मुजफ्फरपुर
बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार कहे जाने वाले अक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से 108 मासूमों की जान चली गई। जानलेवा बीमारी के चरम पर पहुंचने के 18 दिन बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर का दौरा किया। अस्पताल में नीतीश के दौरे के दौरान बाहर लोगों ने जमकर विरोध किया और नीतीश वापस जाओ के नारे लगाए। बच्चों की मौत से बौखलाए परिजन नीतीश मुदार्बाद और हाय-हाय के नारे लगाए। अस्पताल के बाहर खड़े लोगों का कहना है, इलाज ठीक से नहीं हो रहा है, रोज बच्चे मर रहे हैं। नीतीश अब क्यों जागे हैं, उन्हें वापस चले जाना चाहिए। बता दें कि नीतीश के अभी तक मुजफ्फरपुर नहीं पहुंचने पर विपक्ष उनपर हमले कर रहा था।
नीतीश के नहीं आने
पर उठ रहे थे सवाल
बता दें कि चमकी बुखार से मौत के बढ़ते आंकड़े और स्थिति के बद से बदतर होने के बावजूद सीएम नीतीश कुमार के मुजफ्फरपुर न आने पर लगातार सवाल उठ रहे थे। नीतीश कुमार के दौरे के चलते अस्पताल में सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई थी। ऐसे में मरीजों और उनके परिवारों को और अधिक मुसीबतों का सामना कर पड़ा। मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत से पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी नेता राबड़ी देवी ने नीतीश कुमार और पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए इसे मासूमों की हत्या करार दिया है।
राबड़ी ने कहा- बच्चों की मौत नहीं हत्या
राबड़ी देवी ने ट्वीट कर कहा, एनडीए सरकार की घोर लापरवाही, कुव्यवस्था, सीएम का महामारी को लेकर अनुत्तरदायी, असंवेदनशील और अमानवीय अप्रोच। लचर और भ्रष्ट व्यवस्था, स्वास्थ्य मंत्री के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार और भ्रष्ट आचरण के कारण गरीबों के 1000 से ज्यादा मासूम बच्चों की चमकी बुखार के बहाने हत्या की गई है। बढ़ती गर्मी, जागरूकता का अभाव और अस्पताल में संसाधनों की कमी के चलते मुजफ्फरपुर में स्थिति बदहाल है और बच्चों की मौत की सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वह अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहा है। रात के वक्त पूरे अस्पताल में एक या दो ही डॉक्टर मौजूद रहते हैं। रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन भी मुजफ्फरपुर पहुंचे थे जिसके सामने ही चार मासूमों ने दम तोड़ दिया था। अस्पताल में भर्ती पीड़ितों के परिवारों ने हर्षवर्धन का जमकर विरोध भी किया था।
सरकार और प्रशासन स्तर पूरी तरह फेल
एक तरफ इस बीमारी के कारण लगातार बच्चे मर रहे हैं, दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन स्तर पर काफी उदासीनता दिखी। स्थिति के वीभत्स होने के बाद भी मुख्यमंत्री के पास मुजफ्फरपुर के लिए समय न निकलने पर विरोधी दल और आम जनता लगातार सवाल उठा रही थी। नीतीश के मंत्री भी उनकी गैरमौजदूगी का जवाब नहीं दे पा रहे थे। सोमवार को पत्रकारों के सवाल के जवाब में बिहार सरकार में मंत्री श्याम रजक ने कहा था कि बीमार बच्चों को देखने के लिए सीएम नीतीश कुमार के यहां आने से अधिक जरूरी मरीजों का इलाज है और वह जारी है।
अस्पताल में क्षमता से अधिक काम
एसकेएमसीएच के सुपरिंटेंडेंट सुनील कुमार शाही ने बताया, अस्पताल में इस वक्त क्षमता से अधिक काम हो रहा है। भले ही एक बेड पर दो मरीज रखे जा रहे हैं लेकिन हम लगातार उनका इलाज कर रहे हैं। सुनील ने माना कि अस्पताल में संसाधनों की कमी है।