राजस्‍थान: दो दशकों से बदल रही बाजी, क्‍या इस बार टूटेगा तिलि‍स्‍म?

नई दिल्‍ली: राजस्‍थान देश का एक ऐसा इकलौता राज्‍य है, जहां पर दो दशकों से मतदाता सत्‍ता की बाजी पलट देते हैं. इस राज्‍य में 1998 के बाद किसी भी एक राजनैतिक दल को लगातार दो बार शासन करने का मौका नहीं मिला है. बीते दो दशकों में हुए चार विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो एक बार बीजेपी तो दूसरी बार कांग्रेस के हाथों सत्‍ता की बागडोर आई. बीते कुछ वर्षों तक कुछ ऐसी स्थिति पंजाब और तमिलनाडु की भी थी. पंजाब में एक बार कांंग्रेस तो दूसरी बार अकाली दल और बीजेपी गठबंधन की सरकार बनती थी. तमिलनाडु की बात करें तो वहां एक बार डीएमके तो दूसरी बार एआईएडीएमके को सत्‍ता की बागडोर मिलती थी. पंजाब का यह मिथक 2012 के विधानसभा चुनाव में टूट गया.
2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने अकाली दल को लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का मौका दे दिया. वहीं, तमिलनाडु में यह मिथक 2016 के विधानसभा चुनावों में टूटा. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2016 में वहां की जनता ने एआईएडीएमके को दूसरी बार सरकार बनाने का मौका दिया.

उल्‍लेखनीय है कि पंजाब विधानसभा चुनाव 2007 में अकाली दल ने 48 सीटों पर जीत हासिल कर अपनी सरकार बनाई थी. वहीं, 2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव में अकाली दल 56 सीटें जीत कर दूसरी बार सरकार बनाने में कामयाब रही थी. इसी तरह, एआईएडीएमके ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2011 में 150 सीटें और 2016 में 134 सीटें हासिल की थीं.

1977 में कांग्रेस को मिली पहली शिकस्‍त
राजस्‍थान में पहली सरकार का गठन 7 अप्रैल 1949 को हुआ था. इस सरकार की बागडोर बतौर मुख्‍यमंत्री हीरा लाल शास्‍त्री को सौंपी गई थी. हीरा लाल शास्‍त्री 5 जनवरी 1951 तक राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री रहे. राजस्‍थान में पहला विधानसभा चुनाव 1951 में हुआ. इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 140 में से 82 सीटों पर जीत हासिल कर अपनी पहली सरकार बनाई. इस बार सीएस वेंकटाचारी को राजस्‍थान का मुख्‍यमंत्री बनाया गया. सीएस वेंकटाचारी ने 6 जनवरी 1951 में बतौर मुख्‍यमंत्री शपथ ग्रहण कर अपना पदभार संभाल लिया. इसके बाद, 1977 तक राजस्‍थान में लगातार 25 सालों तक कांग्रेस की सरकार रही. 1977 के विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी ने 200 सीटों में 152 सीट पर जीत हासिल कर अपनी सरकार बनाई. इस चुनाव में कांग्रेस महज 41 सीटों पर सिमट कर रह गई.

चार टुकड़ों में बंट गई जनता पार्टी, कांग्रेस को वापस मिली सत्‍ता:
1977 के चुनावों में जबरदस्‍त जीत हासिल करने वाली जनता पार्टी महज तीन सालों में चार टुकड़ों में बिखर गई. जनता पार्टी का पहला टुकड़ा बीजेपी बना, जबकि दूसरा जनता पार्टी (जेपी), तीसरा टुकड़ा जनता पार्टी (एससी) और चौथा टुकड़ा जनता पार्टी (एसआर) बना. 1980 के विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी के इस टूटन का सीधा फायदा कांग्रेस को मिला. राजस्‍थान विधानसभा चुनाव 1980 में एक बार फिर कांग्रेस 133 सीट जीतकर सत्‍ता में वापस लौटी. इस चुनाव में बीजेपी का मुख्‍य विपक्षी पार्टी के रूप में उदय हुआ. चुनाव में बीजेपी ने 32 सीटें हासिल की. इसके बाद कांग्रेस ने राजस्‍थान पर लगातार 10 सालों तक शासन किया.

Web Title : Rajasthan: Changing the bet for two decades,