मन्नतों के लिए मोदी ने चढ़ाया डेढ़ क्विंटल का घंटा, अब केदार करेंगे बड़ा पार

पीएम मोदी की यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है. गुरुड़चट्टी में साधना के बाद यह पहला मौका है जब मोदी केदारनाथ में ध्यान करेंगे. ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग केदारनाथ धाम की ऊंचाई समुद्र तल से 11,700 फीट है.

लोकसभा का चुनाव प्रचार खत्म होने के अगले दिन शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ धाम में बाबा शिव के दर्शन करने पहुंचे हैं। यह उनकी चौथी केदारनाथ यात्रा है। पारंपरिक गढ़वाली वेश-भूषा में पहुंचे पीएम मोदी की कमर में भगवा वस्त्र बंधा था और सिर पर पहाड़ी टोपी थी।

पीएम मोदी ने केदारनाथ धाम पर वाघाम्बर चढ़ाया है और घंटा भी अर्पित किया है। घंटे का वजन एक से डेढ़ क्विंटल का है। धर्म के जानकार बताते हैं कि जब किसी व्यक्ति की मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वह घंटे या घंटियां मंदिर में चढ़ाते हैं। कई बार लोग मन्नत मांगने के समय भी इस तरह का उपहार चढ़ाते हैं।Image result for मंदिर में क्यों चढ़ाया जाता है घंटाकहते हैं, पूजा करते वक्त घंटी जरूर बजानी चाहिए. ऐसा मानना है कि इससे ईश्वर जागते हैं और आपकी प्रार्थना सुनते हैं. लेकिन हम आपको यहां बता रहे हैं कि घंटी बजाने का सिर्फ भगवान से ही कनेक्शन नहीं है, बल्क‍ि इसका साइंटिफिक असर भी होता है. यही वजह है कि घंटी हमेशा मंदिर के प्रवेश स्थान पर लगाई जाती है. 

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घंटी बजाने के पीछे का वैज्ञानिक कारण 
मंदिर घर का हो या किसी धार्मिक स्थल का. वहां घंटी तो होती ही है. इसके पीछे धार्मिक कारण तो हैं ही साथ में इसका हमारे जीवन पर साइंटिफिक असर भी होता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जब घंटी बजाई जाती है तो वातावरण में कंपन पैदा होता है, जो वायुमंडल के कारण काफी दूर तक जाता है. इस कंपन का फायदा यह है कि इसके क्षेत्र में आने वाले सभी जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है.

यही कारण है कि जिन जगहों पर घंटी बजने की आवाज नियमित आती रहती है, वहां का वातावरण हमेशा शुद्ध और पवित्र बना रहता है. इसी वजह से लोग अपने दरवाजों और खि‍ड़कियों पर भी विंड चाइम्स लगवाते हैं, ताकि उसकी ध्वनि से नकारात्मक शक्तियां हटती रहें. नकारात्मकता हटने से समृद्धि के द्वार खुलते हैं.

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