नई दिल्ली: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथग्रहण में पहुंचने और वहां के सेना प्रमुख को गले लगाने के बाद विवादों में घिरे कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी है। नवजोत सिंह सिद्धू ने साफ किया है कि यह यात्रा राजनैतिक नहीं थी और उन्होंने वही किया है जो पूर्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी भी कर चुके हैं। यहां एक बार फिर वो अपना बचाव करते हुए नजर आए। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसे मौके आए हैं, जब सीमा पर तनाव हो और दोनों देशों के नेताओं के बीच मुलाकात हुई हो। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपेयी जी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कारगिल के बाद जनरल परवेज मुशर्रफ को आगरा में बुलाया था।

सिद्धू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बुलाया। पीएम मोदी बिना किसी सरकारी औपचारिकता के लाहौर गए। उनके लाहौर दौरे के बाद पठानकोट पर हमला हुआ था। जांच के लिए आईएसआई के लोगों को बुलाया गया। कारगिल में हमारे 527 जवान शहीद हुए थे। इसके अलावा उन्होंने पाक आर्मी चीफ को गले लगाने पर कहा कि वो शपथ ग्रहण समारोह में आए और मुझसे गर्मजोशी से मिले। उन्होंने मुझसे कहा कि हम गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व पर करतारपुर बॉर्डर खोलेंगे। मेरे लिए ये बड़ी बात है। मुझे ये बात अच्छी लगी और मैंने ये किया। जो हुआ वह भावुक क्षण था।

वहीं बाजवा को गले लगाने पर आपत्ति जताने वाले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर सिद्धू ने कहा कि कप्तान साहब सहित कांग्रेस के कई लोगों ने इस पर बात की है। यह एक लोकतंत्र है और हर किसी को उनकी राय रखने का अधिकार है। सिद्धू ने आगे कहा कि मुझे वहां से 10 बार निमंत्रण मिला। इसके बाद मैंने भारत सरकार से अनुमति मांगी, पर मुझे अनुमति नहीं मिली। मैं इंतजार कर रहा था। पाकिस्तान सरकार के वीजा देने के 2 दिन बाद सुषमा स्वराज जी ने मुझसे कहा कि मुझे अनुमति दी गई है।