बायतु में वोटों के ध्रुवीकरण से उलझा पेंच; अब जाट वोटर्स नही रहे जीत के फेक्टर, अल्पसंख्यक और SC/ST वोटर्स करेंगे नैया पार

जोधपुर@ माधुसिंह गोरा: बायतु के रण में इस बार कांग्रेस व भाजपा दोनों के समक्ष चुनौती खड़ी हो गई है। सशक्त निर्दलीय की बजाय तीसरे मोर्चे के रूप में अन्य दलों के दो प्रत्याशियों के डटे रहने से दोनों दलों की सांसें फूल रही हैं। दोनों को अपने परम्परागत वोटों के बिखरने की चिन्ता सता रही है। यहां इस बार कांग्रेस से राहुल के करीबी व कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हरीश चौधरी प्रत्याशी है तो भाजपा ने मौजूदा विधायक कैलाश चौधरी पर फिर से दांव खेला है. वहीं राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक पार्टी से उम्मेदाराम बैनीवाल मैदान में है और बसपा से किशोर सिंह के बीच कड़ा मुकाबला बना हुआ है.

बायतु विधानसभा क्षेत्र का गठन 2008 में पहली बार हुआ इससे पहले यह विधानसभा बाड़मेर विधानसभा का अभिन्न अंग हुआ करती थी, 2008 में इस विधानसभा में कांग्रेस की टिकट पर पहली मर्तबा जाट समाज के दिग्गज नेता एवं 4 बार बाड़मेर-जैसलमेर के सांसद रहे कर्नल सोनाराम चौधरी विधानसभा पहुंचे, लेकिन 2013 में समीकरण बदल गए और राजनीती में कल आए लड़के कैलाश चौधरी ने दिग्गज जाट नेता कर्नल सोनाराम चौधरी को 13974 वोट से पटखनी दी और भाजपा की टिकट पर जीत हासिल की हालंकि बाद में कर्नल सोनाराम चौधरी ने 2014 में पाला बदल दिया भाजपा में शामिल होकर बाड़मेर जैसलमेर सांसदीय सीट पर ताल ठोकी और जसवंतसिंह जसोल को हराकर जीत के झंडे गाड़े.

यहां की सियासत का गणित इस बार युवाओं के जोश औऱ जुनून से नई करवट ले सकता है। बायतु विधासनसभा जिले की सबसे बड़ी जाट बाहुल्य सीट है यहां के मतदाताओं का मूड पूरे जिले के मतदाताओं के मूड को प्रभावित करते है इस विधानसभा क्षेत्र की कुल जनसंख्या 339510 है जिसमे से 207787 मतदाता है इस सीट पर 20 प्रतिशत अनुसूचित जाति जनजाति के मतदाता है जो हर बार जीत या हार का समीकरण तय करते है बायतु विधानसभा क्षेत्र पूरी तरीके से ग्रामीण है इस विधानसभा में एक भी नगर निकाय नहीं है इस विधानसभा में 3 पंचायत समिति और 75 ग्राम पंचायत है. परिसीमन के बाद इस बार यहां तीसरी बार चुनाव हो रहे है।

जातिगत समीकरण के लिहाज से वोटों के ध्रुवीकरण के कारण इस सीट को निकालने में अब अल्पसंख्यक व एससी-एसटी जाति के वोट निर्णायक साबित हो सकते है, जिसके कब्जे में यह वोटर्स है वही अब इस सीट को निकालने में कामयाब हो सकते है। क्यों कि इस सीट पर तीसरे मोर्चे के रूप में कब्जा जमाने वाले के नवगठित पार्टी रालोपा से तीसरे जाट उम्मीदवार उम्मेदाराम को भी जाटो के वोटो का तीसरा हिस्सा मिलता दिखाई दे रहा है, जिससे यहां जाट वोट तीन भागो में विभाजन होता दिखाई देने से अल्पसंख्यक व एससी के वोटर्स जिस तरफ जाते है वो ही इस सीट चतुष्कोणीय मुकाबले में बाजी मार सकता है. ऐसे सियासी हलको में कयास लगाए जा रहे है.

जानकार मान रहे हैं कि ऐसे हालात में अब बायतु के रण का फैसला अन्य जातियों के निर्णायक मतों से ही तय होगा। टिकट घोषणा से पहले क्षेत्र में दलों के नेताओं की ओर से बायतु के विकास, समस्याओं आदि मुद्दों को लेकर बातें की जा रही थी, लेकिन मतदान की तिथि नजदीक आने के साथ ही मुद्दों को भुला दिया जाता है। प्रत्याशियों की ओर से भावनात्मक जुमलों, मतदाताओं के पैरों में साफा रखकर, पैर छूकर इज्जत बचाने की बातें की जा रही है ।

वे मुद्दे जिन पर इन दिनों कोई चर्चा नहीं-

अगर बायतु विधानसभा के चुनावी मुद्दों की बात की जाए तो विगत कई वर्षो से पानी व बिजली की आस लगे बैठे लोगों के घरों तक बीजेपी के इन पांच साल के कार्याकाल में पानी व बिजली पहुंचाने का कार्य किया, लेकिन अभी भी कई गाँवो के घरों में पानी व बिजली नहीं पहुंच पाए है। उन लोगों में विधायक के प्रति नराजगी भी देखी जा रही है। दरअसल लिफ्ट कैनाल परियोजना का कार्य चल रहा है लेकिन अभी तक कई गाँव ढाणियों में पेजयल संकट है ! क्षेत्र के सभी गाँवों में अकाल का छाया है, जिसके कारण ग्रामीण अपने पशुओ को बचाने के लिए काफी चिंतित है. चारे पानी का बन्दोबस्त करना मुश्किल हो रहा है. समस्याओं की बात करें तो गाँवों में सड़क बिजली पेयजल सहित मूलभूत सुविधाओं की कमी से यहां के आमजन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है इसके अलावा बायतु मुख्यालय पर बस स्टेण्ड की कमी और कस्बे के अंदर टूटी सड़को से भी जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस विधानसभा में सभी लोग सरकार से नाराज नहीं है कुछ लोग वर्तमान विधायक के काम काज से खुश है, लेकिन युवाओ की बेरोजगारी यहां पर बड़ा मुद्दा बन सकता है.

क्षेत्र में डार्कजॉन की बड़ी गम्भीर समस्या बनी हुई है. खेती व पशुपालन पर निर्भर इस क्षेत्र के लिए पानी की भयंकर समस्या बनी रहती है अगर ट्यूब वेळ शुरू हो जाए तो यहाँ के किसान निर्भर हो सकते, बायतु क्षेत्र के कुछ हिस्सों को करीब एक दशक पूर्व जांच दल ने गिरते भूजल स्तर को देखते हुए डार्क जॉन घोषित कर दियाजिसके कारण किसानो को क्रषि कनेक्शन समेत अन्य सुविधाओ से वंचित रहना पड़ रहा है. ऐसे में घोषित डार्क जॉन हटाने का प्रमुख मुद्दा है.

Web Title : Screwed by the polarization of votes in the biuta; Jat voters no longer win Factor