गेंद हमारे पाले में है, खेल कैसे खेला जाता है ये हम बताएंगे-पंकज चौधरी

जयपुर: राजस्थान में यदि सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहने वाले किसी खाकी वर्दी वाले पुलिस अधिकारी का जिक्र होता है तो इस क्रम में आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी का नाम सबसे पहले आता है। इसका कारण खुद पंकज चौधरी ही है, जिनकी बेबाक और नीडर होकर की जाने वाली बयानबाजी के लिए ही वे जाने जाते हैं। अक्सर किसी के बारे में कुछ बयानबाजी कर सुर्खियों में रहने वाले पंकज चौधरी एक बार फिर सुर्खियों में है।

खास बात ये है कि इस बार किसी पर हमला बोले जाने के साथ ही ये आईपीएस अधिकारी अपने साथ किए जा रहे सौतेले व्यवहार से कुछ आहत है। भारतीय पुलिस सेवा 2009 बैच के अधिकारी पंकज चौधरी ने सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर अपनी पीड़ा बयां की है। चौधरी ने अपनी एक पोस्ट में उन्हें उनकी ईमानदारी के साथ काम करने की आदत की सजा दिए जाने की बात की है।

अपनी पोस्ट में चौधरी ने लिखा कि, “आज से मेरा नाम ‘गिनीज बुक’ और ‘लिम्का बुक’ में नामांकन हेतु शायद अतिविशेष उपलब्धि के लिए दर्ज होना चाहिए। दंगा रोकने का पुरस्कार एक इंक्रीमेंट रोक देने के रूप में दिया गया है।” चौधरी ने आगे लिखा कि, “दंगा रोकने के लिए पंकज चौधरी ऐसे कई इंक्रीमेंट्स क़ुर्बान कर सकता है।

शायद पंकज चौधरी को समझने में जल्दीबाजी की जा रही है। इससे कमजोर दिल वाले, भ्रष्टों, चापलूसों और दलालों की सेहत पर फर्क पड़ता है, न कि स्वाभिमानी व्यक्ति के मजबूत इरादों पर। जयहिदं।” इसके साथ ही चौधरी ने अपनी कार्यशैली पर नाज जाहिर करते हुए शायराना अंदाज में लिखा कि, “तुम चले थे डुबोने अगर हमने तैरना सीख लिया तो फिर क्या होगा।” जयहिदं जयभारत जयसविंधान। साथ ही उन्होंने लिखा कि, “खेल का अभी हाफ टाइम है, अब गेंद हमारे पाले में है। खेल कैसे खेलते हैं, ये हम बताएंगें। विशेषकर राज्य के भ्रष्टों एंव ग़द्दारों को।”

गौरतलब है कि संघलोक सेवा आयोग से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद शुक्रवार को राज्य सरकार द्वारा भारतीय पुलिस सेवा 2009 बैच के अधिकारी पंकज चौधरी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनका एक इंक्रीमेंट रोक दिया गया है। ऐसे में उनका इंक्रीमेंट रोके जाने से भविष्य में उनके प्रमोशन पर भी असर पड़ेगा। वहीं इस बारे में खुद पंकज चौधरी का कहना है कि ईमानदारी की सजा चाहे कैसी भी हो, वो इसके लिए हर सजा झेलने को तैयार है। भले ही ये सजा इंक्रीमेंट रोके जाने की ही क्यों न हो।

उल्लेखनीय है कि साल 2014 में 12 सितंबर को बूंदी के नैनवा स्थित खानपुर में कथित रूप से एक देव प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था, जिससे वहां तनाव पैदा हुआ। इसके बाद गांव में तोड़फोड़ आगजनी की घटना हुई और कानून-व्यवस्था इतनी बिगड़ गई कि वहां कर्फ्यू लगाना पड़ा, जहां 13 से 20 सितंबर 2014 के बीच कर्फ्यू रहा। पंकज चौधरी उस समय बूंदी के एसपी थे और उन पर इसी दंगे के दौरान घटनास्थल पर समय से नहीं पहुंचने का आरोप है। इसी आरोप को लेकर उन्हें कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में डेढ़ साल पहले चार्जशीट दी गई थी।

वहीं दूसरी ओर, इस मामले में पंकज चौधरी का कहना है कि उस समय पंचायती चुनाव का माहौल था। इस घटना में वे मौके पर पहुंचे थे और जांच पड़ताल के बाद ये पाया गया था कि यह घटना प्रायोजित थी। उस समय पुलिस ने दंगे को भड़कने नहीं दिया था, अगर ऐसा होता तो न जाने क्या होता। इसके बावजूद उनको शाबासी दिए जाने के बजाय कुछ नेताओं के दबाव में आकर प्रताड़ित किया जा रहा है। गौरतलब है कि हिंसा और तोड़फोड़ के बाद पंकज चौधरी को एसपी पद से एपीओ कर दिया गया था। पंकज चौधरी वर्तमान में राजस्थान स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में पुलिस अधीक्षक के पद पर राजधानी जयपुर मे तैनात हैं।

चौधरी का कहना है कि कुछ नेताओं एंव उच्च अधिकारियों ने 21 मुस्लिमों को जो निर्दोष थे गिरफतार करने का दबाव बनाया था एंव दंगा कराने की मंशा रखने वाले गिरफ़्तार दर्जन भर आपराधिक तत्वों को छोड़ने का पुरा दबाव बनाया , एसपी पंकज चौधरी ने जब दबाव नहीं माना और संवैधानिक मूल्यों को महत्ता दी तो उनको साजिश के तहत एपीओ, चार्जशीट एंव अब सजा दी गई है, जो सरासर गैरकानूनी है चौधरी इस निर्णय के खिलाफ अपील एंव माननीय न्यायालय की शरण लेंगे।

Web Title : The ball is in our back, we will tell how the game is played - Pankaj Chaudhary