लोकसभा चुनाव : आरएसएस की खास व्यूह रचना प्रदेश की इन पांच सीटों पर

मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने के काम पर जुटा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विनिंग प्लान पर काम कर रहे पदाधिकारी और स्वयंसेवक

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जयपुर। आरएसएस ने तमाम लोकसभा सीटों पर व्यूह रचना रचना तैयार की है, जिसके आधार पर संघ लगातार तमाम सीटों पर मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने की मुहिम पर काम कर रहा है, लेकिन आरएसएस ने 5 लोकसभा सीटों को लेकर खास तौर पर विशेष व्यूह रचना तैयार की है। जिसमें करौली-धौलपुर, अलवर, टोंक-सवाईमाधोपुर, सीकर और जोधपुर हैं। आरएसएस पदाधिकारियों की पिछले दिनों हुई बौद्धिक मंत्रणा में इन सीटों पर विशेष फोकस रखने की रणनीति बनी है। आरएसएस इन सीटों पर नया विनिंग प्लान बना चुका है।
करौली-धौलपुर सीट
करौली धौलपुर में भाजपा का मुख्य फोकस एसटी एससी वोट बैंक पर तो है ही साथ ही बैरवा, कोली समेत दलितों की जातियों को साधने के साथ मानकर चलते हैं कि यदि दलितों में ज्यादा सेंध लगा ली तो उतना ही आसान होगा लेकिन समस्या ये है कि इस क्षेत्र को भाजपा का पिछली बार जीत का अंतर बेहद कम रहा। इसीलिए आरएसएस का यहां बृहत स्तर पर अभियान चल रहा है। ओबीसी और सवर्ण वोट बैंक करौली-धौलपुर में मतदान के प्रति थोड़ा कम जागरूक माना जाता है। इस वोट बैंक को मतदान के प्रति जागरूक करने का अभियान जारी है, साथ उन्हें सर्वाधिक संख्या में पोलिंग बूथ तक भिजवाया जाए इस योजना पर कार्य किया जा रहा है। आरएसएस के स्थानीय पदाधिकारियों ने इस लोकसभा क्षेत्र में इस रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। जातिगत संतुलन साधने की रणनीति बनाने वाली कांग्रेस के लिए अब आरएसएस इस क्षेत्र में की वोटर पर पैनी नजर लगाए हैं।
अलवर सीट
अलवर लोकसभा क्षेत्र में मेवात इलाकों में जहां पर हिन्दू वोट बैंक की संख्या मुस्लिम से कम या कमोबेश बराबर है। वहां आरएसएस 90 प्रतिशत से भी ज्यादा पॉलिग रणनीति पर फोकस लगाए हुए है। साथ ही आरएसएस के अनुषांगिक संगठन विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल के कार्यकर्ता एक वोटर्स जागरूकता के हिडन मूवमेंट पर काम कर रहे हैं। जिसमे मोदी को पीएम बनाना प्राथमिकता है जिसके तहत ऊजार्वान कार्यकतार्ओं की पूरी फौज घर घर जाकर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के साथ खुद के पारंपरिक वोट बैंक को मतदान के प्रति जागरूक करना शुरू कर दी है।
सीकर सीट
सीकर में सुमेधानंद सरीखे संत के सामने मुसीबत ये है कि कांग्रेस के सधे हुए नेता सुभाष महरिया पहले भाजपा में रहे हैं, ऐसे में वे भाजपा के चक्रव्यूह को भेदने की हैसियत रखते हैं। साथ ही महरिया को चुनाव प्रबंधन का मास्टर माना जाता है। ऐसे में भाजपा के साथ आरएसएस ने प्लानिंग बनाई है। मोदी और सिर्फ मोदी को पीएम बनाने के लिए जनता में अभियान चलाया जाए। बड़ी रणनीति ये भी है कि किसान तबके को कर्ज माफी जैसे मुद्दे पर कांग्रेस के खिलाफ तैयार करना, बेरोजगरी भत्ते को मुद्दा बनाना। साथ ही बिजली पानी जैसे मुद्दों पर जनता में व्यापक अभियान चलाना। शेखावाटी के वोटर को सबसे जागरूक माना जाता है। यहां पर जब तक जातिगत संतुलन के साथ मुद्दों को हावी न बनाया जाए, तब तक जीत की उम्मीद भी बेमानी है। बाबा भले ही जाट हैं, लेकिन भाजपा व संघ की दलील है कि साधु की कोई जाति नहीं होती। आरएसएस के सामने यहां पर कॉमरेड भी एक पहलू है। विधानसभा चुनाव में चौमू को छोड़कर तमाम सीट भाजपा हार चुकी थी। यही कारण है कि इस सीकर सीट पर आरएसएस ने मूल वोट बैंक को साधने के साथ किसान पर फोकस किया है। सुभाष महरिया के चुनावी प्रबंधन के तोड़ के लिए आरएसएस हर एक क्षेत्र में विचार परिवार को गुप्त रूप से प्रचार के साथ रोजाना हर क्षेत्र के बदलाव का फीडबैक ले रहा है।
टोंक- सवाईमाधोपुर सीट
इस सीट को भी आरएसएस इतना आसान नहीं मानता। यही कारण है कि आरएसएस यहां पर मुस्लिम इलाकों के आसपास के हिन्दू वोटर को सर्वाधिक मतदान जागरूकता के अभियान में जुटा हुआ है। दूसरा ये कि इस क्षेत्र से सचिन पायलट सरीखे दिग्गज भी आते हैं। सामान्य सीट पर मीणा समुदाय के नमो नारायण मीणा को कांग्रेस द्वारा प्रत्याशी बनाया जाना आरएसएस के लिए इसलिए भी चिंता का विषय यह है कि अब मीणा वोट बैंक में कितनी सेंध लगाई जा सकती है आरएसएस की ये रणनीति भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि फिलहाल किरोड़ी लाल मीणा सरीखे नेता भी एक्शन में नज? नहीं आ रहे। आरएसएस विचार परिवार का बड़ा तबका सर्वाधिक इस क्षेत्र के प्रवास पर ही है। जो गुप्त तरीके से अपने अभियान में जुटा हुआ है। आगामी दिनों में इस क्षेत्र में वसुंधरा राजे के अलावा योगी सरीखे दिग्गजो की भी दर्जनों सभाएं प्रस्तावित हो लेकिन आरएसएस विचार परिवार भाजपा कार्यकतार्ओं से ज्यादा और बिना तामझाम के पूरे क्षेत्र में खुद के वोटर को साधने में जुटा है।
जोधपुर सीट
जोधपुर सीट पर आरएसएस इसलिए सबसे ज्यादा जोर लगाए हुए हैं, क्योंकि यह सीट राजस्थान की सबसे हॉट सीट बनी हुई है। कारण साफ की एक तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत है, तो दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत। ऐसे में आरएसएस ने इस सीट पर हर एक वोट पर पूरा होमवर्क करने की कवायद शुरू कर रखी है। आरएसएस जानता है कि जरा सी भी चूक भाजपा को इस सीट पर भारी पड़ सकती है। यही कारण है कि भाजपा के नेताओं पर और कार्यकतार्ओं पर आरएसएस व विचार परिवार नजर लगाए हुए हैं। आगामी दिनों में आरएसएस के कई पदाधिकारियों के इस क्षेत्र में प्रवास कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। कुल मिलाकर कहा जाए तो आरएसएस और उसका विचार परिवार 25 की 25 सीटों पर भाजपा के समानांतर बिना लवाजमे और तामझाम के चुनाव प्रचार अभियान में जुटा है, लेकिन इन 5 सीटों पर आर एस एस ने सर्वाधिक फोकस किया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि आर एस एस इन 5 सीटों पर क्या कमाल करवा पाता है।

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