शक्ति की उपासना के पर्वकाल में ऐसा करने से जीवन होगा खुशहाल

आस्था के योग का एक ऐसा पर्वकाल जिसमें आप जीवन को श्रेष्ठ बना सकते है... इस खबर में हमने वो सब कुछ बताया है जो आपको खुशहाल करेगा..

जोधपुर । चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर शनिवार से बसंती नवरात्र का आरंभ होगा। शक्ति की उपासना का पर्वकाल इस बार श्रेष्ठ योगों से युक्त है। ज्योतिषियों के अनुसार नौ दिवसीय नवरात्र में पांच बार सर्वार्थसिद्धि, दो बार रवियोग तथा एक बार रवि पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। साधना व सिद्धि के साथ यह दिन नौ दिन देवी कृपा से धन प्राप्ति के उपाय करने के लिए भी श्रेष्ठ बताए जा रहे हैं।Image may contain: 1 person, beardज्योतिषाचार्य पं.मनोज मिश्रा के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्रि शनिवार के दिन रेवती नक्षत्र के साथ आरंभ हो रही है। उदय काल में रेवती नक्षत्र का योग साधना व सिद्धि में पांच गुना अधिक शुभफल प्रदान करेगा। नौ दिवसीय पर्वकाल में पांच बार सर्वार्थसिद्धि तथा दो बार रवियोग का होना धर्म शास्त्र की दृष्टि से श्रेष्ठ है। श्रीमद्देवीभागवत के अनुसार ऐसे योगों में देवी साधना का विशेष फल प्राप्त होता है।
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देवी अराधना के नौ दिवसीय पर्वकाल में शक्तिपीठ हरसिद्धि, योगमाता, भूखी माता, नगरकोट माता आदि देवी मंदिरों में दर्शनार्थियों का तांता लगेगा। साधक व उपासक भी जप, तप, व्रत करेंगे। विशिष्ट मुहूर्त में घट स्थापना की जाएगी। शक्तिपीठ हरसिद्धि में नौ दिन दीपमालिका प्रज्ज्वलित होगी। चामुंडा माता मंदिर में प्रतिपदा पर फूल बंगला सजेगा।

घट स्थापना के शुभ मुहूर्त

-शुभ : सुबह 7.48 से 9.18 बजे तक

-चर: दोपहर 12.18 से 1.48 बजे तक

-लाभ : दोपहर 1.48 से 3.18 बजे तक

-अमृत : दोपहर 3.18 से 4.48 बजे तक

-अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.30 से 12.50 बजे तक

-लाभ : सायंकाल 6.41 से रात्रि 8.11 बजे तक

 

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