स्कूल का मुंह तक नहीं देखा फिर भी यहां दादी-नानी हैं इंजीनियर, 70 से ज्यादा देश कर रहीं रोशन

जयपुर: अजमेर के छोटे से गांव तिलोनिया की महिलाओं ने भले ही स्कूल में कदम न रखा हो लेकिन अनपढ़ होने के बावजूद वे किसी इंजीनियर से कम नहीं हैं। वे एक इंजीनियर की तरह सोलर एनर्जी पर काम कर रही हैं और यह गांव दुनिया भर की महिलाओं को भी हुनर सिखा रहा है। दादी-नानी की उम्र की महिलाओं को सौर उर्जा की प्लेट बनाते और सर्किट लगाते देख आप दंग रह जाएंगे।

विदेशी महिलाएं प्रशिक्षण लेकर अपने देश में जाकर घरों को घरेलू सोलर लाइट्स से रोशन कर रही हैं। इन महिलाओं का चयन विश्व के विकासशील देशों के गरीब गांवों से किया जाता है। वैसे तो तिलोनिया गांव की आबादी महज 1000 है, लेकिन बेयरफुट कॉलेज और सामाजिक कार्य व अनुसंधान केंद्र में काम करने वाली महिलाओं के कारण यह अलग देश-सा नजर आता है। यहां ट्रेनिंग लेने वाली महिलाओं को सोलर लालटेन, एलईडी लाइट, वॉटर हीटर जैसे उपकरण बनाना सिखाया जाता है।

तिलोनिया में स्थित बेयरफुट कॉलेज पिछले करीब 40 साल से ज्यादा समय से सक्रिय है जिसे संजीत बंकर रॉय चलाते है। यहां पिछले कुछ समय से घरेलू सोलर लाइट्स और लालटेन बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है और यह प्रशिक्षण दुनिया के उन गरीब देशों की महिलाओं को दिया जाता है जहां मूलभूत सुविधाओं की कमी है। महिलाएं ऐसी चुनी जाती है, जिन्होंने औपचारिक शिक्षा भी ग्रहण नहीं की है।

इन महिलाओं को सोलर पैनल और बैट्री की सहायता से 40 वॉट की घरेलू सोलर लाइट्स और लालटेन बनाने तथा उसकी देख-रेख का प्रशिक्षण दिया जाता है। यह प्रशिक्षण करीब छह माह चलता है। विदेश मंत्रालय और अक्षय उर्जा मंत्रालय इन महिलाओं का खर्च वहन करता है। ये महिलाएं अपने देश में जाकर कम से कम बीस घरों को सोलर लाइट्स से रोशन करने का प्रण लेती हैं। यहां हर साल सैकड़ों बेयरफुट महिला इंजीनियर तैयार होती हैं जो अपने-अपने क्षेत्रों में सोलर लालटेन व सोलर लाइट लगाकर उनका अंधियारा मिटाती हैं।

बता दें कि बेयरफुट कॉलेज में साल 1985 में सोलर उपकरण बनने शुरू हुए, लेकिन तब पुर्जे बाजार से लिए जाते थे। साल 1989 में पहली बार सर्किट भी यहीं बनने शुरू हुए। साल 2004 में यहां बनी लाइट पहली बार विदेशों तक पहुंची। साल 2008 से सरकार के सहयोग से विदेशी महिलाओं की ट्रेनिंग शुरू हुई।

Web Title : The school's face was not seen even though there are grandmother-in-law engineers