गैर भाजपा सरकार बनाने की कवायद शुरू

सोनिया गांधी ने संभाला मोर्चा, गहलोत सहित विश्वासपात्र नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी

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जयपुर। लोकसभा चुनाव में अंतिम चरण का मतदान रविवार को हो गया लेकिन कांग्रेस ने अभी से गैर भाजपा सरकार बनाने की कवायद शुरू कर दी है। कमान यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने अपने हाथों में ली है। सोनिया ने दिल्ली में इस बारे में पार्टी नेताओं से मुलाकात की है और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित अपने विश्वासपात्र नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी है। चुनाव के आखिरी चरण के मतदान से पहले ही कांग्रेस ने सरकार बनाने को लेकर मास्टर प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है। खुद सोनिया गांधी ने यह कमान संभाली है और चुनाव संपन्न होने से पहले ही क्षेत्रीय दलों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। मिशन यह है कि अगर बीजेपी बहुमत तक नहीं पहुंचती है, तो कांग्रेस किसी तरह से सभी पार्टियों को साथ लाकर गैर भाजपा सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा पा सके। 2004 में कांग्रेस ने 145 सीट पर ही मनमोहन सिंह के नेतृत्व में सरकार बना ली थी। इस बार भी ये काम सोनिया गांधी ने अपने हाथों में ले लिया है। सोनिया गांधी और उनकी टीम एक बार फिर सक्रिय हो गई है। 23 मई के नतीजे से पहले ही कांग्रेस पूरी तैयारी कर रही है। सोनिया गांधी ने क्षेत्रीय दलों से बातचीत करने के लिए कांग्रेस की एक कोर टीम बनाई है। इस कोर टीम में गांधी परिवार के करीबी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत, अहमद पटेल, पी चिदंबरम, कमलनाथ व ए.के. एंटोनी को शामिल किया गया है। वेणुगोपाल व मुकुल वासनिक को भी जिम्मेदारी दी गई है। राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने दो दिन पहले जयपुर में प्रेस कान्फ्रेंस करके इस बात की पुष्टि भी की है कि सोनिया गांधी ने मीटिंग ली है और कुछ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है।
सीएम गहलोत भी दिल्ली में सक्रिय
सोनिया गांधी का निर्देश मिलते ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दिल्ली में सक्रिय हो गए हैं। वे चार दिन तक दिल्ली में रहे और रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया। संभावना है कि अगले कुछ दिन गहलोत दिल्ली में रहेंगे और 23 मई के परिणाम के बाद पासे फैंकेंगे। कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस की सरकार बनाने के पीछे कांग्रेस के दो बड़े नेताओं का नाम और राजनीतिक अनुभव काम आया था। इनमें राजस्थान के मुख्यमंत्री और तत्कालीन संगठन महासचिव अशोक गहलोत तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद का नाम शामिल है। इन दोनों नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वे दक्षिण भारत के बड़े स्टेक होल्डर वाईएसआर और टीआरएस के साथ कैसे राजनीतिक तौर पर आगे बढ़ा जाए।
कांग्रेस की किलेबंदी
मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ को ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक से तालमेल बैठाने और मोदी के खिलाफ महा गठबंधन में जुड़ने की जिम्मेदारी दी गई है। बताया जाता है कि कमलनाथ ने कुछ दिन पहले नवीन पटनायक से फोन पर बात भी की थी। वहीं सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को गठबंधन की सरकार बनाने को लेकर हो रही सभी रणनीति पर नजर बनाने और सारी रिपोर्ट सोनिया गांधी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। अहमद पटेल व अशोक गहलोत ने इसके लिए दिल्ली में मीटिंग भी की थी। कांग्रेस ने अपनी तरफ से पूरी किलेबंदी कर ली है। 23 मई की सुबह रुझान के बाद जो परिस्थिति बनती है, उसके बाद कांग्रेस अपने पत्ते खोलेगी और बैठकों का दौर चलेगा।
क्षेत्रीय दलों से गठजोड़ में महारथ हासिल
सोनिया गांधी को क्षेत्रीय दलों से गठजोड़ करने में महारथ हासिल हैं। 2004 के चुनाव में सोनिया के नेतृत्व में कांग्रेस ने 145 सीटें जीतीं और भारतीय जनता पार्टी ने 138 सीटें, लेकिन सत्ता कांग्रेस के हाथ ही लगी। कांग्रेस ने क्षेत्रीय दलों को मिलाकर यूपीए की सरकार बना ली और 5 साल तक शासन किया। इसके बाद 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने 206 सीटें जीतीं जबकि यूपीए गठबंधन को 262 सीटें मिली। बीजेपी को तब 116 सीटें ही मिली। यूपीए को सरकार बनाने के लिए महज 10 सीटों की जरूरत थी जो कि सपा, बसपा और आरजेडी के समर्थन से पूरी हो गई।
सट्टा बाजार लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत बता रहा है, लेकिन कांग्रेस की अंदरूनी रिपोर्ट कहती है कि भाजपा को बहुमत नहीं मिलेगा। इसी उम्मीद में कांग्रेस ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है, लेकिन असली रणनीति तो 23 मई के बाद ही बन पाएगी, जब सीटों का आंकड़ा सामने आएगा, लेकिन इतना साफ है कि कांग्रेस व यूपीए की हर रणनीति में प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अहम भूमिका होगी।
भाजपा को 2014 के मुकाबले सीटों का नुकसान
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस एक ड्रॉफ्ट बना रही है। इस ड्राफ्ट में सहयोगी दलों को शामिल किया गया है, जिसे राष्ट्रपति को दिया जाएगा। इसके जरिए यह दिखाने की कोशिश रहेगी कि एनडीए का एक बड़ा समूह मोदी विरोधी है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार पार्टी की अंदरूनी रिपोर्ट कहती है कि भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा। भाजपा को 2014 के मुकाबले सीटों का नुकसान होगा, जिसका सीधा फायदा क्षेत्रीय पार्टियों का होगा। सातवें व अंतिम चरण में कांग्रेस अलग-अलग राज्यों में गठबंधन में चुनाव लड़ रही हैं। उनके प्रमुखों से सोनिया गांधी ने सीधे बात की है। इसके साथ ही कांग्रेस का मुख्य फोकस वे मित्र दल हैं जो न तो यूपीए और न ही एनडीए का हिस्सा है, लेकिन मोदी विरोध में उनको एक साथ लाया जा सकता है। इसी क्रम में सोनिया गांधी ने अखिलेश और मायावती दोनों से ही फोन पर बात की है।

Web Title : non BJP govt in center trying after exit polls sonia gandi lead