कलमकारों की दुनिया से जुदा हुआ, हँसता और मुस्कुराहता हुआ चेहरा

मौत कभी कहकर नहीं आती... सच ये भी है कि जीवन एक दिन ख़त्म होने वाला सफर है... लेकिन मझधार में कश्ती का डूबना बड़ा पीड़ादायक होता है.. . जोधपुर में एक पत्रकार के खोने का एहसास पीड़ादायक है... एक कलमकार के खोने का दर्द कलम... अख़बार.... पाठक... सबको होता है... राजस्थान खोज खबर की ओर से दिवंगत पत्रकार को श्रद्धांजलि...

राजस्थान खोज खबर: कहते है जीवन जीने का नाम है. कोई पैसे कमाकर खुश है तो कोई खुशनुमा पलों को अपनों  के बीच छोड़ जाता है. बात जोधपुर में एक कलमकार के दुनिया से जुदा हो जाने की है. हम अरुण सारस्वत की बात कर रहे है जो अब हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी तमाम बातें आज भी हमारे इर्द गिर्द बसी है. सबसे बड़ी बात वो हंसी जो करोड़ों के दामों पर भी नहीं खरीदी जा सकती अरुण अपने तमाम साथियों को मुफ्त में दे गए.

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वो चाय की थडी और गुटके की पीक : ये खबर नहीं है बल्कि राजस्थान खोज खबर की ओर से दिवंगत पत्रकार अरुण सारस्वत के लिये श्रद्धांजलि है. वरिष्ठ पत्रकार एम आर मलकानी बताते है कि उनकी स्मृति में ऐसा कभी दिन नहीं रहा जब वो खबर पर होते और अरुण से बात नहीं हुई हों. बन्दे में कुछ था जो सबसे अलग था और वो है उसकी चेहरे पर रहने वाली मुस्कराहट. जब भी बात होती मुस्कान के साथ कहता भाई साहब ये बात है. बड़ी ही साफगोई के साथ रहने वाला बंदा अचानक खबरों की दुनिया में खुद खबर हो गया.

शरद शर्मा कहते है, अरुण छोटा भाई था. दिन में मिलना हो ही जाता था. हम चाय साथ ही पीते थे. खबरों की बात अलग नहीं रही, हर खबर साँझा होती कि अपराध की खबर का क्या रूप छापना चाहिए यहाँ तक चर्चा होती लेकिन जिन्दंगी यूँ थम जायेगी ये नहीं सोचा. एक कलमकार को खोना हमारी व्यक्तिगत क्षति है. पत्रकार सुनील चौधरी की स्मृतियों में अरुण सीधे और सरल स्वभाव लेकर जीने वाला सख्स रहा.

राजस्थान खोज खबर परिवार साथी पत्रकार अरुण सारस्वत के अचानक चले जाने के बाद शोक संतप्त परिवार के साथ संवेदना प्रकृट करता है.

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