राजस्थान चुनाव 2018 : दुविधा में मुस्लिम वोटर्स, जाएं तो जाएं कहां..!

जयपुर: राजस्थान विधानसभा चुनाव का प्रचार अंतिम चरण में है। सभी पार्टियों के दिग्गज मतदाताओं को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इन सब के बीच मुस्लिम वोटर्स असमंजस की स्थिति में हैं कि आखिर वो भाजपा को चुनें कि कांग्रेस को, क्योंकि उनके लिए यह एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाईं जैसा है।

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के मुस्लिम हाल के दिनों को देखकर सहमे हुए हैं। उनका मानना है कि पहले यह स्थिति नहीं थी। सभी मिल-जुल कर काम करते थे और मोहल्ले में आराम से निश्चिंत होकर रहते थे, लेकिन बीते कुछ सालों में स्थिति बदल गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुसलमानों का मानना है कि सोशल मीडिया द्वारा फैलाए जा रहे नफरत के कारण अब दोस्तों में भी मनमुटाव हो गया है। जो हिंदू-मुस्लिम कभी मिलकर व्यापार करते थे, अब वे सिर्फ इन नफरत भरे मैसेज पर चर्चा और विवाद पैदा करते हैं।

मुस्लिम युवाओं ने बातचीत में बताया कि कैसे अलवर के पहलू खान को गोतस्करी के नाम पर पीट-पीटकर मार डाला गया। पुलिस ने भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि भाजपा से कहीं ज्यादा उसके सहयोगी जैसे बजरंग दल, वीएचपी, शिवसेना और आरएसएस जैसे हिंदूवादी संगठन खतरनाक हैं।

जानकारों की मानें तो टोंक के मुसलमानों के बीच भ्रम की स्थिति के लिए यूनुस ख़ान ही नहीं बल्कि कांग्रेस के अंदरूनी हालात भी जिम्मेदार हैं. 1972 से लेकर 2013 में हुए प्रदेश के आख़िरी विधानसभा चुनाव तक कांग्रेस ने टोंक में मुस्लिम प्रत्याशियों पर ही भरोसा जताया है. नतीजन स्थानीय मुस्लिम नेता कांग्रेस के टिकट पर अपना स्वभाविक हक़ मानते रहे हैं. लेकिन उन्हें आशंका है कि यदि सचिन पायलट जीतने के बाद टोंक में ही टिक गए तो पार्टी के टिकट से विधायक बनने की उनकी आस अगले कई चुनावों के लिए खटाई में पड़ जाएगी.

जिला कांग्रेस से जुड़े एक विश्वसनीय सूत्र इस बात की पुष्टि करते हैं. दूसरी तरफ टिकट मिलने के बाद से ही यूनुस ख़ान बार-बार जताते रहे हैं कि टोंक में उन्हें पार्टी ने भेजा है. लेकिन उनकी मंशा वहां रुकने की कतई नहीं है. जबकि सचिन पायलट ने गहन सोच-विचार के बाद टोंक को अपने लिए चुना है, जो बताता है कि वे वहां लंबा टिकने का मन बनाकर आए हैं.

हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि अभी तक टोंक में पायलट 21 ही नज़र आते हैं. लेकिन उनकी राह इतनी आसान भी नहीं दिखती. सूबे में पायलट विरोधी धड़ा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्षों के विधानसभा चुनावों में हारने की घटनाओं को बार-बार गिनवाता रहा है. 2008 के चुनाव में एक वोट से हारे मुख्यमंत्री पद के दावेदार सीपी जोशी इस बात के बड़े उदहारण हैं. हालांकि सचिन पायलट के हाथ में भाजपा के प्रति जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर के अलावा आमवोटर को लुभाने के लिए मुख्यमंत्री पद की दावेदारी जैसा बड़ा हथियार है. लेकिन जमीनी पड़ताल बताती है कि टोंक के जातिगत समीकरण इन हथियारों के प्रभाव को कुंद कर सकते हैं. टोंक की हर गली, नुक्कड़, ढाबे और चाय की दुकान पर इस बारे में चली बात हर बार ले-देकर वहीं आ टिकती है कि मुसलमान किस तरफ जाएंगे!

Web Title : Rajasthan Elections 2018: Muslim Voters in Dilemma