मिलिए उस मेजर से…जिनके सामने पाक सैनिकों ने 1971 के युद्ध में टेके थे घुटने

1971 के युद्ध की वीरगाथा के 46 वर्ष पूरे होने के अवसर पर खोज खबर विशेष: 
जैसलमेर: रेगिस्तान की सर्द रात में पाकिस्तानी फौज के सैकड़ों जवानों के राजस्थान में घुसने के दुस्वप्नों को हमारे महज 120 जवानों के पराक्रम ने चकनाचूर कर दिया था। 23 वीं पंजाब रेजीमेंट के उन जवानों का नेतृत्व करने वाले मेजर कुलदीप सिंह चादंपुरी 1971 की जीत का श्रेय उन जवानों को देते हुए आज भी खुद को सरहद पर लड़ने के लिए तैयार है वे बताते हैं और कहते हैं कि आखिरी सांस तक देश के लिए उपलब्ध हूं।

जैसलमेर से करीब 120 किलोमीटर दूर लोंगेवाला पोस्ट पर जाकर 46 साल पहले की चार-पांच दिसंबर की उस दरमियानी रात के मंजर को महसूस किया जा सकता है। वहां खड़े पाकिस्तान के टैंक आपको भारतीय सपूतों की वीरता की कहानी बताते हैं। कुछ साल पहले पोस्ट को आम लोगों के लिए खोला गया था और आप भी उस रेत के गर्त में दबी भारतीय रणबांकुरों के साहस की कहानी को सामने से महसूस कर सकते हैं। मेजर चांदपुरी पांच दिसंबर की सुबह लोंगेवाला की उस पोस्ट पर आयोजित समारोहों में भाग लेंगे जो 1971 में भारतीय सेना के पराक्रम का साक्षी बना था।

सेहत ठीक नहीं, उम्र का भी तकाजा
सेहत ठीक नहीं है और उम्र का भी तकाजा है लेकिन अधिकारियों के आग्रह पर 77 साल के चांदपुरी लोंगेवाला पहुंच रहे हैं। मेजर चांदपुरी चंडीगढ़ में रहते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें जब भी सेना के अधिकारी किसी भी कार्यक्रम के लिए बुलाते हैं तो वह अवश्य जाते हैं चाहे सेहत साथ ना भी दे रही हो। मैंने कभी ना नहीं कहा। जब तक जिंदा हूं, देश के लिए हूं। सेना जब चाहे, मैं उपलब्ध हूं। आखिरी सांस तक लोंगेवाला जाता रहूंगा। मेजर चांदपुरी ने तो यह भी कहा, हमें तो सरहद पर बुला लें तो आज भी लड़ने के लिए तैयार बैठे हैं।

मौत सामने, पांव पीछे नहीं खींचे
1971 की लड़ाई में भारतीय सेना के कारनामे को बयां करते हुए उन्होंने बताया कि 35टी टैंकों के साथ आए पाक के सैकड़ोंं जवानों को रोककर रखने और लोंगेवाला से आगे नहीं बढ़ने देने में मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े। मुझे महावीर चक्र और अन्य बहादुरी पुरस्कार मिले लेकिन इसका श्रेय आज भी मैं अपने साहसी और बहादुर जवानों को देता हूं। हमारे पास टैंक नहीं थे, हम चारों तरफ से घिरे थे।

सर्द रात भयावह लंबी लग रही थी। हम दिन चढ़ने की प्रार्थना कर रहे थे ताकि वायु सेना के विमान आ सकें। अंतत: वायुसेना के लडाकू विमानों ने आकर दुश्मन के कई टैंकों को तबाह कर दिया और लोंगेवाला के रास्ते राजस्थान के अंदर तक आने और यहां बडे़Þ हिस्से पर कब्जा करने की पड़ोसी देश की साजिश नाकाम हो गई।

Web Title : Meet that Major ... with whom the Pak soldiers were kneeling in the 1971 war