नहीं रहे ओंकार सिंह जी बाबरा !

सरदार पटेल के साथ जोधपुर रियासत के भारत विलय का मसौदा तैयार करने वाले पूर्व नौकरशाह श्री औंकार सिंह जी बाबरा नहीं रहे । 99 वर्षीय औंकार सिंह जी पहले मारवाड़ रियासत के तत्कालीन नरेश स्व.ह्नुवंत सिंह जोधपुर के निजी सचिव रहे फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा के दबंग अधिकारी ।
गुपचुप भारत आये अंतरिक्ष यात्री नील आर्म स्ट्रोंग को भारत में किसी के साथ शाम और वक्त गुजारना अच्छा लगा तो वह औंकार सिंह जी ही थे । ज़िंदगी को अपने अंदाज में जीने वाले इस सख्श से जब भी मिला राजस्थानी भाषा की मान्यता का मुद्दा उनकी चिंताओं में शुमार रहा । साथ ही भाषा और संस्कृति की चिंता ऐसी कि भक्त शिरोमणी मीरां पर शुरू होने वाले एक प्रकल्प और छात्राओं की शिक्षा के लिए तुरंत पांच लाख का चैक थमा दिया ।
मैने उनके ज़रिये कई मिथकों और इतिहास को समझने की अक्सर कोशिश की । यह प्रोग्राम इसी की एक बानगी है .
जयपुर के मेट्रो मास होस्पिटल में नाजुक हालत में भर्ती रहे औंकार सिंह जी ने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से अपने गांव -बाबरा को बड़ी पहचान दी । चलते -फिरते  पुस्तकालय की शक्ल में ज़िन्दगी गुजारने वाले ओंकार सिंह जी 99 साल के थे लेकिन आखिरी घडी तक लिखने और पढ़ने की उनकी तलब किसी प्रेरणा से कम नहीं।
पूरी  एक सदी को अपनी यादों में समेटे जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंचे ओंकार सिंह बाबरा अपने कृतित्व के जरिये हमेशा जिन्दा रहेंगे।
इतिहास /भाषा /संस्कृति की लेखन के ज़रिये ताउम्र सेवा करते रहे ओंकार सिंह जी की आत्मा को भगवान् शांति दे और परिजनों को इस विछोह को बर्दास्त करने की हिम्मत दे।
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