पाकिस्तान ने आतंकी शिविरों पर लगाए ताले!

नई दिल्ली। पाकिस्तान को पहली बार पसीना आ रहा है। उसकी विदेशी मुद्रा का खजाना खाली हो चुका है। उसे उस लिस्ट में डाल दिया गया है, जिसमें उन देशों को डाला जाता है, जो आतंकवादियों की मदद करते पाए जाते हैं। इन देशों को कोई देश किसी तरह की मदद नहीं करता। यही वजह है कि एक दो दिन पहले पाकिस्तान ने 32 सालों में पहली बार आतंकी शिविरों पर ताला लगा दिया है। कश्मीर के जाने-माने अखबार कश्मीर रीडर ने 20 मई को खबर प्रकाशित कर बताया कि पाकिस्तान ने उन सभी आतंकवादी संगठनों के शिविरों पर ताला लगा दिया है, जो उसके इशारों पर कश्मीर में गड़बड़ी फैलाते थे। खबर के अनुसार पाकिस्तान ने यूनाइटेड जिहादी काउंसिल से जुड़े 12 संगठनों के आफिसों को सील कर दिया। इन आतंकी संगठनों को चलाने के लिए पाकिस्तान उन्हें जो आर्थिक मदद देता था या जो आर्थिक मदद उन्हें बाहर से मिलती थी, उस पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। बालाकोट में आतंकी शिविरों को निशाना बनाते हुए एयर स्ट्राइक की। भारत के इस कदम ने पाकिस्तान के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया।
उसे समझ में आ गया कि अब भारत में वो अपनी जमीन से प्रायोजित आतंकवाद नहीं चला सकता। दूसरा काम ये हुआ कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के नहीं चाहने के बाद भी चीन को मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकवादी घोषित करने का समर्थन करना पड़ा। इन दोनों बातों से अगर पाकिस्तान ने पहली बार दबाव महसूस करना शुरू किया तो आर्थिक कंगाली ने नसें और ढीली कर दीं। उसने जब पिछले दिनों आर्थिक मदद के लिए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और चीन के आगे हाथ फैलाए तो निराशा हाथ लगी थी।
पाकिस्तान के होश फाख्ता
आईएमएफ उसे कर्ज दे जरूर रहा है, लेकिन कड़ी शर्तोंं के साथ। इसमें अड़चन बनी हुई है एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट जिसमें पाकिस्तान का नाम पिछले दिनों शुमार कर लिया गया। इस लिस्ट में उन देशों को शामिल किया जाता है, जिनके खिलाफ आतंकवादियों को सहयोग और आर्थिक मदद के आरोप के साथ साक्ष्य भी होते हैं। जैसे ही पाकिस्तान का नाम एफएटीएफ की लिस्ट में आया, उसके होश फाख्ता हो गए क्योंकि जब तक उसका नाम इस लिस्ट में रहेगा, तब तक कोई देश उसकी आर्थिक मदद के लिए आगे नहीं आने वाला। लिहाजा पाकिस्तान इस समय चारों ओर हाथ-पैर फेंक रहा है कि किसी तरह उसे इस सूची से बाहर किया जाए। पाकिस्तान में 32 सालों से चल रहे आतंकी कैंपों को बंद करने का कदम इसी दिशा में उठाया गया है।
पहली बार इतने खराब आर्थिक हालात
ये जानना भी जरूरी है कि पाकिस्तान आजादी के बाद पहली बार बहुत खराब आर्थिक हालात से गुजर रहा है। ऐसे हालात, जो किसी भी देश को दीवालियापन की ओर ले जाते हैं। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार पूरी तरह खाली है। बाहर से उसके लिए कुछ भी मंगाना मुश्किल हो चला है। तेल तक मंगाने के लाले हैं. एक डॉलर की कीमत 152 पाकिस्तानी रुपये के बराबर हो चुकी है। उसे पेट्रोल में राशनिंग जैसे हालात से गुजरना पड़ रहा है। ये हालात तब तक ज्यादा रहेंगे जब तक कि वो एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं निकल पाता।

Web Title : pakistan close to terrorist camp