अब से मॉरीशस का सबसे बड़ा साइबर टावर कहलाएगा ‘अटल बिहारी वाजपेयी टावर’

नई दिल्ली: भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे महान राजनेता, पत्रकार व कवि थे, जिनके निधन से न केवल देशवासियों की आंखों में आंसू नजर आए, बल्कि नेपाल, भूटान, बांग्लादेश समेत दुनिया के कई देश उनके जाने से दुखी हैं। मॉरीशस ने तो अटली जी के सम्मान में शुक्रवार को अपने राष्ट्रीय ध्वज को आधे झुकाए रखा। अब मॉरीशस सरकार ने अटल जी के सम्मान में एक और बड़ा फैसला लिया है। मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ ने ऐलान किया है कि वहां (मॉरीशस) के सबसे बड़े साइबर टावर को अब ‘अटल बिहारी वाजपेयी टावर’ के नाम से जाना जाएगा। à¤…ब से मॉरीशस का सबसे बड़ा साइबर टावर कहलाएगा 'अटल बिहारी वाजपेयी टावर'

दरअसल मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुई में 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन शनिवार से शुरू हो गया है। इस कार्यक्रम में मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रवीण कुमार जुगनुथ और भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सहित कई नेताओं ने मिलकर भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया। सभी नेताओं ने मिलकर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार ने इसी कार्यक्रम में कहा कि अब से साइबर टावर को ‘अटल बिहारी वाजपेयी टावर’ के नाम से जाना जाएगा। कार्यक्रम में पहले तो अटल जी को श्रद्धाजंलि अर्पित कर उन्हें याद किया गया। बता दें कि इस सम्मेलन का आयोजन हिंदी भाषा का विश्व स्तर प्रचार करने और समय के अनुसार हिंदी भाषा के विकास में योगदान देने के लिए किया जाता है।

11वां विश्व हिंदी सम्मेलन मॉरीशस में 18 से 20 अगस्त चलेगा। इस बार सम्मेलन का विषय ‘हिंदी विश्व और भारतीय संस्कृति’ है। इसमें शामिल हो रही विदेश मंत्री ने वहां की तस्वीर ट्वीट कर लिखा है अभूतपूर्व उत्साह। इस सम्मेलन में पंजीकरण के समय खत्म होने तक कुल 1422 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है। यह सभी उपस्थिति वेबसाइट के द्वारा की गई है। आपको बता दें कि अटल बिहारी अपने भाषणों के कारण विदशी धरती पर भी काफी प्रसिद्ध रहे हैं। 
यह कार्यक्रम मॉरीशस के पोर्ट लुईस में हो रहा है। यहां देश और विदेश से हिंदी प्रेमी इसमें भाग लेने के लिए मॉरीशस पधार पहुंच रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अधिकारी रवीश कुमार ने भी इस कार्यक्रम के बारे में ट्वीट कर लोगों का हिंदी के प्रति उत्साह दर्शाया साथ ही सरकार का शुक्रिया अदा किया। आपको बता दें कि पहला विश्व हिंदी सम्मेलन नागपुर में 1975 में हुआ था। इसके बाद से विश्व के अलग-अलग जगहों पर यह आयोजित किया जा रहा है। हिंदी का जो वट वृक्ष महात्मां गांधी की कर्मभूमि वर्धा के निकट नागपुर में लगाया गया था आज उसकी छांव दुनिया भर में फैल रही है। महात्‍मा गांधी की कर्मस्‍थली वर्धा (महाराष्‍ट्र) यह एक ऐसी जगह है जिसने विश्‍व में हिंदी के प्रचार और प्रसार को गति और बल दिया है। जगन्नाथ ने कहा कि जब मॉरीशस 11 वें विश्व हिंदी सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, हम हिन्दी भाषा में वाजपेयी की महारत को याद कर रहे हैं, जो उनके भाषणों और कविताओं में बखूबी जाहिर हुई है। वह एकता, इतिहास को जोड़ने के साधन, साझा मूल्यों और साझा संस्कृति के प्रतीक के तौर पर हिंदी की शक्ति में पूरा यकीन रखते थे।