ऐसे बनेगी जिंदगी भी जिंदादिल, जानिये विधुर निति के नुस्खे

विधुर निति आपको बहुत कुछ सिखा जाती है ... तो पढ़िए वो बातें जो आपके लिए जरुरी है.....

महात्मा विदुर महाभारत काल के महान नीतिज्ञ माने जाते हैं .. आप भी उनकी बैटन को जानिये ताकि आप अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकें: Image result for vidhur

1. मित्र वही है जिस पर पितातुल्य विश्वास किया जा सके।

2. विपत्ति का निवारण धैर्य और युक्तिपूर्ण पौरुष से होता है, चिंता से नहीं।

3. बुद्धि, कुलीनता, इन्द्रियनिग्रह, शास्त्र-ज्ञान, पराक्रम, अधिक न बोलना, शक्ति के अनुसार दान और कृतज्ञता – ये 8 गुण पुरुष की ख्याति बढ़ाते है।

 4. सोने के लिए झूठ बोलने वाला भुत और भविष्य सभी पीढ़ियों को नरक में गिराता है। पृथ्वी तथा स्त्री के लिए झूठ बोलने वाला तो अपना सर्वनाश ही कर लेता है, इसलिए तुम भूमि और स्त्री के लिए कभी झूठ न बोलना।

5. धन उत्तम कार्यो से उत्पन्न होता है, प्रतिभा से बढ़ता है, चतुराई से फलता- फूलता है और संयम से सुरक्षित रहता है ।

6. जो अपने सुख में प्रसन्न नहीं होता, दूसरों के दुःख के समय हर्ष नहीं करता, वह सज्जनों में सदाचारी कहलाता है । 7.  अपनी उन्नति चाहने वाले पुरुषों को वाही वस्तु खानी चाहिए, जो खाने योग्य हो तथा खायी जा सके, खाने पर पच सके और पचने पर हितकारी हो ।

 8. बिना पढ़े ही गर्व करने वाले, दरिद्र होकर भी बड़े-बड़े मनसूबे बांधने वाले और बिना काम किए ही धन पाने की इच्छा रखने वाले मनुष्य की पंडित लोग मुर्ख कहते है ।

 9. सज्जन पुरुष पच जाने पर अन्न की, निष्कलंक जवानी बीत जाने पर स्त्री की, संग्राम जीत लेने पर शुर की और तत्व ज्ञान प्राप्त हो जाने पर तपस्वी को प्रशंसा करते है ।

 10. उन्नति चाहने वाले पुरुषों को नींद, तंद्रा, डर, क्रोध, आलस्य और जल्दी हो जाने वाले कम में अधिक देर लगाने की आदत – इन 6 दुर्गुणों को त्याग देना चाहिए ।

11 . ईर्ष्या  करने वाला, घृणा करने वाला, असंतोषी, क्रोधी, सदा शंकित रहने वाला और दूसरों के भाग्य पर जीवन निर्वाह करने वाला – ये 6 सदा दुखी रहते है ।

  1. धैर्य, मनोनिग्रह, इन्द्रियसंयम, पवित्रता, दया, कोमल वाणी और मित्र के साथ दगा न करना – ये सात बातें लक्ष्मी को बढ़ाने वाली है ।
  2.  जिसके हाथ में शांति रूपी तलवार है, उसका दुष्ट पुरुष अहित नहीं कर सकते ।

  3. सदाचार की रक्षा यत्नपूर्वक करनी चाहिए। धन तो आता और जाता रहता है। धन क्षीण हो जाने पर भी सदाचारी मनुष्य क्षीण नहीं माना जाता, किन्तु जी सदाचार से भ्रष्ट हो गया, उसे तो नष्ट ही समझना चाहिए।

     15. जो कुल सदाचार से हीन है, वे सम्पन्न होने पर भी उन्नति नहीं कर सकते।

    1. बाणों से बींधा हुआ तथा फरसे से कटा हुआ तन भी पुनः पनप सकता है, किन्तु कटु वाणी द्वारा हुआ भयानक घाव नहीं भरता।

    17. जो अधिक धन का स्वामी होकर भी इन्द्रियों पर अधिकार नहीं रखता, वह एश्वर्य से भ्रष्ट हो जाता है ।

 

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