विदेशी पाहुणों के कलरव से गूंजने लगी पचपदरा की फिजाएं, सात समन्दर से पचपदरा पहुंचे प्रवासी परिन्दे

-कुरजां की अठखेलियों ने फूंकी माहौल में नई जान

जोधपुर/पचपदरा। पचपदरा की फिजाएं प्रवासी परिन्दे कुरजां के कलरव से गूंज लगी हैं। हजारों की तादाद में तुरर्र तुरर्र की आवाज के साथ आसमान में परवाज भरते इन विदेशी पाहुणा परिन्दों ने माहौल में मानों नई जान फंूक दी है। भोर की पहली किरण के साथ ही आसमान में उड़ते इन हजारों परिन्दों की अठखेलियों को निहारने के लिए लोग लालायित नजर आ रहे है। अपने मजबूत डैनों के बूते पर सात समन्दर फलांगकर प्रवास के लिए आने वाले प्रवासी पक्षी कुरजां के लिए पचपदरा और आसपास का इलाका किसी अभ्यारण्य से कम नहीं है।

यहां की अनुकूल आबोहवा इन विदेशी मेहमानों को इस कदर रास आ गई है कि हर साल हजारों के झुण्ड में कुरजां के समूह शीतकालीन प्रवास के लिए पचपदरा पहुंच जाते है। साइबेरिया आदि ठण्डे मुल्कों से आने वाले ये परिन्दे सितम्बर माह के पहले अथवा दूसरे सप्ताह में दस्तक दे देते है। करीब छह माह के शीतकालीन ठहराव के दौरान पचपदरा ही नहीं आसपास के गांवों में इनकी अठखेलियों से फिजाओं में ऐसी मिठास भर जाती है कि निहारने वाले टकटकी लगाये रह जाते है। चंूकि पचपदरा व इसके आसपास बहुतायत तादाद में तालाब व मैदानी इलाका है। जहां चुग्गे-पानी की कोई कमी नहीं रहती।

सुरक्षा के लिहाज से भी यह इलाका मुफीद व महफूज हैं, लिहाजा हर साल बडी तादाद में इन विदेशी परिन्दों का ठहराव होता है। इन परिन्दों का अनुशासन देखते ही बनता है। फौज के अनुशासित सिपाहियों की तरह सुरक्षा चक्र व कतारबद्ध उड़ान इनकी खासियत है। मैदानी क्षेत्रों में रात्रि पड़ाव के दौरान ये झुण्ड की सुरक्षा के लिए ऐसा चक्र बना लेते है कि जंगली जानवर या शिकारी इनकी परछाई भी छू नहीं पाते। झुण्ड के चारों ओर कुछ फासले पर परिन्दों की एक टोली पहरेदारी करती है। जैसे ही कोई हलचल या शिकारी व किसी जानवर का अहसास होते ही ये कर्कश आवाज निकालते हुए दल के अन्य सदस्यों को खतरे से आगाह कर देते है। इसके अलावा उडान के समय भी इनका ये अनुशासन देखते ही बनता है।

अंग्रेजी वर्णमाला के वी आकार में कतारबद्ध उडान भरने वाला समूह अपने मुखिया के पीछे परवाज भरता है। पचपदरा के हरजी, इमरतिया, गुलाबसागर, नवोडा, धियारनाडी, चिरढाणी आदि तालाबों के किनारे व मैदानों में इन दिनों इन विदेषी परिन्दों की अठखेलियों व कलरव से खासी रौनक बनी हुई है। पचपदरा-गोपडी-पाटोदी मार्ग, रामसीन मंूगडा मार्ग, बाडमेर रोड के किनारे खेतों व मैदानों में चुग्गा-पानी करते इन हजारों विदेशी परिन्दों की ओर हर किसी का बरबस ही ध्यान चला जाता है और निहारने वाला टकटकी लगाए रह जाता है।

Web Title : Pachadra's bizarre voice resonated with foreign visitors