नवरात्रि विशेष: यहां रेतीले धोरों में 600 सालों से जल रही अखंड ज्योति, आज तक नहीं बुझी अग्नि

कुकुर खांसी में वरदान साबित मन्दिर की खेजडी

जोधपुर/शेरगढ़। जी हां- ये अनोखा मंदिर जोधपुर के शेरगढ़ कस्बे में रेतीले धोरों की धणीयोणी के नाम से विख्यात आवड़ माता का मंदिर सदियों से आस्था का केन्द्र बना हुआ है। यहां सैकड़ों श्रद्धालु माता के दर्शनों की इच्छा लिए दरबार में धोक लगाने आते हैं। माता के भक्तों में मंदिर व यहां स्थित प्राचीन खेजड़ी के प्रति खासा आकर्षण है। श्रद्धालु इस खेजड़ी को चमत्कारी मानते हैं। इस मंदिर की खासियत ये है कि यहां पर एक अखंड ज्योति जल रही है जिसके बारे में दावा किया जाता है कि ये पिछले 600 सालों से ज्यों की त्यों जल रही है। लोगों का यह भी कहना है कि ऐसा एक दिन भी नहीं है जब ये बुझी हो। वहीं बड़े बुजुर्गों का कहना है कि मां की अनूठी कृपा है कि कोई प्राकृतिक विपदा नहीं आती।

कुकुर खांसी का रामबाण इलाज
आवड़ माता मंदिर के निकट स्थित इस खेजड़ी के पेड़ से कई जड़ें शाखाओं के तौर पर निकली हुई हैं। पेड़ की इस अनूठी संरचना के प्रति लोगों में यह आस्था है कि इन जड़ों से होकर गुजरने से बच्चों की कुकुर खांसी तक ठीक हो जाती है। इस कारण कई श्रद्धालु अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य व लंबी आयु की कामना लिए मंदिर में आकर शीश नवाते हैं। साथ ही इन जड़ों से होकर मंदिर की फेरी देते हैं।

खेजड़ी से निकली सात जड़ों का विशेष महत्व
मंदिर परिसर स्थित इस खेजड़ी के पेड़ से निकली 7 जड़ों के प्रति भी ग्रामीणों में विशेष आस्था है। मंदिर के पुजारी नखतसिंह राठौड़ ने बताया कि खेजड़ी की इन 7 जड़ों को आवड़ माता की सात बहनों के रूप में माना जाता है। माता के मंदिर के समीप ही 9 खेजड़ियों के पेड़ है। जिन्हें देवी के नौ रूपों के तौर पर पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि किसी व्यक्ति ने इन पेड़ों में से एक पेड़ को काट दिया था। इससे उसे श्राप लगा और उसका वंश भी समाप्त हो गया।

धोरों से निकली मूर्ति
जानकारों ने बताया कि करीब 560 वर्ष पूर्व देवराज वंशज विक्रम संवत 1512 में सुवालिया गांव से शेरगढ़ आए थे। इसी कालखंड में रेतीले धोरों से प्राकृतिक तौर पर आवड़ माता की मूर्ति अवतरित होने की मान्यता है। करीब 60 साल पहले गांव के सरपंच गुमानसिंह राठौड़ ने जनसहयोग से आवड़ माता के मंदिर का निर्माण करवाया था।

सच्चियाय माता मंदिर में हैं अंजता-ऐलोरा जैसी मूर्तियां
यह स्थान आस-पास रेतीले धोरों से घिरा है। चारों तरफ धोरों के बीच मंदिर स्थापित होने से यह स्थान कटोरे सा आभास देता है। इन धोरों के किसी भी छोर से देखने पर माता के मंदिर के दर्शन होते हैं। निकट ही मेगा हाई वे होने से सालभर और विशेषकर नवरात्रि में यहां कई श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

Web Title : Navaratri Special: Here in the sandy policies, the unbroken flame of burning for 600 years