‘पिस्टल पांडे’ – नाम खौफनाक लेकिन जज्बा सेवा का

रितेश पांडे की एक और पहचान ये है कि वो मौजूदा विधायक हैं. 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में रितेश अंबेडकरनगर की जलालपुर विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर ही चुनाव जीते थे, जिसके बाद अब पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव में उतारने का फैसला किया है.

चुनावों को लोकतंत्र का अखाड़ा कहें तो कोई बुरी बात नहीं होगी. अब बात ऐसे उम्मीदवार की है जिसका नाम बड़ा खौफनाक है “पिस्टल पांडे”. बहुजन समाज पार्टी की जारी नई सूची में यूपी के अंबेडकरनगर लोकसभा सीट से रितेश पांडे का नाम भी घोषित किया गया है. रितेश पांडे , पिछले साल दिल्ली के एक मशहूर होटल में पिस्टल लहराने वाले आशीष पांडे के भाई हैं. रितेश पांडे की एक और पहचान ये है कि वो मौजूदा विधायक हैं. 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में रितेश अंबेडकरनगर की जलालपुर विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर ही चुनाव जीते थे, जिसके बाद अब पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव में उतारने का फैसला किया है.

पिस्टल पांडे का असल सच: रितेश पांडे उस वक़्त चर्चा में आये जब रितेश के भाई ने दिल्ली के एक होटल में पिस्टल हवा में लहराते हुए किसी को धमकाया था. इस घटना के बाद से ही पिस्टल पांडे का नया नाम मिला. रितेश तभी से सुर्ख़ियों में आये. आज उन्ही सुर्ख़ियों की बदौलत वो लोकसभा में अपिर ज़माने की फिराक में है.

                                      लोकतंत्र में जनसेवा का मकसद:Image result for अरुण गवली एक समय रहा जब अरुण गवली ने जब मुंबई से लोकतंत्र में हिस्सा लिया तब बहुत बातें हुई. गवली एक भारतीय राजनीतिज्ञ और पूर्व गैंगस्टर है. वह मध्य प्रदेश का मूल निवासी है. 1980 के दौरान जब पुलिस ने अरुण गवली और साई बानोद जैसे हिन्दू गुंडे के खिलाफ़ करवाई की थी तब उस वक्त शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के द्वारा मुम्बई पुलिस की आलोचना की गयी थी. यह इस बात का प्रतीक था कि गवली को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था. अरुण गवली के माफिया होने के बावजूद भी दगड़ी चौल के लोगों में उसकी काफ़ी लोकप्रियता है क्योंकि लोग उन्हें अपना एक वफादार दोस्त मानते है.

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