सामान्य वर्ग आरक्षण बिल की आज राज्यसभा में असली परीक्षा, विपक्ष लगाएगा नैय्या पार, ये है समीकरण

आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को शिक्षा और नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण के लिए संविधान संशोधन बिल को मंगलवार को लोकसभा में मंजूरी मिल गई। आज इसी मुद्दे पर उच्च सदन यानी राज्यसभा में सरकार का असली इम्तिहान है, जहां एनडीए का बहुमत नहीं है। राज्यसभा में अपनी रणनीति को लेकर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में आज एक अहम बैठक भी की।

नई दिल्ली: सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए मंगलवार को लोकसभा में संशोधित बिल पारित हुआ। बिल के समर्थन में जहां 323 वोट पड़े वहीं, विरोध में महज 3 वोट पड़े। अब बिल की असल परीक्षा राज्यसभा में बुधवार को यानी आज होगी। हालांकि, लोकसभा में जिस तरह से विपक्षी पार्टियों का रूख रहा है उससे नहीं लगता कि सरकार को यहां से पास कराने में खासा परेशानी होगी। लेकिन राज्यसभा में एनडीए सरकार के पास बहुमत नहीं है, ऐसे में आज सरकार किस प्रकार इस बिल का पास कराती है यह देखना दिलचस्प होगा।

इस विधेयक को लेकर लोकसभा में मंगलवार को करीब 5 घंटे तक चली बहस में लगभग 17 दलों ने इसका पक्ष लिया, लेकिन किसी ने भी इसका खुलकर विरोध नहीं किया। हालांकि कई सांसदों ने इस विधेयक को लेकर सरकार की नीयत पर प्रश्न जरूर भी खड़े किए। कांग्रेस, बसपा, सपा, तेदेपा और द्रमुक सहित विभिन्न पार्टियों ने इसे भाजपा का चुनावी स्टंट करार दिया। कांग्रेस ने कहा कि वह आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए विधेयक के समर्थन में है, लेकिन उसे सरकार की मंशा पर शक है। पार्टी ने कहा कि सरकार का यह कदम महज एक ‘चुनावी जुमला’ है और इसका मकसद आगामी चुनावों में फायदा हासिल करना है।

विपक्ष लगाएगा नैय्या पार…

राज्यसभा में एनडीए सरकार बहुमत से दूर है, हालांकि समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी समेत अन्य विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा में जिस तरह इस बिल का समर्थन किया है। उससे लगता है कि सरकार के लिए ये बिल राज्यसभा में आसानी से पास हो जाएगा।

ये है समीकरण

राज्यसभा में सांसदों की वर्तमान संख्या 244 है। बिल पास कराने के लिए वहां दो तिहाई सांसदों यानी 163 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में राज्यसभा में एनडीए सरकार के पास बहुमत से काफी कम आंकड़ा है. एनडीए  के पक्ष में सिर्फ 90 सदस्य हैं, जिनमें भाजपा के 73, निर्दलीय + मनोनीत 7, शिवसेना के 3, अकाली दल के 3, पूर्वोत्तर की पार्टियों की तीन (बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट+सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट+नागा पीपल्स फ्रंट) और आरपीआई के 1 सांसद हैं।

वहीं विपक्ष के पास 145 सांसद हैं, जिसमें कांग्रेस के 50, टीएमसी के 13, समाजवादी पार्टी के 13, एआईएडीएमके के 13, बीजेडी के 9, टीडीपी के 6, आरजेडी के 5, सीपीएम के 5, डीएमके के 4, बीएसपी के 4, एनसीपी के 4, आम आदमी पार्टी के 3, सीपीआई के 2, जेडीएस के 1, केरल कांग्रेस (मनी) के 1, आईएनएलडी के 1, आईयूएमएल के 1, 1 निर्दलीय और 1 नामित सदस्य शामिल हैं।

ऐसे पास हो सकता है बिल

भाजपा (73) सहित एनडीए के पास 90 सांसद हैं। कांग्रेस (50), सपा (13), बसपा (4), राकांपा (4) आप (3) ने बिल का समर्थन किया है। इनकी संख्या 74 होती है। इस तरह एनडीए और बिल का समर्थन कर रहे विपक्षी सांसदों की कुल संख्या 162 हो जाती है। यदि 13-13 सांसदों वाली तृणमूल, अन्नाद्रमुक या बीजद (9), तेदेपा (6) और टीआरएस (6) में से किसी एक के समर्थन करने पर भी यह बिल राज्यसभा में आसानी से पास हो जाएगा।

ये है सरकार का फैसला

मोदी कैबिनेट ने सोमवार को सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया। इसके तहत जिन लोगों को अभी तक आरक्षण का लाभ नहीं मिलता था यानी जो अनारक्षित श्रेणी में आते थे उन लोगों को इस फैसले से सरकारी नौकरी और शैक्षणिक क्षेत्र में लाभ मिलेगा।

Web Title : Real examination of general category reservation bill today in the Rajya Sabha