घबराने की बात नही है, मस्ती के साथ दीजिये अपनी परीक्षा

राजस्थान खोज ख़बर, जोधपुर। राजस्थान में मार्च महीने में सोमवार से आठवीं और दसवीं की बोर्ड परीक्षा शुरू हो गई। बहुत से बच्चे बैचेन रहे, रातों की नींद उड़ गई और खुद की परीक्षा की तैयारी की। खोज खबर अपने पाठकों से ये ही कहना चाहता है कि अपने बच्चों को ये बात जरूर बताएं कि ये जीवन की परीक्षा नही है, बल्कि एक साधारण परीक्षा है जिसे आप बड़ी ही मस्ती के साथ देकर अपने भविष्य को बेहतर बनायें।

माता पिता परवरिश में हीं बता दें, घबरायें नही इम्तेहान में: अक्सर इम्तेहान में बच्चे घबरा जाते है लेकिन ऐसा बिल्कुल नही होने देना चाहिए, ये कहना है मनोचिकित्सक रीना भंसाली का। भंसाली कहती है कि ऐसे पल बहुत भावुकता से भरे होते है और बच्चों को कमजोर करते है । जरूरी हो जाता है, ऐसे समय परिजन बच्चों का ख्याल रखें, उन्हें ये बात समझायें कि परीक्षा से कभी नही हारें बल्कि उसका सामना करें । परीक्षा में बच्चों का मनोबल मजबूत करने में माता पिता और अध्यापक का बहुत बड़ा योगदान होता है। लिहाजा परीक्षा के समय इन्हें बच्चों का दोस्त बनकर रहना चाहिए ताकि वो घबराहट से दूर रहें ।

इम्तेहान के वक़्त कानूनी बातों से हों परहेज: राजस्थान पुलिस में एएसपी चंचल मिश्रा कहती है कि उन्हें बड़ा अटपटा लगता है जब बच्चों को परीक्षा के लिए टॉर्चर किया जाता है। ऐसा किसी सूरत में नही होना चाहिए। अक्सर देखा जाता है, मानसिक तनाव इंसान को अंधेरे की ओर ले जाता है जिससे वो तनावग्रस्त होकर गलत कदम उठा लेते है । चंचल कहती है कि ऐसे में परीक्षा को कानून की तरह सख्त मत बनाइये बल्कि इतना आसान बना देना चाहिए जिससे बच्चे कमजोर नही हों और वो खुद को मजबूत समझें।

हारे का कोई नही सहारा: लेक्चरर जयकिशन पंचारिया की माने तो वो अक्सर देखते है कि बच्चा हार जाता है। इसमें हमारा दोष भी है। क्यों न हमें शिक्षा पद्धति को लचीला बना देना चाहिए । परीक्षा हर वर्ष होती है लेकिन ये जान लेना भी जरूरी है कि जीवन एक बार ही मिलता है। और हम इस पढ़ाई या परीक्षा को सरल नही बना सकते हैं तो फिर बारह महीने बच्चों को ऐसा बना दें उन्हें पढ़ाई बहुत आसान लगे, वो हर सवाल को हल्के में लें और परीक्षा दें । ऐसा होने से भी नकारात्मक पहलू कमजोर होंगे।

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