राज्य सरकार की तैयारी | निजी अस्पतालों की मनमानी पर ब्रेक लगेगा

क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के लिए केन्द्र सरकार से आग्रह

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जयपुर। प्रदेश में जल्द ही निजी अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लग सकेगा। अस्पताल न तो मनचाही फीस वसूल सकेंगे और न ही किसी मरीज का शोषण होगा। करीब नौ साल से प्रस्तावित क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के दायरे में निजी अस्पतालों को लाने के लिए चिकित्सा विभाग ने सभी तैयारियां कर ली है। केन्द्र स्तर पर निजी चिकित्सालयों के लिए बनाए जा रहे नियमों का इंतजार है, जिसके तत्काल बाद ये कानून राजस्थान की जनता को बड़ी राहत देगा। निजी अस्पतालों में लम्बे चौड़े बिल के नाम पर लूट की शिकायतें राजस्थान समेत देशभर में आम बात है। किसी भी निजी अस्पताल में जाते ही मरीजों की जेब कटना शुरू हो जाती है। कई बार तो ऐसी नौबत आती है कि निजी अस्पतालों में लूटने के बाद मरीज थम हारकर सरकारी अस्पताल की ओर रूख करते है। ऐसी ही पीड़ा को समझते हुए 2010 में केंद्र सरकार ने क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट संसद में पारित किया। उद्देश्य सिर्फ एक था कि मरीजों को सरकारी हो या निजी चिकित्सा संस्थान, हर जगह वाजिब दामों पर इलाज मिल। किसी भी तरह की धोखाधड़ी मरीज के परिजनों के साथ न हो लेकिन राजस्थान समेत अधिकांश राज्यों में अभी तक नियमों के अभाव में ये कानून कागजों में ही चल रहा है। हालांकि, चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की माने तो अब इस दिशा में काम शुरू हो चुका है। फिलहाल ये एक्ट क्लिनिकल लेबोरेट्रीज पर लागू है, जिसे जल्द ही निजी अस्पतालों पर भी लागू करने की कवायद जारी है।
जल्द तय होगी निजी अस्पतालों की जवाबदेही
अब केंद्र सरकार के क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लागू करने की तैयारी है। केंद्र ने 2010 को क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट संसद में पारित किया था लेकिन अभी तक नियमों के अभाव में मंशा के अनुरूप काम नहीं हो पाया है। गहलोत सरकार के काम संभालते ही चिकित्सा विभाग के अधिकारी एक्टिव हुए और केंद्रीय मंत्रालय से सम्पर्क साधा तो जल्द निजी अस्पतालों के रूल्स जारी होने की जानकारी मिली है। हाल ही में चिकित्सा मंत्री की मौजूदगी में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ समित शर्मा ने की घोषणा की थी कि केन्द्र स्तर पर नियम फाइनल होते ही कानून को अक्षरश लागू किया जाएगा।
ये होंगे फायदे
प्रदेशभर के निजी अस्पताल पहली बार किसी कानून के दायरे में पंजीकृत होंगे। इन अस्पतालों की जवाबदेही के साथ पारदर्शिता बढ़ेगी। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आएगा। पंजीकृत अस्पताल को मरीज से वसूला जाने वाला परामर्श शुल्क, जांच शुल्क सार्वजनिक करने होंगे। इससे मरीज को अपने इलाज का खर्च पहले ही पता होगा । पंजीकृत अस्पताल आपातकालीन मरीजों के इलाज से इनकार नहीं कर सकेंगे। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू होने के बाद निजी अस्पतालों की लूट पर काफी हद तक बंदिश लगेगी, क्योंकि अभी तक राजस्थान में चिकित्सा संस्थाओं का किसी भी जगह रजिस्ट्रेशन नहीं होता है। ऐसे में कोई भी लापरवाही-धोखाधडी सामने आने पर सिर्फ पुलिस में शिकायत का ही विकल्प है जबकि एक्ट लागू होने के बाद जिला सीएमएचओ को अधिकार होंगे कि वे किसी भी अस्पताल में लापरवाही सामने आने पर सीधे एक्शन ले सकेगा। इसमें अस्पताल को एक तय समय तक बन्द करने जैसी सख्ती भी हो सकती है.
एक्ट के ये हैं मुख्य प्रावधान
जिला पंजीकरण प्राधिकरण बनेगा, जहां सभी प्रकार के अस्पताल, क्लिनिक, नर्सिंग होम्स का पंजीकरण करेंगे। बगैर पंजीकरण के कोई भी चिकित्सा संस्थान संचालित नहीं होगा। बगैर पंजीकरण अस्पताल चलाने पर काफी बड़ा जुमार्ना तय होगा। अस्पताल को पंजीकरण के लिए तय शर्तें पूरी होगी, जिसमें बेड के हिसाब से कर्मचारियों की संख्या, रिकार्ड का रखरखाव, पेशेवर और शैक्षिक योग्यता पूरी करना अनिवार्य होगा। इन सभी पंजीकृत अस्पताल का नियमित निरीक्षण होगा, रिकार्ड की भी जांच होगी। कोई भी अस्पताल केन्द्र की तरफ से तय नियमों की पालना नहीं करेगा, तो उस पर जुमार्ने लगेगा.

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