काम नहीं आया नागेश्वर राव का माफीनामा; अवमानना के दोषी करार, SC ने सुनाई ‘अनोखी सजा’

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मामले में सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव की बिना शर्त माफी को शीर्ष अदालत ने नामंजूर करते हुए उन्हें सजा सुना दी। शीर्ष अदालत ने नाराजगी जताते हुए राव पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाने के साथ उन्हें आदेश दिया कि जबतक कोर्ट की कार्यवाही चलेगी तबतक उन्हें पीछे बैठे रहना होगा।

नई दिल्ली : केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी पाते हुए उन्हें सजा सुनाई है। कोर्ट राव के माफीनामे से संतुष्ट नहीं हुआ और उन्हें सजा सुनाई। शीर्ष अदालत ने कोर्ट के उठने तक राव को कोने में बैठे रहने के लिए कहा। साथ ही उन पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया। राव ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस की जांच करने वाले अधिकारी का तबादला किया था।

इससे पहले राव ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी थी. एम नागेश्वर राव ने स्वीकार किया कि एजेंसी के पूर्व संयुक्त निदेशक एके शर्मा का तबादला करके उन्होंने ‘गलती’ की. राव ने शीर्ष अदालत से इसके लिए माफी मांगते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी. राव ने सात फरवरी को उन्हें जारी अवमानना नोटिस (Contempt Notice) के जवाब में एक हलफनामा दायर किया. उन्होंने कहा कि वह शीर्ष अदालत से बिना शर्त माफी मांगते हैं.

उन्होंने अपने माफीनामे में कहा, ‘मैं गंभीरता से अपनी गलती महसूस करता हूं और बिना शर्त माफी मांगने के दौरान मैं विशेष रूप से कहता हूं कि मैंने जानबूझकर इस अदालत के आदेश का उल्लंघन नहीं किया क्योंकि मैं सपने में भी इस अदालत के आदेश का उल्लंघन करने की सोच नहीं सकता.’ कोर्ट ने उसके आदेश का उल्लंघन करते हुए शर्मा का एजेंसी के बाहर तबादला करने के लिए सात फरवरी को सीबीआई को फटकार लगाई थी और राव को 12 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष उपस्थित होने को कहा था. शर्मा बिहार में बालिका गृह मामले की जांच कर रहे थे. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने शीर्ष अदालत के पिछले दो आदेशों का उल्लंघन किए जाने को गंभीरता से लेते हुए शर्मा का कोर्ट की पूर्व अनुमति के बगैर 17 जनवरी को सीआरपीएफ में तबादला किए जाने पर राव के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया था.

क्या है मामला
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले की सीबीआई जांच में SC की अनुमति के बिना जांच टीम में शामिल किसी भी अधिकारी का ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। इसके बाद भी नागेश्वर राव ने जांच टीम के चीफ सीबीआई अधिकारी एके शर्मा का 17 जनवरी को सीबीआई से CRPF में तबादला कर दिया था। इसके बाद सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव ने बिना शर्त सुप्रीम कोर्ट से माफी मांग ली थी। उन्होंने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफीनामा दाखिल कर दिया था।

राव की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल राव ने रखी दलील 

सुनवाई के वक्त अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि राव अपनी गलती स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह जानबूझकर नहीं किया था और सब अनजाने में हो गया। इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि अवमानना के आरोपी का बचाव सरकार के पैसे से क्यों किया जा रहा है।

चीफ जस्टिस ने जताई नाराजगी 
केके वेणुगोपाल की दलील पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताई और कहा कि राव को सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का पता था तभी उन्होंने कानूनी विभाग से राय मांगी और लीगल एडवाइजर ने कहा था कि एके शर्मा का ट्रांसफर करने से पहले सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर इजाजत मांगी जाए लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया गया? इसपर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि राव ने गलती स्वीकारी है उन्होंने माफी मांगी है। इसपर सीजेआई ने कहा कि संतुष्ट हुए बगैर और कोर्ट से पूछे बगैर अधिकारी का रिलीव आर्डर साइन करना अवमानना नहीं तो क्या है?

Web Title : Nageshwar Rao's apology; Contempt of contempt