चीन पाकिस्तान से क्यों रखता है यारबाजी ?

भारत 48 सदस्यीय इस विशिष्ट परमाणु समूह में स्थान पाना चाहता है लेकिन चीन लगातार उसकी राह में रोड़े अटकाता रहा है। यह समूह परमाणु व्यापार को नियंत्रित करता है। जैश ए मोहम्मद प्रमुख मसूद अज़हर को भारत अंतरराष्ट्रीय चरमपंथी घोषित करवाना चाहता है. लेकिन चीन हर बार वीटो कर देता है. आखिर चीन मसूद अज़हर और पाकिस्तान को इतनी तवज्जो क्यों देता है...........

दिल्ली : क्या वजहें है कि चीन को पाकिस्तान की यारी पसंद है. क्यों भारत के साथ आँख मिचोली करता है. भारत को अमेरिका और इस समूह के ज्यादातर पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त है लेकिन चीन अपने इस रूख पर कायम है, और उसने एक बार फिर मसूद अजहर पर अडंगा दाल दिया. चीन चाहता है कि भारत को परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करने चाहिए लेकिन भारत ऐसा नही चाहेगा .

दक्षिण और मध्य एशिया के लिए उप विदेश मंत्री एलिस वेल्स ने कहा कि हमारा विचार है कि चीन के वीटो के कारण हम भारत के साथ अपने सहयोग को सीमित नहीं करेंगे। निश्चित तौर पर हम एसटीए के दर्जे के साथ आगे बढ़े हैं और हम मानते हैं कि भारत एनएसजी की सभी योग्यताओं को पूरा करता है तथा हम भारत की सदस्यता की सक्रियता से वकालत करते रहेंगे।

43 लाख करोड़ रुपए की डील बनी भारत की राह में रोड़ा

चीन को डर है कि मसूद बौखलाकर चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को टारगेट न कर दे। इसी वजह से प्रतिबंध के प्रस्ताव पर चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया। सूत्रों के मुताबिक इस बार अजहर पर बैन के नए प्रस्ताव पर समर्थन का मूड बना रहा था। लेकिन चीन यह कोशिश भी कर रहा है कि पाकिस्तान से उसे CPEC की सुरक्षा की गारंटी मिले। हालांकि वो मिलने से रही। चीन के करीब 10,000 कर्मचारी CPEC से संबंधित तमाम प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। ऐसे में चीन को उनकी चिंता भी है। बता दें कि CPEC न सिर्फ पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है, बल्कि खैबर पख्तूख्वा के मानशेरा जिले से भी होकर गुजरता है, जहां बालाकोट स्थित है। इसी जिले में कई आतंकी प्रशिक्षण शिविर है। चीन ने हाल ही में CPEC के लिए बालाकोट के नजदीक बड़े पैमाने पर जमीन का अधिग्रहण किया है। जबकि POK से होकर पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाला काराकोरम हाइवे भी मानशेरा से होकर गुजरता है।

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