अयोध्या मामला: कमेटी के सदस्यों मे शामिल रविशंकर पर ओवेसी को आपति क्यों है ?

अयोध्या मामला सुलझा तो देश के लिए नया इतिहास लिखा जाएगा... बैर भाव दूर होगा और फिर .........

नई दिल्ली, अयोध्या विवाद के सर्वमान्य समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का रास्ता अपनाया है। लेकिन खबर ये है कि कोर्ट निर्देशों मे बनी कमेटी में शामिल सदस्यों में रवि शंकर के नाम पर AIMIM के चीफ असद्दुदीन ओवैसी ने आपति जताई है। ओवैसी ने शुक्रवार को कहा कि श्री श्री रविशंकर को सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थ बनाया है लेकिन उनका पहले का एक बयान सबके सामने है जिसमें वह कहते हैं कि अगर मुसलमान अयोध्या पर अपना दावा नहीं छोड़ते हैं तो भारत सीरिया बन जाएगा।

ओवैसी ने आगे कहा कि बेहतर होता कि SC ने किसी न्यूट्रल व्यक्ति को मध्यस्थ बनाया होता। उन्होंने कहा, ‘श्री श्री का 4 नवंबर 2018 का ऑन रिकॉर्ड स्टेटमेट हैं, जिसमें वह सीरिया बनने की मुसलमानों को धमकी दे रहे हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट ने श्री श्री रविशंकर को मध्यस्थ बनाया है तो उन्हें न्यूट्रल रहना होगा।

श्री ने कहा, लक्ष्य विवाद का हल
इसके बाद फैसले पर पहली प्रतिक्रिया देते हुए श्री श्री ने कहा कि सदियों से जारी संघर्ष को समाप्त करना ही हम सबका लक्ष्य होना चाहिए। आपको बता दें कि श्री श्री के अलावा पैनल में जस्टिस एफएम कलीफुल्ला और श्रीराम पांचू शामिल हैं। श्री श्री रविशंकर ने ट्वीट कर कहा, ‘सबका सम्मान करना, सपनों को साकार करना, सदियों के संघर्ष का सुखांत करना और समाज में समरसता बनाए रखना- इस लक्ष्य की ओर सबको चलना है।’

इतना ही नहीं श्री ने कोर्ट में कहा था कि हम अहंकार, मतभेदों को भूलाकर इस ओर आगे बढ़ेंगे। वहीं, पैनल के चेयरमैन रिटायर्ड जस्टिस एफएम कलीफुल्ला की तरफ से भी पहली प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा, ‘ SC ने मेरी अगुआई में एक मध्यस्थ समिति का गठन किया है। मुझे अभी ऑर्डर की कॉपी नहीं मिली है। मैं यहीं कह सकता हूं कि अगर समिति गठित की गई है तो हम इस मसले को मैत्रीपूर्ण तरीके से सुलझाने की हरसंभव कोशिश करेंगे।’

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