यहाँ मारा था राम ने तीर, सूखा दिया था पूरा समंदर, आज है खूबसूरत शहर

हों सकता हों ये खबर आपको रोमंचित कर दें लेकिन सच्चाई है यहाँ पहले खारे पानी का समंदर हुआ करता था और अब ....... ऐसा शहर जिसकी शहरीयत आपको इतना पसंद आएगी कि आप भी ......

राजस्थान खोज खबर. जोधपुर.  यूँ तो आपने राजस्थान में खूब भ्रमण किया होगा लेकिन इस शहर के बारे आपने आज तक जो नहीं सूना वो हम आज आपको बताने जा रहे है. हों सकता हों आप इस शहर की सडकों पर हजारों बार गुजरें भी हों लेकिन इतिहास क्या है शायद ही आपको मालूम हों. तो जानिये कौनसा शहर है ये और क्या है इतिहास.

                                                         यहाँ था समंदर. Image result for समंदरराजस्थान के इस भूभाग पर पहले जलसागर था जिसे जम्बो प्रदेश के नाम से जाना जाता था.रामकाल खंड में इतना खारा पानी हुआ करता था जिसे कोई इन्सान या जानवर पी भी लेता तो उसके प्राण पखेरू उड़ जाते. इतिहास विशेषज्ञ श्रवण कुमार उपाध्याय बताते हैं कि ऐसा प्रमाण वाल्मीकि रामायण में पढ़ने को मिलता है. उपाध्याय बताते हैं कि जब राम को लंका जाने के लिए समन्दर रास्ता नहीं दे रहा था तब राम ने तीर साध लिया लेकिन समन्दर ने विनती की और कहा कि आप पृथ्वी के इस भूभाग पर अपना निशाना साधे ताकि खारे पानी का समंदर सूख जायेगा. ऐसा करने से आप वचनबद्ध रहेंगे. उसके बाद भगवान श्री राम ने तीर इस दिशा में साधा जिसके बाद जम्बों प्रदेश का अवतरण हुआ और यहाँ आबादी आई. आज जोधपुर शहर का भूभाग रामकाल खंड के समकक्ष माना जाता है.Image result for वाल्मीकि रामायण

क्या कहता है विज्ञान: जयनारायण व्यास विश्वविध्यालय जोधपुर में सहायक प्रोफेसर अनामिका पूनिया कहती है कि पहले ऐसा नहीं सोचा था लेकिन अब जब शोध हुआ तो इतिहास की परतें खुलती गई और ये सिद्ध होता गया. ये बात सामने आई कि जोधपुरी पहाड़ का पत्थर रामकाल खंड के समकक्ष है.

 सहायक प्रोफेसर गोविन्द सिंह कहते हैं कि वास्तव में ये बात जब सामने आई तो बड़ा आश्चर्य हुआ कि कहीं न कहीं हमारे ग्रंथों में हर बात वैज्ञानिक तथ्यों को मदद करते है. यहाँ की जमीन के लक्षण इस बात की ओर संकेत देते  है कि पहले यहाँ जल सागर हुआ करता था. पहाड़ों की प्राकृतिक कटाई के जो लाक्षणिक रूप की बात करें तो वो पानी के बहने से या तेज जल प्रवाह से होने सिद्ध होते है.

अब है खूबसूरत शहर: ये शहर जोधपुर है और अब भी यहाँ के पहाड़ सिर उंचा कर इतराते हुए कहते है कि उनका इतिहास मामूली नहीं है. वो सदियों के साक्षी है और उनकी खूबियाँ हर किसी का मन मोह लेती है. यहाँ की संस्कृति को देशी विदेशी लोगों के दिलों में बसाने वाले संकृति विशेषज्ञ शक्ति सिंह खाखडकी कहते है कि इस जमीन की खुशबू में वो महक है जो मन को महका देती है. सिंह आगे कहते है कि कई बार यहाँ की बहादुरी के किस्से बताते बताते आँखे पानी से भर आती है क्योंकि यहाँ की मिटटी की बात ही ऐसी है. इस माटी ने हजारों किस्से इतिहास के पृष्ठों में संजोकर रखे है जो बताते है कि इस भूमि पर धीर, वीर और गंभीर इन्सान पैदा हुए जो दुनिया के अन्य किसी भूभाग पर देखने, पढ़ने और जानने को नहीं मिलते.

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