नाश्ते पर 45 ‌‌मिनट चली शाह-नी‌तीश बैठक, ‍सीट शेयरिंग पर बात अभी बा‌कि, डिनर पर फिर होगी मुलाकात

पटना : ‌मिशन 2019 के लोकसभा चुनाव की तैया‌रियों के बीच भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह पूरे देश के दौरे पर हैं और सभी सहयोगियों से मिल रहे हैं। इसी कड़ी में बिहार में लोकसभा सीट बंटवारे को लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बिहार दौरे पर हैं। गुरूवार को पटना एयरपोर्ट पर अमित शाह के पहुंचने के बाद गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत हुआ। जिसके बाद वो नीतीश कुमार से अमित शाह ने बंद कमरे में मुलाकता की।

दोनों नेताओं की मुलाकात नाश्ते पर 45 मिनट तक हुई उम्मीद जताई जा रही है कि इस मुलाकात में दोनों पार्टियों के प्रमुखों ने सीट बंटवारे पर बात की है। लेकिन मीडिया के सामने दोनों ने कोई बयान नहीं दिया है। लेकिन दोनों ही कमरे से बाहर मुस्कुराकर निकले थे। नीतीश कुमार और अमित शाह के साथ बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी मौजूद रहे। इस बैठक के बाद साफ हो गया है कि बीजेपी व जेडीयू की झोली में कितने सीट मिलेंगे। इसका अभी तक खुलास नहीं हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बीजेपी बिहार में करीब 22 सीटें मांग रही है तो वहीं जदयू ज्यादा सीटों की मांग कर रहा है।

एनडीए सरकार को बचाने अमित शाह नीतीश कुमार को मनाएंगे। नीतीश कुमार के अलावा अमित शाह अपने पार्टी के अहम नेताओं व सोशल मीडिया टीम से मिलकर बात करेंगे। रालोसपा के अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा भी एनडीए सरकार से नाराज हैं। देखते हैं कि अमित शाह उपेंद्र कुशवाहा से मिलते हैं या नहीं। साथ ही लोजपा के मुखिया व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान से भी मुलाकात होगी। बता दें कि सीट बंटवारे को लेकर नीतीश कुमार लंबे समय से नाराज चल रहे हैं।

जेडीयू के एनडीए में लौटने के बाद अमित शाह की इस पहली बिहार यात्रा में इन दोनों नेताओं की मुलाकात आने वाले दिनों की सियासी तस्वीर की दशा और दिशा के लिहाज से बेहद अहम है। 2019 के लोकसभा चुनाव में चेहरा किसका होगा और किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी, इन दो सवालों का रास्ता एनडीए के किसी दल को नहीं सूझ रहा। कहा जा रहा है कि अमित शाह और नीतीश की मुलाकात इन्हीं सवालों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। आधे घंटे से अधिक चली इस मुलाकात के बाद नीतीश मुस्कुराते हुए बाहर तो निकले लेकिन जेडीयू या बीजेपी, किसी भी दल की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है।

लोकसभा चुनाव में अब करीब 8 महीने बचे हैं लेकिन एनडीए के सभी घटक दलों ने बीजेपी पर सीटों के बंटवारे को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। बीजेपी के रणनीतिकार चाहते हैं कि सीटों का बंटवारा 2014 लोकसभा चुनाव के अनुसार हो, जिसमें बीजेपी के हिस्से बिहार से 22 सीटों पर जीत मिली थी। रामविलास पासवान की लोजपा और उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा के साथ मिलकर गठबंधन में बीजेपी ने 30 सीटें लड़ी थी। बीजेपी करीब 22 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है और बड़े भाई की भूमिका चाहती है. लेकिन दूसरी तरफ जेडीयू 2015 लोकसभा चुनावों का हवाला देकर बड़े भाई की भूमिका चाहती है।

बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में इन 40 सीटों में से एनडीए को कुल 31 सीटों पर जीत हासिल हुई। एनडीए की 31 सीटों में बीजेपी ने 22, लोजपा ने 6 और रालोसपा ने 3 सीटों पर कब्जा जमाया। तब जेडीयू अकेले चुनावी समर में उतरी थी तो चालीस सीटों में से दो सीटों पर ही जीत मिली थीं, लेकिन जेडीयू का मानना है कि बुरे हालात में भी 16-17 फीसदी वोट हासिल हुए.

सूत्रों की मानें तो जेडीयू चाहती है कि दोनो पार्टियां 17-17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़े हैं। बाक़ी की सीटें एलजेपी और आरएलएसपी को दे दी जाएं. जेडीयू इसके अलावा यूपी और झारखंड में 4 सीटें चाहती है। सियासी गलियारों में जेडीयू के आरजेडी और कांग्रेस नेताओं के साथ अंदरखाने बातचीत की खबरें भी सुर्खियों में है। सियासत के जानकार इसे जेडीयू की प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा मान रहे हैं। 2014 से 2018 तक देश की सियासत में काफी बदलाव आ चुके हैं.
विपक्षी दलों को बीजेपी के विधानसभा चुनावों में बढ़ते प्रभाव से अपने वजूद बचाने की चिंता सताने लगी है, तो एनडीए के सहयोगी दलों के साथ पिछले 4 सालों में बीजेपी के साथ खट्टे-मीठे अनुभवों के मद्देनजर अब अपने फैसलों पर पुनर्विचार करने में लगे हुए हैं. लोकसभा चुनावों से पहले एनडीए में शामिल बीजेपी के कई सहयोगी एक-एक कर साथ छोड़ने लगे हैं। टीडीपी, जीतन राम मांझी की हम और पीडीपी एनडीए से बाहर निकल चुकी हैं। वहीं, शिवसेना ने 2019 में अलग चुनाव लड़ने का ऐलान कर एनडीए की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अकाली दल ने भी राज्य सभा के उप सभापति पद पर दावेदारी ठोक कर बीजेपी की मुश्किलों को बढ़ाने का काम किया है।
बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू के बीच सीटों के तालमेल और राज्य में कौन बड़ा भाई है, इन लेकर पिछले एक महीने से जमकर बयानबाजी हो रही है। हालांकि जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार ने साफ कहा कि लोकसभा चुनाव बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। इसके लिए उन्होंने सीटों का फॉर्मूला भी दिया है।
Web Title : Shah-Nitish meeting for 45 minutes on breakfast