#MeToo के तूफान ने पकड़ा जोर; अब विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर पर लगे यौन शोषण के आरोप

नई दिल्ली:#MeToo कैंपेन ने हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक ही नहीं, बल्कि भारतीय मीडिया और राजनीति में एक अजीब सी खलबली मचाकर मचा कर रख दी है. #MeToo कैंपेन, जिसके जरिए दुनियाभर की महिलाओं ने यौन शोषण को लेकर अपनी आपबीती सुनाई। इसी कैंपेन की मदद से दुनिया के सामने कई बड़ी हस्तियां का असली चेहरा जनता के सामने आया, लेकिन अब जुर्म का पर्दाफाश करते-करते ये कैंपेन भारतीय राजनीति में जा पहुंचा हैं और अब बॉलिवुड हस्तियों के साथ-साथ मोदी सरकार के मंत्री भी इसके तहत आरोपी बने हैं।MeToo Movement: 11 Famous celebs accused of sexual harassment - Bollywood News in Hindi

बता दे कि ताजा मामले में मोदी सरकार के मंत्री एमजे अकबर का नाम सामने आया है. पूर्व एडिटर और विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर पर यौन शोषण का आरोप लगा है. इस बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कोई जवाब नहीं दिया. ‘ट्रिब्यून’ की पत्रकार स्मिता शर्मा ने जब सुषमा स्वराज से पूछा कि क्या एमजे अकबर के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. स्मिता शर्मा ने सुषमा स्वराज से पूछा था कि, ‘यह एक गंभीर आरोप है. आप एक महिला हैं, क्या आरोपों की जांच की जाएगी? इस पर जवाब देने के बजाय सुषमा स्वराज बिना कुछ बोले आगे निकल गईं. ऐसा माना जा रहा है कि विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर इन दिनों नाइजीरिया में हैं.

एमजे अकबर का नाम पत्रकार प्रिया रमानी ने लिया है. प्रिया ने लिखा कि उन्होंने पिछले साल ‘वोग’ पत्रिका में अपने साथ हुए यौन शोषण का स्मरण लिखा था और कहानी की शुरुआत एमजे अकबर के साथ हुई घटना से की थी. प्रिया ने तब एमजे अकबर का नाम नहीं लिया था, लेकिन 2017 की स्टोरी का लिंक शेयर करते हुए एमजे अकबर का नाम लिख दिया. कहा कि यह कहानी जिससे शुरू होती है, वह एमजे अकबर है. प्रिया ने लिखा है कि उस रात वह भागी थीं. फिर कभी उसके साथ अकेले कमरे में नहीं गईं. प्रिया रमानी ने एक के बाद एक कई ट्वीट किया. बता दें कि एमजे अकबर कई अखबारों और पत्रिकाओं में संपादक रह चुके हैं.

उधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद उदित राज ने इस मामले में चौंकाने वाली राय बयां की है. उन्होंने इस कैंपेनिंग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने कैंपेन के तहत लग रहे आरोपों को गलत प्रथा की शुरुआत करार दिया है. सांसद के मुताबिक लंबे अरसे के बाद आरोप लगाने के बाद उसकी सत्यता की जांच कैसे होगी. झूठे आरोपों से किसी की छवि को नुकसान भी पहुंच सकता है.

बीजेपी सांसद उदितराज ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘#MeToo कैंपेन जरूरी है, लेकिन किसी व्यक्ति पर 10 साल बाद यौन शोषण का आरोप लगाने का क्या मतलब है? इतने सालों बाद ऐसे मामले की सत्यता की जांच कैसे हो सकेगी? जिस व्यक्ति पर झूठा आरोप लगा दिया जाएगा, उसकी छवि का कितना बड़ा नुकसान होगा ये सोचने वाली बात है. गलत प्रथा की शुरुआत है. वहीं इससे पहले केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी इस कैंपेनिंग को अपना सपोर्ट दे चुकीं हैं. महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि कोई भी पीड़ित यौन उत्पीड़न की शिकायत घटना के ’10-15 साल’ बाद भी कर सकता है. ‘#मी टू’ अभियान’ का उल्लेख करते हुए मेनका ने कहा, ‘मैं आशा करती हूं कि यह इस तरह नियंत्रण से बाहर नहीं चला जाए कि हम उन लोगों को निशाना बनाएं जिनसे हमें परेशानी हुई हो. लेकिन मेरा मानना है कि यौन उत्पीड़न को लेकर महिलाएं आक्रोशित हैं.’ मेनका गांधी ने कहा कि ‘#मी टू’कैंपेन से  महिलाओं को सामने आकर शिकायत करने का हौसला मिला.

Web Title : #MeToo Hurricane atrapado; Ministro de Estado para Asuntos Exteriores MJ Akbar