राज्यसभा सांसद डूडी फिर कमसा पर लगाएंगे दांव, पूर्व सांसद जाखड ने नहीं खोले पते पर मेघवाल की तरफ झुकाव!

भोपालगढ विधानसभा क्षेत्र में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। शह और मात के इस खेल में चिरप्रतिद्वंद्वी जाट नेता पूर्व सांसद जाखड़ व राज्यसभा सांसद डूडी फिर आमने-सामने हैं। हालांकि अब दोनों नेताओं में रिश्तेदारी हो गई है बावजूद अपने वजूद को लेकर राजनीतिक अखाड़े में दोनों अपने-अपने दांव दिखाते नजर आ रहे हैं।

-सुरेश खटनावलिया
जोधपुर: भोपालगढ़ विधानसभा क्षेत्र की सीट भले ही परिसीमन के बाद एससी के लिए सुरक्षित हो गई हो, लेकिन पिछले दो चुनाव से कांग्रेस व भाजपा के दो जाट नेताओं के लिए यह सीट मूंछ का सवाल बनी हुई है। इसका प्रमुख कारण यह है कि इस विधानसभा क्षेत्र के कारीबन 2 लाख 77 हजार 962 मतदाताओं में से एक लाख वोट जाट हैं।

भोपालगढ़ विधानसभा सीट पर गत चुनाव की बात करें तो कांग्रेस उम्मीदवार ओमप्रकाश मेघवाल व भाजपा उम्मीदवार कमसा मेघवाल के पीछे दो जाट नेताओं का वरदहस्त था। कमसा को यहां से उम्मीदवार बनाने के पीछे भाजपा के जाट नेता रामनारायण डूडी व ओमप्रकाश मेघवाल को टिकट दिलाने में पाली से तत्कालीन कांग्रेस सांसद एवं यहां के जाए जन्मे बद्रीराम जाखड़ की प्रमुख भूमिका रही। इससे पिछले चुनाव में यहां से कांग्रेस ने पूर्व मंत्री नरपतराम बरवड़ की पत्नी हीरादेवी को उम्मीदवार बनाया था, जिन पर वरिष्ठ कांग्रेसी जाट नेता परसराम मदेरणा परिवार का हाथ भी था। इसके बावजूद बाहरी उम्मीदवार का मुद्दा हावी होने के कारण वे चुनाव नहीं जीत पाई थी। ऐसे में सांसद जाखड़ गत चुनाव में नए उम्मीदवार ओमप्रकाश मेघवाल को कांग्रेस का टिकट दिलाने में कामयाब हो गए थे।

तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई नेताओं ने सांसद जाखड़ से उनके संसदीय क्षेत्र पाली का भोपालगढ़ अहम हिस्सा होने के नाते यहां नए उम्मीदवार मेघवाल को टिकट देने में उनकी राय को महत्व दिया था। जाखड़ ने टिकट दिलाने के बाद से ही भोपालगढ़ में मेघवाल को लेकर जनसंपर्क व सभाएं कर उनके लिए समर्थन जुटाया। सांसद के भाई नारायणराम जाखड़ सहित तकरीबन सभी कार्यकर्ता एवं उनके समर्थक सरपंच, वार्ड पंच, जिला परिषद सदस्य उनके साथ थे लेकिन परंपरागत कार्यकतार्ओं की नाराजगी टूटी नहीं। जाखड के तमाम प्रयासों के बाद भी उनके चेहते मेघवाल को मोदी लहर ले डूबी और भाजपा नेता डूडी अपनी विरासत सीट पर अपनी पसंदीदा कमसा मेघवाल को जाट बाहुल्य क्षेत्र से दोबारा विधानसभा पहुंचाने में कामयाब हो गए।

…फिर शह और मात का खेल शुरू

राजस्थान विधानसभा चुनाव-2018 को लेकर भोपालगढ विधानसभा क्षेत्र में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। शह और मात के इस खेल में चिरप्रतिद्वंद्वी जाट नेता पूर्व सांसद जाखड़ व राज्यसभा सांसद डूडी फिर आमने-सामने हैं। हालांकि अब दोनों नेताओं में रिश्तेदारी हो गई है बावजूद अपने वजूद को लेकर राजनीतिक अखाड़े में दोनों नेता अपने-अपने दांव दिखाते नजर आ रहे हैं। डूडी अबकी बार भी राज्यमंत्री कमसा मेघवाल पर ही दांव लगाते दिख रहे हैं, उन्होंने भाजपा हाईकमान तक यह बात पहुंचा भी दी है। हालांकि जाखड भी ओमप्रकाश मेघवाल पर दांव लगाने के मूड में हैं मगर पार्टी गाइडलाइन के चलते वे अपने मोहरे फिलहाल सार्वजनिक नहीं करना चाहते लेकिन अंदरखाने में उन्होंने अपने सर्मथकों को ओमप्रकाश मेघवाल की भोलावण दे दी है। वैसे देखा जाए तो जाखड़ मेघवाल पर तीन साल से मेहनत कर रहे हैं इसके लिए उन्होंने मेघवाल को जमीनी पकड़ बनाने के लिए फील्ड में ही रखा हैं।

राहुल गांधी के शक्ति प्रोजेक्ट में भी मेघवाल ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कांग्रेस हाईकमान ने पहले ही स्पष्ठ कर दिया था कि शक्ति प्रोजक्ट में मिले पोइंट कार्यकर्ता के टिकट पाने में काफी मददगार साबित होंगे, अंक ही आवेदक को वरीयता तय करेंगे। इस प्रोजक्ट में भोपालगढ़ विधानसभा क्षेत्र के 293 बूथ पर मेघवाल के करीब 3300 अंक हैं जो सबसे ज्यादा बताए जा रहे है। यह भी बताया जा रहा है कि जाखड के भतीजे व भाई पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष नारायणराम जाखड के पुत्र भोपालगढ़ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राजेश जाखड़ ने भी ओमप्रकाश के पक्ष में अनुशंसा भेजी है। ओमप्रकाश का जातीय पक्ष भी मजबूत दिखाई दे रहा है, हालांकि उन्हीं के समाज के केआर मेघवाल जो कोलकाता में मुख्य आयकर आयुक्त है ने भी इस विधानसभा से टिकट पाने की जुगत शुरू कर दी है। वे अभी-अभी ही इसे क्षेत्र में सक्रिय हुए हैं, उनकी राह काफी कठिन दिखाई दे रही है क्योंकि राहुल गांधी व प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व किसी भी सूरत में बाहरी व्यक्ति की उम्मीदवारी स्वीकार नहीं करेगा। मेघवाल समाज के पुसाराम मेघवाल व पूर्व पूर्व मंत्री गीता बरवड़ भी टिकट पाने का प्रयास रहे हैं लेकिन क्षेत्र में कमजोर पकड़ उनके प्रयासों को निष्फल कर सकती हैं। वैसे अल्लाराम मेघवाल व इस समाज के 2-3 और नेता भी टिकट पाने की मंशा पाले है।

साफ छवि लेकिन प्रवासी का ठपा
इसी प्रकार रैगर समाज के चंपालाल बोरा भी काफी समय से क्षेत्र में सक्रिय रहकर अपनी उम्मीदवारी जताने की कोशिश में है। इसके लिए वे अपने क्षेत्र में निवारत अपने व अन्य समाज के लोगों के बीच जाकर अपने पक्ष में समर्थन जुटाने के प्रयास कर रहे हैं। बोरा की छवि साफ है, मगर क्षेत्र में कमजोर पकड, कमजोर जातीय समीकरण, प्रवासी का ठपा व शक्ति प्रोजेक्ट में उदासीनता उन्हें मंजिल से दूर कर सकती है। गत दिनों बड़ी संख्या में उनके समाज के लोगों ने पूर्व सासंद जाखड से मुलाकात कर बोरा को टिकट दिलवाने की मांग की, हालांकि जाखड़ ने उन्हें भी आश्वस्त किया कि वे उनके साथ है जबकि ऐसा प्रतीत नहीं होता कि जाखड़ उन पर अपना दांव लगाएंगे। वैसे देखा जाए जो इस सीट से जाखड की प्रतिष्ठ जुड़ी है, वे दूध से जले है, इसलिए छाछ भी फूंक-फूंक कर पी रहे है। किसी भी सूरत में इस सीट को अबकी बार गंवाना नहीं चाहते। यह सीट ही उनके या उनके परिवार के लिए लोकसभा में मजबूत दावेदारी की राह प्रशस्त करेगी।

फैक्ट फाइल

क्षेत्रीय राजनीति के जानकारों के अनुसार भोपालगढ विधानसभा क्षेत्र में लगभग दो लाख 77 हजार 962 मतदाता है। इसमें सर्वाधिक 1 लाख जाट, माली 25 हजार, राजपूत 12-15 हजार, बिश्नोई 12-15 हजार, मेघवाल 35-40 हजार, भील 13000, चौकीदार 15 हजार, नट 13 हजार, रैगर 5 से 6 हजार, सरगरा 2000, सांसी 2000, हरिजन 3000 तथा करीब 20-25 हजार मुस्लिम वोटर है। शेष वोटर में ब्राह्मण, सुथार, सोनार, कुम्हार, महाजन, राजपुरोहित जैसी जातियों के लोग शामिल है।

भाजपा-कांग्रेस ने बदला टिकट का फामूर्ला

राज्य में भाजपा व कांग्रेस, दोनों दलों के लिए अभी से प्रतिष्ठा का प्रश्न बने विधानसभा चुनाव इस बार खासे रोचक रहने के आसार हैं। दोनों ही दलों ने चुनाव में उम्मीदवार उतारने का फामूर्ले में कुछ बदलाव किया है। किसी भी सीट पर कोई जोखिम न रहे, इसके लिए दोनों दल जिताऊ उम्मीदवार को ही टिकट देंगे हैं। विधायकों की छवि और उम्मीदवारों के आकलन के लिए भाजपा तो लगातार सर्वे करा रही है। वहीं, कांग्रेस में उम्मीदवार दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं।

कांग्रेस का फामूर्ला
मजबूत हो उम्मीदवार: टिकट वितरण के लिए प्रदेश कांग्रेस ने अभी तक खास फामूर्ला तो नहीं बनाया है लेकिन यह देखा जा रहा है कि उम्मीदवार मजबूत हो। नेताओं का कहना है इस बार कांग्रेस ने उम्मीदवारों के चयन के लिए ब्लॉक व जिलाध्यक्षों से रिपोर्ट ली थी। इससे पहले विधानसभा कॉर्डिनेटर लगाकर क्षेत्रों के दावेदारों के बारे में और जातिगत आंकड़ों की रिपोर्ट तैयार कराई थी। इन रिपोर्ट्स और अपने सर्वे के आधार पर ही प्रदेश के चारों सह प्रभारियों ने उम्मीदवारों के नामों के पैनल तैयार किए हैं। वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद पैनल तैयार कर प्रदेश स्क्रीनिंग कमेटी को भेजे गए हैं। अब जल्दी ही स्क्रीनिंग कमेटी की प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक होगी, जिसमें नामों पर चर्चा की जाएगी।

प्रदेश इलेक्शन कमेटी में होगी खानापूर्ति: प्रदेश कांग्रेस की अभी इलेक्शन कमेटी भी नहीं बनी है। यह कमेटी अब जल्दी ही घोषित हो सकती है। इसमें उम्मीदवारों के नामों को लेकर अब सिर्फ खानापूर्ति होगी क्योंकि पैनल तैयार होकर स्क्रीनिंग कमेटी के पास पहुंच चुके हैं।

गत विधानसभा चुनाव में यह रहा फामूर्ला

गत विधानसभा चुनाव-2013 में कांग्रेस ने विधानसभावार कॉर्डिनेटर लगाकर दावेदारों से आवेदन लिए थे। इसके लिए फार्मेट तैयार किया था। इसमें पार्टी में कब से सदस्य, कौन-कौन से पदों पर रहे, उनके बूथ पर पार्टी को कितने वोट मिले, सामाजिक गतिविधियां, पार्टी के लिए बड़ा काम आदि जानकारियां ली गई थीं। इन आवेदनों के आधार पर पैनल बनाए गए थे। बाद में प्रदेश इलेक्शन कमेटी में चर्चा कर स्क्रीनिंग कमेटी को नाम भेजे गए थे। विधानसभावार आवेदन लेने से कई दिन तक हर विधानसभा क्षेत्र पर कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा रहा था।

नेताओं की दिल्ली दौड़ तेज: कांग्रेस उम्मीदवारों का पैनल दिल्ली स्क्रीनिंग कमेटी के पास पहुंचने के साथ ही प्रदेश के नेताओं की दिल्ली में भागदौड़ तेज हो गई है। पिछले कुछ दिन में स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष कुमारी शैलजा से बड़ी संख्या में प्रदेश के नेताओं ने मुलाकात की। दिल्ली में अन्य बड़े नेताओं के पास भी प्रदेश से रोजाना बड़ी संख्या में नेता पहुंच रहे हैं।

भाजपा का फामूर्ला

जिताऊ नामों पर फोकस: भाजपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी जिताऊ उम्मीदवारों के साथ मौजूदा विधायकों के कामकाज को लेकर भी सर्वे करा रही है। विधायकों को लेकर सर्वे का सिलसिला तो सरकार बनने के सालभर बाद से ही शुरू हो गया था। हर छह माह में अंदरपेटे सर्वे कराकर विधायकों की छवि परखी जा रही है। अब चुनाव नजदीक आने के साथ भाजपा विधानसभावार नए उम्मीदवारों के लिए भी जयपुर-दिल्ली दोनों जगह सर्वे करा रही है। मुख्यमंत्री राजस्थान गौरव यात्रा लेकर जिस विधानसभा क्षेत्र में जा रही हैं, वहां भी जिताऊ उम्मीदवार देखे जा रहे हैं।

पार्लियामेंट्री बोर्ड तय करेगा टिकट
पार्टी सूत्रों के मुताबिक टिकट वितरण से पहले पार्टी 5-6 सर्वे कराएगी। इसके बाद सभी सर्वे में विधानसभावार कॉमन नामों को एक किया जाएगा। इन पर पार्लियामेंट्री बोर्ड में चर्चा होगी। इसके बाद एक नाम तय होगा। टिकट वितरण में बड़ी भूमिका पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की रहेगी।

पिछले चुनाव में यह था फामूर्ला
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वसुंधरा राजे की सुराज संकल्प यात्रा के दौरान सामने आए उम्मीदवारों में से ही नाम तय किए थे। यात्रा के दौरान विधानसभावार 3-4 नाम लिखे गए थे। यात्रा के बाद जिताऊ उम्मदवारों की समीक्षा कर नाम फाइनल किए गए थे। हालांकि भाजपा में उम्मीदवार इस संशय में हैं कि टिकट के लिए दिल्ली जाएं या जयपुर में ही सम्पर्क करें। मुख्यमंत्री की भी टिकट वितरण में प्रभावी भूमिका मानी जा रही है लेकिन नेताओं में संशय यह भी है कि इस बार टिकट वितरण में प्रदेश इकाई को पूरी तरह हरी झंडी मिल पाएगी या नहीं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक है)

Web Title : Rajya Sabha MP Doodie again will pay bets on Kamas