फिर धूजा नेपाल, क्या हुआ जब सूर्योदय के साथ नेपाल में भूकंपन हुआ

देव भूमि में देवताओं के रुष्ठ होने की बात हों या वैज्ञानिक वजहें लेकिन नेपाल का वो दिन डरावना था जब इंसानों की बसाई बस्ती ढहती जा रही थी और लोग जान बचाने को लालायत..... एक बार फिर बुधवार को नेपाल में धरती धूजी तो लोग डर के साए में आ गए ... गनीमत रही कोई बेजान नहीं हुआ,......

 

देव भूमि नेपाल समेत उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बुधवार तड़के भूकंप के दो झटके महसूस किए गए हैं. भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.2 थी और इसका केंद्र नेपाल का धादिंग जिले का नौबत था. हालांकि, भूकंप के कारण किसी जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. लेकिन धरती के धूजने के कारण लोगों में एक बार खौफ पैदा हो गया.

जानकारी के अनुसर, बुधवार सुबह 6 बजकर 29 मिनट पर नेपाल और उसके सटे उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. इसकी तीव्रता 5.2 थी. इसके बाद 6 बजकर 40 मिनट पर दूसरा झटका महसूस किया गया. इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.8 थी. हालांकि, भूकंप से किसी भी जानमाल के नुकसान की अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है.

इससे पहले रात 1 बजकर 45 मिनट पर अरुणाचल प्रदेश में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.8 थी और भूकंप का केंद्र अरुणाचल का पश्चिम सियांग था. यहां पर भी कोई नुकसान की खबर नहीं है.

     25 अप्रैल 2015 को नेपाल की तस्वीर 

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आपको बता दें कि 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में 7.8 की तीव्रता वाला भूकंप आया था और इसका केंद्र लामजुंग था. इस भूकंप के कारण नेपाल के 32 जिले पूरी तरह से तबाह हो गए थे और करीब 9 हजार से अधिक लोग मारे गए थे. साथ ही 20 हजार से अधिक लोग घायल हुए थे. यह भूकंप के झटके चीन, भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी महसूस किए गए थे. इससे पहले साल 1934 में इस तरह का भूकंप आया था, जिसमें करीब 8 हजार लोग मारे गए थे. उस दिन का वो दृश्य बड़ा ही डरावना था जब लोग धरती के हिलने से दशहत में थे और इंसानों की बस्ती ढहती जा रही थी.

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