नई दिल्ली, अमेरिकी कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि वहां ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले भारतीयों को 10 साल का इंतजार करना पड़ता है। ग्रीन कार्ड को लेकर बन रहे नए नियमों में देश आधारित कोटा सिस्टम को खत्म करने पर विचार किया जा रहा है।

भारत और चीन के लोगों को इस कोटा सिस्टम का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है। अमेरिकी ग्रीन कार्ड पाने वाले को ताउम्र अमेरिका में रहने और काम करने की अनुमति मिल जाती है। देश आधारित कोटा सिस्टम खत्म हो जाने से भारतीयों और चीनियों को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को उस विधेयक को पारित कर दिया, जिसमें ग्रीन कार्ड जारी करने को लेकर देशों पर वर्तमान में सात फीसद की तय सीमा को हटाने की बात कही गई थी। इससे हजारों की संख्या में भारतीय आईटी पेशेवरों को फायदा होगा। ग्रीन कार्ड धारक अमेरिका में स्थाई रूप से निवास करते हुए वहां पर काम कर सकता है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों के 310 से ज्यादा सांसदों से समर्थन प्राप्त ‘फेयरनेस फॉर हाई स्किल्ड इमिग्रेंट्स एक्ट 2019’ के आसानी से पारित होने की पहले ही संभावना जाहिर की जा रही थी।

विधेयक के प्रस्तावक इस बात से खुश थे कि 203 डेमोक्रेट और 108 रिपब्लिकन इस विधेयक को साथ मिलकर प्रायोजित कर रहे हैं। इसके प्रस्तावक एक त्वरित प्रक्रिया अपना रहे हैं जिसके तहत विधेयक को बिना सुनवाई एवं संशोधनों के पारित होने के लिए 290 मतों की जरूरत थी। मगर, 435 सदस्यों वाले हाउस में इसे 365 वोट मिले, जबकि इसके विरोध में महज 65 वोट ही पड़े थे। दरअसल, अमेरिका के आव्रजन संबंधी नियमों ने वहां उच्च दक्षता वाले भारतीय पेशेवरों के सामने दिक्कत खड़ी कर दी थी।

नियमों के अनुसार, एच-1 बी वीजा से अमेरिका पहुंचे इन पेशेवरों में से केवल सात फीसद को ही ग्रीन कार्ड मिल सकता है। अमेरिकी कांग्रेस की स्वतंत्र शोध सेवा (सीआरएस) ने कहा है कि अगर प्रत्येक देश के दक्ष पेशेवरों को ग्रीन कार्ड में मिलने वाला सात फीसद का कोटा खत्म हो जाए, तो उससे भारत और चीन के लोगों को ही नहीं अमेरिका को भी लाभ होगा। देश के हिसाब से ग्रीन कार्ड की संख्या सीमित होने से भारत और चीन के नागरिकों को औसतन कम नागरिकता मिल पाती है।

नए बिल के आने के बाद अब सात फीसद की सीमा को 15 फीसद तक बढ़ाया जा सकता है। इसी तरह, यह रोजगार-आधारित आप्रवासी वीजा पर सात प्रतिशत प्रति देश कैप को खत्म करने का भी प्रयास करता है। इसके अतिरिक्त, यह एक ऑफसेट को हटाता है जिसने चीन से व्यक्तियों के लिए वीजा की संख्या कम कर दी है। विधेयक के एक अन्य प्रावधान के अनुसार, किसी भी एक देश के अप्रवासियों को अनारक्षित वीजा का 85 फीसद से ज्यादा नहीं दिया जाएगा।

Image result for भारतीयों के लिए अच्छी खबर, Green Cards पर लगी सीमा को हटाने का बिल अमेरिकी संसद में पास

इन्हें लगता है सबसे ज्यादा समय
अमेरिकी ग्रीन कार्ड को पाने के लिए चीनी नागरिकों को 11 साल 7 महीने का इंतजार करना पड़ता है। दूसरे नंबर पर भारतीय हैं जिन्हें 9 साल 10 महीने का इंतजार करना पड़ता है। एल सल्वाडोर,ग्वाटेमाला और हुंडरॉस के नागरिकों को 2 साल 10 महीने का इंतजार करना पड़ता है। वियतनाम के नागरिकों को अमेरिकी ग्रीन कार्ड पाने के लिए 2 साल 8 महीने का इंतजार करना पड़ता है।

मेक्सिको के नागरिकों को 2 साल और बाकी अन्य देशों के नागरिकों को ग्रीन कार्ड के लिए डेढ़ साल का इंतजार करना पड़ता है। गौरतलब है कि कार्य आधारित और परिवार आधारित ग्रीन कार्ड का 7 फीसदी सालाना कोटा एक ही देश के नागरिकों को दिया जा सकता है। उस देश की जनसंख्या से इसका कोई लेना-देना नहीं है। इस श्रेणी में सालाना सिर्फ 10 हजार आवेदकों को ग्रीन कार्ड दिया जाता है।

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चीनी अन्य कर्मचारियों की श्रेणी के लिए सबसे ज्यादा ग्रीन कार्ड का आवेदन करते हैं। वहीं, भारतीय स्किल्ड वर्कर,प्रोफेशनल्स और अन्य कर्मचारियों की श्रेणी के लिए सबसे ज्यादा आवेदन करते हैं। एल सल्वाडोर,ग्वाटेमाला और हुंडरॉस के नागरिक स्पेशल इमीग्रेंट श्रेणी के लिए सबसे ज्यादा आवेदन देते हैं। वियतनाम के नागरिक इमीग्रेंट इंवेस्टर की श्रेणी के लिए सबसे ज्यादा आवेदन करते हैं।

मेक्सिको के नागरिक स्पेशल इमीग्रेंट श्रेणी और बाकी अन्य देशों के नागरिक प्राइऑरिटी वर्कर्स की श्रेणी के लिए सबसे ज्यादा आवेदन करते हैं। एक श्रेणी में एक ही देश के ज्यादा नागरिकों के आवेदन करने के कारण ग्रीन कार्ड में मामले में उस देश का बैकलॉग सबसे ज्यादा ब़ढ़ता है। अप्रैल 2018 में 306,601 भारतीय आईटी पेशेवरों ने ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन किया था। अमेरिकी ग्रीन के लिए इंतजार करने वाले आवेदकों में 78 फीसदी भारतीय है। हर साल 28.6 फीसदी भारतीय अमेरिकी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं।