पर हुई कार्रवाई में भी विभाग को बड़ी नकदी बरामद करने की सफलता मिली। सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि बांसवाड़ा में हुई पहली कार्रवाई में भी विभागीय अधिकारियों के हाथ आयकर चोरी के पुख्ता प्रमाण लगे। कमोबेश यही सफलता नागौर में भी मिली। आयकर कानून में हुए संशोधन के बाद विभाग अब आयकरदाताओं से अघोषित आय का समर्पण कराने के स्थान पर दस्तावेजी प्रमाण जुटाने पर अधिक दे रहा है। बताया जाता है कि विभागीय अधिकारियों को पिछले साल दस्तावेजी प्रमाण के साथ पैन ड्राइव, ई-मेल, हार्ड डिस्क जैसे डिजिटल प्रमाण भी काफी हाथ लगे, जिससे भविष्य में विभाग को खासा राजस्व मिलने की उम्मीद है।

2018-19 का लेखा जोखा
इस वित्त वर्ष में राज्य में प्राप्त आयकर राजस्व 20564.60 करोड़ रुपए रहा जबकि जयपुर में प्राप्त राजस्व 6653.70 करोड़ रुपए रहा। इस दौरान राज्य में 48 समूह पर छापे मारे गए जिसमें जब्त नकदी और ज्वैलरी की कीमत 89 करोड़ रुपए है। इसके अलावा 8589 करोड़ की अघोषित आय उजागर हुई है। करदाताओं ने 227 करोड़ की काली कमाई स्वीकारी है। इस दौरान अदालत में 39 मामले दर्ज कराए। बेनामी निषेध इकाई की कार्रवाई में 193 सम्पत्तियां अटेच की गई। अटेच सम्पत्तियों का मूल्य करीब 393 करोड़ रुपए है। इस तरह राजस्व में 40 हुई रिकॉर्ड 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।

चुनाव भी रहे मददगार
गत वित्तीय वर्ष में हुए विधान सभा चुनाव और लोकसभा चुनाव की रणभेरी बजने का असर राज्य में आयकर विभाग के खजाने पर भी रहा। माना जा रहा है कि चुनावी वर्ष के कारण सरकारी कामकाज में बढ़ोतरी हुई और ठेकेदारों से मिलने वाले करों की बढ़ोतरी हुई। सूत्रों का कहना है कि गत वित्तीय वर्ष में विभाग को स्रोत पर आयकर कटौती राजस्व के रूप में आयकर आयुक्त जयपुर को 6653.70 करोड़ रुपए का राजस्व मिला। यह राशि इससे पिछले वित्त वर्ष के 4742.40 करोड़ की तुलना में करीब 40.30 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह आयकर विभाग की बैनामी निषेध इकाई ने गत वर्ष 193 सम्पत्तियों को प्रोविजनली अटेच किया जिनका मूल्य करीब 393 करोड़ रुपए है।

पहली बार दर्ज हुए आपराधिक मामले
आयकर विभाग ने गत वर्ष भी आयकर नहीं चुकाने वाले एक करदाता को जेल की हवा खिलाई। वहीं पहली बार अन्वेषण शाखा ने आयकर चोरी करने व झूठा बयान देने वाले 9 करदाताओं के खिलाफ 6 मामले अदालत में दर्ज करा सजा दिए जाने के मामले दर्ज कराए। हालांकि वित्तीय वर्ष 2018-19 में आयकर राजस्व की बात करें तो यह राशि 20564.60 करोड़ रुपए रही, जो केन्द्र सरकार की ओर से आवंटित संशोधित बजट लक्ष्य 23577 करोड़ रुपए की तुलना में 3012.40 करोड़ रुपए कम ही रहीं। राज्य में आयकर विभाग ने भले ही संशोधित आयकर बजट लक्ष्य के अनुरुप राजस्व नहीं जुटाया हो, लेकिन यदि राज्य में वित्तीय वर्ष 2017-18 में आयकर के रूप में एकत्र हुए 18693.30 करोड़ की तुलना में इस साल एकत्र किए गए 20564.60 करोड़ रुपए करीब 10 प्रतिशत अधिक जरूर है।

मंदी के चलते करदाताओं की आय प्रभावित
सूत्रों का कहना है कि अन्तरराष्ट्रीय मंदी के चलते राज्य के कारोबार व निर्माण गतिविधियों में शिथिलता का असर राज्य में भी रहा है। मंदी के चलते करदाताओं की आय भी प्रभावित हुई है, लेकिन इसके बावजूद बढ़े हुए आयकर राजस्व लक्ष्य प्राप्त करने के लिए आयकर अधिकारियों ने कमर कसी। इसी का परिणाम है कि राज्य में आयकर राजस्व संग्रहण पिछले साल की तुलना में करीब 10 प्रतिशत बढ़ा। चालू वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही का एक्शन प्लान राजस्थान में आयकर विभाग की मुखिया प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त नीना निगम के पास पहुंच चुकी है। इस एक्शन प्लान के अनुरुप विभागीय अधिकारी एक्शन शुरू भी कर चुके हैं।