मालदीव के साथ चीन की निकटता के बाद अब पाक के साथ पावर डील, भारत की टेंशन!

नई दिल्‍ली: मालदीव की चीन से करीबी जहां भारत के लिए पहले से ही सिरदर्द बनी हुई है, वहीं पाकिस्‍तान से उसकी बढ़ती नजदीकी नई दिल्‍ली के लिए परेशानी का एक अलग सबब बन सकती है। हेलीकॉप्‍टर और वर्क परमिट के मुद्दे पर पहले ही भारत को झटका देने वाले मालदीव ने अब बिजली के क्षेत्र में पाकिस्‍तान के साथ एक समझौता किया है, जिसने भारत को सतर्क कर दिया है।

मालदीव के स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कंपनी स्टेलको के प्रतिनिधियों ने पिछले सप्ताह पाकिस्तान जाकर एमओयू पर हस्ताक्षर किए। मालदीव ने भारतीयों के लिए वर्क परमिट देना बंद कर दिया है और भारत के सहयोग से होने वाले प्रॉजेक्ट को पूरा करने में भी इरादतन देरी कर रहा है ऐसे वक्त में पाकिस्तान के साथ करार नई दिल्ली के लिए चिंता का कारण जरूर है। मालदीव में भारत के सहयोग से एक पुलिस अकैडमी का निर्माण हो रहा है, लेकिन माले इरादतन उसमें देरी कर रहा है।

मालदीव में मौजूद भारतीय अधिकारी मान रहे हैं कि संकेतों में मालदीव भारत का प्रभाव अपने देश में पूरी तरह से कम करना चाहता है। भारतीय अधिकारी यह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जब स्टेलको के ज्यादातर प्रॉजेक्ट चीन की सहायता से ही पूरे हो रहे हैं, ऐसे वक्त में पाकिस्तान के साथ अलग से करार कर मालदीव सरकार भारत को क्या समझाने की कोशिश कर रही है।

एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने बताया, ‘ पाकिस्तान की आर्थिक हालत देखते हुए कहा जा सकता है कि मालदीव की मदद कर सकने में पाक बहुत सक्षम नहीं है। प्रेजिडेंट यामीन हर तरीके से कोशिश कर रहे हैं कि भारत के प्रभाव को मालदीव में कम से कम रखा जा सके। वह मालदीव को भारत के प्रभाव और नई दिल्ली की निकटता दोनों से ही दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं।’ एक अन्य अधिकारी ने बताया, ‘भारत से तोहफे में मिले दोनों हेलिकॉप्टर हटाने के फैसले के बाद यामीन सरकार ने भारत को डेडलाइन खत्म होने की भी याद दिला दी है। इसके साथ ही मालदीव ने भारत से 2016 में हुई चर्चा के बाद डॉरनियर एयरक्राफ्ट लेने से भी इनकार कर दिया है। यामीन साफ तौर पर संकेत दे रहे हैं कि वह भारत के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहते हैं।’

Web Title : Power deal with Pak after China's proximity to Maldives