नेपाल क्यों गए थे श्री कृष्ण ? असली पद चिन्ह है इस बात के सुबूत

आसमान नापते पहाड़,.. ऊँची ऊँची चोटियाँ... एक तरफ चीन, एक तरफ पाकिस्तान.....बिच में हिन्दू संस्कृति की अमिट छाप नेपाल.... सनातन का सत्य यहाँ छुपा है... श्री कृष्ण यहाँ गए थे... इसके पुख्ता सबूत हम आपको बता रहे है...

नेपाल, हिन्दू संस्कृति का जीता जागता ऐसा देश जहाँ श्री कृष्ण के असली पद चिन्ह मौजूद है. 

धार्मिक मान्यताओं से बंधी एक जगह नेपाल के काठमांडु में भी स्थित है। नेपाल को हिन्दू देश ही कहा जाता है, जिसका सबसे बड़ा कारण है यहां हिन्दू धर्म को दर्शाने वाले विभिन्न धार्मिक स्थलों का होना।

यहाँ के पवित्र स्थलों में एक स्थान बड़ा चौंकाने वाला है. यहाँ श्री कृष्ण के असली पद चिन्ह है जिन्हें आप अपने माथे से लगा सकते है. नेपाल में श्रीविष्णु के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण के चरण चिह्न हैं। जी हां… कहा जाता है कि स्वयं मुरलीधर कभी यहां आए थे।

जोधपुर निवासी मूलतया नेपाल के अर्जुन सिंह बताते है कि करीब 5000 वर्ष पहले इसी जगह पर, जिसे आज कपूरधरा कहा जाता है, यहां सूखा पड़ गया था। श्रीकृष्ण यहां पधारे और उन्होंने अपनी कमान से एक तीर जमीन की ओर छोड़ा, वह तीर जहां लगा वहां से जल का फुव्वारा फूट पड़ा। अर्जुन की बातें बेहद भावपूर्ण लगती है.

ज्योतिषाचार्य मनोज मिश्रा बताते है कि वह पानी बेहद स्वच्छ था एवं कपूर की तरह ही बिल्कुल सफेद था। यही कारण है कि इस जगह को कपूरधरा के नाम से जाना जाता है। आज कपूरधरा में वह स्थान है जहां श्रीकृष्ण के पवित्र पद्म चिह्न मौजूद हैं। लोग दुनिया के कोने-कोने से यहां आते हैं, और कृष्ण मुरारी का आशीर्वाद ले जाते हैं।

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