रमजान पर घमासान, कैसे होगा मतदान ?

लोकतंत्र पर्व के लिए मुस्लिम मतदाता अपना मतदान नहीं कर पाएंगे ... क्योंकि उस दौरान रमजान महिना है.... एक सुरसुराहट के बाद मानों राजनीति में भूचाल आ गया...

राजस्थान खोज ख़बर. चुनाव की तारीखें ऐलान के बाद एक खबर ये आ रही है कि मुस्लिम धर्म गुरुओं को इस बात पर एतराज है कि चुनाव के वक़्त रमजान महिना होगा और ऐसे में लोग मतदान नहीं कर पाएंगे. आरोप ये भी है कि इसका फायदा सीधे सीधे बीजेपी को होगा. तीन राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में वोटिंग की तारीखें रमजान के महीने में पड़ रही हैं। ऐसे में मुस्लिम नेताओं और मौलानाओं ने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाया है। इतना ही नहीं, उन्होंने इन तारीखों में बदलाव की मांग की है।

रमजान की आड़ में शुरू हुआ घमासान 

चूँकि चुनाव की तारीखें तय है और रमजान भी इसी दौरान है तो ऐसे में ये कहना कि मुस्लिम मतदाता वोट डालने नहीं आ सकेंगे ऐसे में बीजेपी इसका फायदा उठा लेगी, ये भी राजनीति का ऐसा नुस्खा है जो बेबात को तूल देगा. मुस्लिम धर्म गुरुओं का मानना है कि पवित्र त्यौहार के वक़्त मतदान में हिस्सा लेना मुश्किल ही होता है ऐसे में लोकतंत्र के पर्व में बहुत लोग मतदान नहीं कर पाएंगे जो पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान छोड़ देंगे. कोलकाता के मेयर और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता फिरहाद हाकिम ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय है और हम उसका सम्मान करते हैं। हम चुनाव आयोग के खिलाफ कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन सात फेज में होने वाले चुनाव बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए कठिन होंगे। इतना ही नहीं, इन चुनावों में सबसे ज्यादा परेशानी मुस्लिमों को होगी क्योंकि वोटिंग की तारीखें रमजान के महीने में रखी गई हैं।

वहीं बीजेपी नेता और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था है। यदि किसी को तारीखों पर आपत्ति है तो वह चुनाव आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। उन्होंने कहा, ‘रही बात रमजान में वोटिंग की तो आयोग ने मतदान के लिए 8 घंटे का समय रखा है। इस बीच कभी भी जाकर मतदान किया जा सकता है। विपक्षी दल चुनाव में हार के डर से अभी से बहाने ढूंढने लगे हैं।’

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